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दहेज के डर से फैमिली नहीं चाहती थी पढ़ाना, जिद की और लड़की ने बदल ली दुनिया

गांव के लोग भी कहते थे पढ़ लिखकर क्या करेगी, एक दिन शादी ही तो करनी है।

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 04:18 AM IST
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों सम्मानित होती समिता।  (फाइल फोटो) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों सम्मानित होती समिता। (फाइल फोटो)

दानापुर (पटना). बेटी ज्यादा पढ़ेगी तो ज्यादा दहेज देना पड़ेगा, इस रुढ़िवादी सोच और सामजिक दबाव के आगे माता-पिता समिता को ज्यादा पढ़ने नहीं देना चाहते थे। 10वीं पास करने के बाद घर में बिठा देना चाहते थे, पर जिद कर समिता ने शाहपुर स्थित अपने घर से कुछ ही किलोमीटर दूर दानापुर में 12वीं में एडमिशन लिया। मन में डॉक्टर बनने की चाहत रखते हुए बॉयोलॉजी की पढ़ाई शुरू की। पर इंटर के बाद परिवार के लोगों ने उसे अब आगे और नहीं पढ़ाने की ठान ली।

गांव के लोग कहते थे- पढ़कर क्या करोगी, एक दिन शादी ही तो करनी है

- गांव के लोग भी कहते थे पढ़ लिखकर क्या करेगी, एक दिन शादी ही तो करनी है। काफी जिद की पर फैमिली नहीं मानी।

- समिता ने हार नहीं मानी और घरवालों से एक बार फिर जिद कर एक कंप्यूटर कोर्स करना शुरू कर दिया और खुद की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में पढ़ाने लगी।

- घर से बाहर जाती को गांव वाले ताना देते। कइयों ने अपने घर की लड़कियों पर समिता से मिलने पर पाबंदी लगा दी। पर उसने घर वालों को समझा किसी तरह अपना कोर्स जारी रखा।

- इसके बाद उसने पोस्ट ग्रैजुएशन के लिए नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया। इस दौरान घरवाले शादी के लिए दबाव देने लगे पर उसने शादी से इनकार कर दिया।

खुद के पैरों पर खड़ी हुई तो लोग परेशान हुए

- पोस्ट ग्रैजुएशन के बाद समिता ने समिता फाउंडेशन नाम से एक संस्थान शुरू किया। इसमें स्टूडेंट्स को पारा मेडिकल कोर्स कराया जाता था।

- बाद में केंद्र सरकार के स्किल डेवलपमेंट इनिशिएटिव (एसडीआई) योजना के तहत वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोवाइडर (वीटीपी) के रूप में मान्यता मिली।

- 2016 में राज्य सरकार ने भी उसके संस्थान को कुशल युवा प्रोग्राम के लिए मान्यता दी। मेहनत और लगन से समिता ने अपने संस्थान को राज्य से सबसे बेहतर संस्थानों की श्रेणी में ला खड़ा किया। 2017 में समिता को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सम्मानित किया गया।

बिना दहेज की शादी की तो समाज ने छोड़ दिया

- अपने पैरों पर खड़े होने के बाद समिता ने बिना ऐसे लड़के के शादी करने की ठानी जो दहेज लेने के खिलाफ हो। इस दौरान सोशल साइट के जरिये सुमीत वर्मा के संपर्क में आई।

- सुमीत एयर फोर्स में पोस्टेड है। दोनों के दहेज के पूरी तरह खिलाफ रहने के विचार ने दोस्ती को खास बना दिया। दोस्ती को रिश्ते में बदलने के लिए जब दोनों ने बिना दहेज शादी करने का निर्णय लिया तो जाति आड़े आ गई।

- अगड़े-पिछड़े का पचड़ा भी आ खड़ा हुआ। उसके पढ़ने पर एतराज करनेवाले समाज को जब इसका पता चला तो मानों भूचाल ही आ गया। लोग तरह-तरह की बातें करने लगे।

- कईयों ने अनजान नंबरों से फोन कर धमकी तक दे डाली, पर समिता अपने निर्णय पर अडिग रही। समिता ने किसी तरह समझा-बुझा कर अपने परिवार को मना लिया और आखिर में अपने पसंद के लड़के से विवाह कर घर वालों के दहेज के डर को खत्म कर दिया, जो उसके डॉक्टर बनने के सपने में सबसे बड़ा बाधक बना था।

- समिता कुमार कहती है कि पहले डरती थी, पर अब दकियानूसी सोचवाले समाज की परवाह नहीं। खुशी इस बात की है कि घरवाले आखिर में उसके और उसके निर्णय के साथ हो गए।

- स्टूडेंट प्रेरणा कहती है कि समिता ने यह साबित कर दिया कि अगर कोई कुछ ठान ले व उस दिशा में सही तरीके से प्रयासरत हो जाए तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता। सभी लड़कियों को उससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों सम्मानित होती समिता।  (फाइल फोटो)मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों सम्मानित होती समिता। (फाइल फोटो)
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