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नवविवाहित नर्स की संदिग्ध मौत, पंखे पर नहीं था फंदे का निशान, जमी थीं धूल की परतें

लूसी ने जिस नंदन नामक युवक से शादी की थी, वह उसकी बड़ी बहन श्वेता का देवर है।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 14, 2018, 05:32 AM IST

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    मृतका लूसी की फाइल फोटो।

    भागलपुर.आदमपुर स्थित कमिश्नरी कर्मियों के सरकारी क्वार्टर में मंगलवार की शाम को एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। मृतका लूसी कुमारी (21) रिकाबगंज मोहल्ले की रहने वाली थी। चार जनवरी की उसकी शादी नंदन कुमार से हुई थी। दोनों ने कोर्ट मैरेज किया था। एसबीआई मेन ब्रांच के पास एक निजी नर्सिंग होम में लूसी नर्स का काम करती थी। गया के नर्सिंग स्कूल में उसने एडमिशन भी करा लिया था। इस माह का वेतन लेकर वह नर्सिंग कोर्स करने के लिए गया जाने वाली थी, वह इंटर पास थी। लुसी की दादी सुदामा देवी कमिश्नरी की प्राइवेट रसोईया है। लूसी दादी से मिलने आई थी, यहां दादी के सरकारी क्वार्टर के एक कमरे में पंखे के सहारे साड़ी के फंदे से बंधी उसकी लाश मिली है।


    मायकेवालों ने की मृतका के पति की पिटाई

    लूसी की मौत से बौखलाए मायकेवालों ने मौके पर ही उसके पति नंदन की जम कर पिटाई कर दी। पुलिस ने नंदन की जान बचाई और उसे तुरंत हिरासत में ले लिया। लुसी की मां मीना देवी का कहना है कि लूसी की हत्या कर लाश को लटका दिया गया है, ताकि यह आत्महत्या लगे। मीना इस मामले में अपने दूर के रिश्तेदार अमित और उसके दोस्तों को संदिग्ध मान रही है। हालांकि मीना ने दामाद पर कोई आरोप नहीं लगाया है। घटना की जानकारी पाकर सिटी डीएसपी शहरयार, जोगसर थानेदार मनीष कुमार मौके पर पहुंचे मामले की छानबीन की। परिजन लुसी की संदिग्ध मौत का कारण नहीं बता पा रहे हैं। लुसी का मायका हवाई अड्डा के पास गोपालपुर गांव में है और उसके पिता अरुण पासवान फर्टिलाइजर दुकान में काम करते हैं।

    ड्यूटी से दादी लौटी तो पोती की लाश पंखे से लटकी थी

    दादी सुदामा देवी ने बताया कि भागलपुर पर लूसी अक्सर मुझसे मिलने आती थी। शाम को ड्यूटी खत्म कर क्वार्टर लौटी तो कमरे का दरवाजा बंद था। पड़ोसियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद दरवाजा तोड़ा तो भीतर लूसी की लाश पंखे से लटकी हुई थी। इसके बाद अमित नामक एक रिश्तेदार को सूचना दिया। वह आदमपुर के एक होटल में काम करता है। गोपालपुर से कुछ ही देर में लूसी की मां, दोनों भाई, बहन भी पहुंच गए। परिजनों के पहुंचने पर अमित और उसका दोस्त वहां से भाग निकला। इस कारण मां अमित और उसके दोस्तों पर शक कर रही है। जबकि दादी का कहना है कि अमित और उसके दोस्तों को उसने फोन कर बुलाया था। जबकि लुसी मां का आरोप है कि उनकी सास अमित और उसके दोस्तों को बचा रही है।

    पति ने कहा-लूसी के मोबाइल पर आया था अमित का फोन, उसे रिश्तेदार बताया

    पति नंदन का कहना है कि एक-दो बार लूसी के मोबाइल पर अमित का फोन आया था। इस पर मैंने पूछा था कि ये अमित कौन है? लूसी ने रिश्तेदार बताया था। फिर कभी उसका फोन नहीं आया। लूसी ने कभी यह भी बताया कि अमित या कोई उसे परेशान करता है। शादी कर लूसी काफी खुश थी। वह ससुराल में भी रही थी।

    बहन के देवर से लूसी ने की थी शादी

    लूसी ने जिस नंदन नामक युवक से शादी की थी, वह उसकी बड़ी बहन श्वेता का देवर है। श्वेता की शादी नंदन के बड़े भाई चंदन से हुई है। माता-पिता से छिपा कर लूसी ने नंदन से कोर्ट मैरेज किया था। इस बात की जानकारी सिर्फ बहन श्वेता को थी। इस कारण लूसी मांग में छिपा कर सिंदूर लगाती थी। कहती थी कि जब तक मेरे माता-पिता विधिवत नंदन से शादी नहीं कर देंगे, तब तक सिंदूर इसी तरह लगाऊंगी।

    मामले की जांच की जा रही है
    सिटी डिएसपी शहरयार अख्तर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। लाश के पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के सही कारण का पता चल सकेगा। वैसे परिजन जो लिख कर देंगे, उस आधार पर केस दर्ज किया जाएगा।

    फंदे से झूलती तो हट जाती धूल
    लूसी की लाश जिस पंखे के सहारे लटकी हुई थी, उसके तीनों डैनों पर धूल की मोटी परत जमी थी। यदि लूसी ने आत्महत्या की तो फंदे से धूल की परत जस की तस कैसे रह गई। जाहिर है फंदा से धूल की परत जरूर हट जाती।

    12 फीट ऊंचे पंखे में कैसे बांधा फंदा

    लूसी की लाश के पास प्लास्टिक की बाल्टी रखी थी। कहा जा रहा है कि उसी पर चढ़कर उसने पंखे में फंदा बांधा। लेकिन पंखे की ऊंचाई 10-12 फीट थी। बाल्टी पर चढ़कर पंखे में फंदा बांधना या लटकाना संभव नहीं है। फिर उसने आत्महत्या कैसे की?...।


    दोस्तों संग क्यों भाग निकला अमित
    लूसी की मां और भाई के पहुंचने पर अमित और उसके दोस्त तुरंत फरार हो गए। परिजनों का कहना है कि पहले अमित भी इसी सरकारी क्वार्टर में रहता था। दो माह पहले ही उसे यहां हटाया गया है। उसके रहते हुए लूसी भी दादी से मिलने क्वार्टर आती थी।

    दूसरे दरवाजे को तोड़ने का क्या औचित्य
    जिस कमरे में लूसी की लाश मिली, उसमें दो दरवाजे थे। एक दरवाजा भीतर से बंद था, जिसे परिजनों ने तोड़ा। कमरे का दूसरा दरवाजा खुला हुआ था। जब कमरे का एक दरवाजा खुला हुआ था तो दूसरे दरवाजे को तोड़ने का क्या औचित्य है।

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    बेड पर लूसी की डेडबॉडी।
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    पंखे से लटका फंदा।
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    बेड पर लूसी की डेडबॉडी।
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    क्वार्टर में पड़ा लूसी का शव और रोते-बिखलते उसके परिजन।
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    कमिश्नरी कर्मी के सरकारी क्वार्टर में लूसी की मौत के बाद पहुंची पुलिस से उलझते लूसी के परिजन। इस दौरान उन्होंने दामाद की पिटाई कर दी।
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    इसी पंखे में लूसी के फांसी लगाने की बात कही जा रही है, मगर पंखे पर जमी धूल जस की तस है।
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