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गरीबी से बच्चों पढ़ाई न छूट जाए, इसलिए इस टीचर ने लिया 10 बच्चों को गोद

इमरोज आलम ने बताया कि अमित के पिता की असामयिक मौत ने सभी को दुख पहुंचाया।

सुधीन्द्र प्रसाद वर्मा| Last Modified - Feb 12, 2018, 05:36 AM IST

Teacher adopt poor children for Better education
गरीबी से बच्चों पढ़ाई न छूट जाए, इसलिए इस टीचर ने लिया 10 बच्चों को गोद

शेरघाटी (बिहार).    मिडिल क्लास फैमिली में पले, बढ़े यहां के रहने वाले इमरोज अली साधारण किसान के बेटे हैं। लेकिन वे हजारों सरकारी स्कूल के नियोजित शिक्षकों के लिए मिसाल हैं, जो अपने आप को आर्थिक रूप से कमजोर मानते हैं व उनकी शिकायत रहती है कि सरकार उन्हें कम वेतन दे रही है। वे कहते हैं कि सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत होने से कुछ नहीं होता, इरादे भी मजबूत होने चाहिए। 


कपड़ों से लेकर स्टेशनरी तक कराते हैं मुहैया

 

- इमरोज अली इसी प्रखंड के कोरमत्थू प्राइमरी स्कूल (एससी) के शिक्षक हैं। लगन से स्कूल के छात्र को शिक्षा दे रहे हैं।

- वे अपने स्कूल के दस वैसे छात्रों को निःशुल्क कॉपी, किताब, कलम, पेंसिल, रबर, जूते व कपड़े मुहैया करा रहे हैं, जिनकी मां या पिता इस दुनिया में नहीं हैं।

- वे कहते हैं कि जब तक हमारे स्कूल में छात्र पढ़ते रहेंगे, तब तक पाठ्य सामग्री मुहैया कराते रहेंगे। किसी भी सूरत में इन बच्चों की पढ़ाई बीच मंझधार में रूकने नहीं देंगे।

आर्थिक तंगी के कारण प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया 

 

 

- नियोजित शिक्षक इमरोज आलम 2008 में मैट्रिक किया। इसी तरह आईकॉम के बाद 2013 में ग्रैजुएशन किया।

- एमबीए में नामांकन के लिए जांच परीक्षा पास किया, लेकिन दुर्भाग्य को कुछ और मंजूर था। इनके पिता की बहुत ही तबीयत खराब हो गई।

- एक तो आर्थिक तंगी, ऊपर से पिता का बीमार होना , जिससे एमबीएम में एडमिशन नहीं हो सका।

- आर्थिक तंगी दूर करने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और एक प्राइवेट स्कूल भी ज्वाइन कर लिया। इसके बाद टेट परीक्षा दिया और दिसम्बर 2016 में सरकारी स्कूल के शिक्षक बन गए। 

 

एक बच्चे के पिता की सड़क हादसे में मौत के बाद लिया फैसला 

 

- स्कूल की तीसरी कक्षा में पढ़नेवाले अमित के पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई। इसकी चर्चा स्कूल में हुई।

- पिता की मौत से बच्चे पर प्रतिकूल असर पड़ा, वह शाम में फुटपाथ पर चना व बादाम बेचने लगा।

- बच्चे की यह स्थिति देखकर दिल में एक कसक उठी। रात भर नींद नहीं आई। दूसरे दिन स्कूल में पता किया किया।

- हमारे स्कूल में कितने बच्चे हैं, जिनके मां या पिता नहीं है। इसके बाद संजीत, धनंजय, अरविंद, अमित, रानी, गुड़िया, अंजू, रेशमी, रॉकी, शबनम परवीन को गोद ले लिया। जबतक बच्चे इस स्कूल में पढ़ेंगे, तब तक पाठ्य सामग्री देने का फैसला किया।  

 

 

जब तक यहां रहेंगे, तब तक सहयोग करते रहेंगे 
 

इमरोज आलम ने बताया कि अमित के पिता की असामयिक मौत ने सभी को दुख पहुंचाया। इसके बाद लगा कहीं आर्थिक कारण से बच्चे की पढ़ाई न छूट जाए। इसीलिए इस तरह का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि जब तक स्कूल में रहेंगे, तब तक इस तरह के बच्चों का सहयोग करते रहेंगे।

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