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तालाब में नहा रहीं दो सगी बहनोंं समेत तीन बच्चियां डूबीं, मिला 4-4 लाख का मुआवजा

सभी बच्चियां दोपहर में गांव के तालाब में नहाने गई थी। घंटों बीत जाने के बाद भी तीनों नहीं लौटी।

Bhaskar News| Last Modified - Mar 14, 2018, 01:05 AM IST

Three children died due to drowning during bath
तालाब में नहा रहीं दो सगी बहनोंं समेत तीन बच्चियां डूबीं, मिला 4-4 लाख का मुआवजा

बिहारशरीफ.    रहुई थाना एरिया के निजाम विगहा गांव में मंगलवार को तालाब में नहाने के के दौरान दो सगी बहनें समेत तीन बच्चियों की डूबकर मौत हो गई। घंटों बाद शव पाने में छहलाने के बाद घटना का खुलासा हुआ। जिसके बाद परिजनों की चीत्कार से गांव में कोहराम मच गया। मृतका मनोज जमादार की 12 साल की बेटी काजल कुमारी उसकी बहन 10 साल की सीमा कुमारी और लक्ष्मी जमादार की 10 साल की बेटी सुषमा  कुमारी है। तीनों बच्चियां आपस में चचेरी बहनें थीं। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाई।

 

शव उपर आने के बाद मौत का पता चला

 

सभी बच्चियां दोपहर में गांव के तालाब में नहाने गई थी। घंटों बीत जाने के बाद भी तीनों नहीं लौटी। इसके बाद ग्रामीण व परिजन उनकी खोजबीन में जुट गए। तालाब किनारे ढूंढकर ग्रामीण लौट गए। तालाब के किनारे बच्चियों के कपड़े रखे थे। जिससे लोग अनहोनी की घटना से आशंकित हो गए। कुछ ग्रामीण तालाब में शव की खोजबीन कर रहे थे। घटना के तीन घंटे बाद तीनों बच्चियों का शव पानी में उपर आ गया। जिसके बाद गांव में कोहराम मच गया।  

 

तीन चंचल बेटियों की मौत से गांव में मातम, चूल्हा ठंडा

 

गांव की तीन चंचल बच्चियों की मौत से परिजन ही नहीं ग्रामीण भी मातम में हैं। ग्रामीणों की मानें तो तीनों बहनें चंचल स्वभाव की थीं। सभी एक साथ स्कूल जाती थीं। बच्चियों के मौत के गम में मंगलवार की रात पूरे गांव का चूल्हा ठंडा रहा।  

 

मिला 4-4 लाख का मुआवजा 
सीओ ने आपदा राहत कोष से मृतका के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता राशि उपलब्ध कराई। प्रावधान के तहत अन्य सहायता उपलब्ध कराने का भी आश्वासन मिला।

 

बेटियों को पढ़ाकर टीचर बनाने का सपना टूट गया

तालाब से शव मिलने के बाद गांव में कोहराम मच गया। परिजन शव से लिपटकर दहाड़े मार रहे थे। काजल और सीमा के मजदूर पिता शव देख सदमें में चले गए थे। रुआंसी आवास में वह रह-रहकर बोल रहे थे कि सोचा था कि बेटी को पढ़ा-लिखाकर शिक्षिका बनाऊंगा। मगर किस्मत को यह मंजूर नहीं था। इसी तरह सुषमा की मां भी अपने बेटी को गांव के स्कूल में पढ़ा रही थीं। अनपढ़ माता-पिता का सपना था कि उनकी बेटी पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी करे।  

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