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मौका मिलते ही ये तीनों पहुंच जाते हैं पढ़ाने, बच्चों को नहीं पता कि ये हैं अफसर

रंजीत पाठक | Last Modified - Feb 13, 2018, 08:39 AM IST

ये अधिकारी हैं सदर एसडीओ रवींद्र कुमार, वरीय उपसमाहर्ता सुमित कुमार और पुलिस इंस्पेक्टर मधुरेंद्र कुमार।
  • मौका मिलते ही ये तीनों पहुंच जाते हैं पढ़ाने, बच्चों को नहीं पता कि ये हैं अफसर
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    बाएं से दाएं रवींद्र कुमार, सुमित कुमार और मधुरेंद्र कुमार।

    हाजीपुर (बिहार). कहते हैं शिक्षा दान से बड़ा कोई दान नहीं। लेकिन वर्तमान में एजुकेशन बिजनेस बन गई है। फायदा चाहे जिसका भी हो नुकसान बच्चों का ही होता है। लेकिन इस व्यवसायीकरण के बीच जिले के कुछ अधिकारी ऐसे हैं जिनके लिए आज भी शिक्षा दान ही है। अपने क्षेत्र में कड़क माने जाने वाले जिले के 3 अफसर, बच्चों के बीच एक कुशल शिक्षक की भूमिका में होते हैं। जब भी वक्त मिलता है, ये पहुंच जाते हैं गांव के बच्चों को पढ़ाने।

    बच्चे नहीं जानते कि उनके बीच मौजूद टीचर अफसर हैं

    - खास बात ये कि पढ़ाई कर रहे बच्चे, नहीं जानते कि ये अधिकारी हैं।

    - ये अधिकारी भी लाइमलाइट से दूर रह कर अपनी मुहिम में लगे हैं।

    - ये अधिकारी हैं सदर एसडीओ रवींद्र कुमार, वरीय उपसमाहर्ता सुमित कुमार और पुलिस इंस्पेक्टर मधुरेंद्र कुमार।

    आगे की स्लाइड्स में जानें तीनों अफसर्स के बारे में...

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    42 वीं बैच के बीपीएससी अधिकारी रवींद्र कुमार मूल रूप से शेखपुर जिला के रहने वाले हैं।

    रवींद्र कुमार, सदर एसडीओ, हाजीपुर

    - 42 वीं बैच के बीपीएससी अधिकारी रवींद्र कुमार मूल रूप से शेखपुर जिला के रहने वाले हैं।

    - 2015 में पूर्णिया से तबादले के बाद हाजीपुर आए। जैसे ही समय मिलता है, ये बच्चों को पढ़ाने पहुंच जाते हैं।

    - ऐसा नहीं है कि ये किसी एक जगह पर बच्चों को पढ़ाते हैं।

    - ड्यूटी के दौरान भी समय निकालकर फूस के पलानी में चल रहे कोचिंग संस्थानों और स्कूल में चले जाते हैं।

    - बिना अपना परिचय दिए बच्चों से रूबरू होकर पढ़ाने लगते हैं।

    - जब बच्चे संतुष्ट हो जाते हैं तो स्थानीय शिक्षक को गाइड लाइन देकर वे निकल जाते हैं।

    - हरौली में एसडीओ सर की क्लास अटेंड कर चुकी छठी क्लास की छात्रा मुन्नी, प्रीति ने बताया कि डीओ सर थे।

    - राहुल और मोनू का कहना था कि एसपी सर थे। बच्चे कहते हैं कि सर की क्लास बहुत अच्छी थी।

    - एसडीओ कहते हैं कि पढ़ाने का कोई निश्चित जगह या समय नहीं है। बस पढ़ाना अच्छा लगता है।

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    48 वीं बीपीएससी के अधिकारी गया जिले के एकारी निवासी सुमित कुमार 2015 में शिवहर से तबादले के बाद हाजीपुर आए थे।

    सुमित कुमार, वरीय उपसमाहर्ता

    - 48 वीं बीपीएससी के अधिकारी गया जिले के एकारी निवासी सुमित कुमार 2015 में शिवहर से तबादले के बाद हाजीपुर आए थे।

    - एक साल बाद 2016 में वरीय उपसमाहर्ता सुमित कुमार लोक निवारण पदाधिकारी बनकर महुआ गए।

    - वहां ग्रामीण छात्रों के लिए उन्होंने एक मुफ्त कोचिंग शुरू किया है।

    - सुमित कुमार के कोचिंग में छात्रों को बीपीएससी, यूपीएससी और अन्य प्रतियोगिताओं के लिए मार्गदर्शन मिलता है।

    - कोचिंग में सौ से भी जयादा छात्र पढ़ रहे हैं। सुमित बताते हैं कि उन्हें खुद प्रशासनिक सेवा की तैयारी में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

    - इसलिए वे मौका मिलते ही हर तबके के छात्रों को सिविल सर्विसेज की तैयारी के गुर बताते हैं।

    - खाली समय में टीवी देखने या सोशल मीडिया पर टाइम पास करने से ज्यादा छात्रों को पढ़ा कर उन्हें बेहद संतुष्टि मिलती है।

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    94 बैच के दारोगा मधुरेंद्र कुमार नालंदा जिले के रहने वाले हैं।

    मधुरेंद्र कुमार, इंस्पेक्टर

    - 1994 बैच के दारोगा मधुरेंद्र कुमार नालंदा जिले के रहने वाले हैं। 2016 में जमुई से तबादले के बाद वैशाली आए। तब से औद्योगिक थाना प्रभारी के पद पर कार्यरत हैं।

    - वे अपने थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय धनौती में नियमित रूप से बच्चों को पढ़ाते हैं। यहां बच्चो को समय-समय पर मुफ्त कॉपी, किताबें और पेंसिल भी देते हैं।

    - दर्जनों ऐसे बच्चे भी यहां पढ़ते है जिनके घरवालों को समझा कर खुद इंस्पेक्टर साहब ने स्कूल में उनका नामांकन करवाया है। मधुरेंद्र अगर किसी काम से थाना क्षेत्र से बाहर रहते हैं, तो अपने अन्य साथियों को बच्चों को पढ़ाने का आग्रह करके जाते हैं।

    - इस काम में थाना के तमाम लोग इनका साथ भी देते हैं। मधुरेंद्र बताते हैं कि बच्चों को पढ़ाने से उनको नई ऊर्जा मिलती हैं। अगर वे पुलिस विभाग में नहीं होते तो बच्चों के शिक्षक ही होते।

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Web Title: Three Officers Go To Teach Children As Soon As Possible
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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