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एसएम राजू एक साल से, सीके अनिल को आठ माह से नहीं ढूंढ़ पाई सरकार

अनिल मार्च 2017 और राजू दिसंबर 2016 से गायब हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 19, 2017, 05:07 AM IST

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    अनिल मार्च 2017 से गायब हैं।

    बिहार. राज्य के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लंबे समय से ड्यूटी से गायब हैं। ये हैं बिहार राज्य योजना पर्षद के परामर्शी व बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के ओएसडी रहे सी के अनिल और अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग के तत्कालीन सचिव एस एम राजू। अनिल मार्च 2017 और राजू दिसंबर 2016 से गायब हैं। अब सरकार ने अनिल व राजू को नोटिस जारी कर दस दिनों में भीतर विभागीय जांच आयुक्त के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है।

    पेपर लीक घोटाला : एसआईटी ने पूछताछ के लिए बुलाया तो गायब हो गए अनिल

    बिहार कर्मचारी चयन आयोग के ओएसडी सीके अनिल पर पेपर लीक घोटाले में पूर्व अध्यक्ष सुधीर कुमार का साथ देने का शक है। जनवरी-फरवरी 2017 में हुए इंटरस्तरीय संयुक्ति प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक मामले में तत्कालीन अध्यक्ष व सचिव पर आरोप लगे। अध्यक्ष बीच में गायब हो गए तो ओएडी पर कागजातों के साथ हेरफेर का मामला बना। प्रश्न पत्र लीक मामला गरमाया तो सरकार की ओर से एसआईटी गठित हुई। पूछताछ का नोटिस जारी होने के बाद से गायब हैं। एसआईटी ने उनको आठ मार्च को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन वह नहीं आए। करीब दो महीने बाद मई में पत्र के जरिए अपना पक्ष रखा। अनिल का कहना था कि वह भागे नहीं हैं, बल्कि चोट का इलाज करा रहे हैं।

    स्कॉलरशिप स्कैम : निगरानी की प्राथमिकी होते ही फरार हो गए हैं राजू

    राजू का नाम एससी-एससटी छात्रवृत्ति घोटाले में आया। वर्ष 2013-14 में एससी-एसटी छात्रवृत्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में गड़बड़ी का यह मामला पटना, नवादा समेत करीब डेढ़ दर्जन जिलों से आया। फर्जी छात्रों के नाम पर कागज पर चलने वाले इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला दिखाकर सरकारी राशि का गबन किया गया। निगरानी ने जैसे ही जांच शुरू की, तत्कालीन सचिव राजू के खिलाफ साक्ष्य जांच टीम के हाथ लगे थे। निगरानी विभाग द्वारा मुकदमा दायर होने के बाद वह दिसंबर 2016 से गायब हैं। उनको भी विभागीय कार्रवाई के लिए सात सितंबर को नोटिस दिया गया। लेकिन ईमेल और डाक से भेजा गया नोटिस वापस लौट आया।

    अब तक दोनों पर क्या हुई कार्रवाई

    - मुख्य सचिव को 1 मार्च से 1 जून 2017 तक के लिए चिकित्सकीय अवकाश का आवेदन भेजा था। पर इसे अस्वीकृत कर दिया गया था। फिर सामान्य प्रशासन विभाग ने 25 अगस्त को नोटिस जारी किया था। जिसका अनिल ने जवाब नहीं दिया। अब दस दिन में पेशी का आदेश दिया गया है।

    - पिछले वर्ष नवंबर में निगरानी की प्राथमिकी के बाद राजू को जनवरी में निलंबित कर दिया गया। इसके बाद से वह न तो सरकारी आवास पर पाए जा रहे हैं और न ही कार्यालय आ रहे हैं। गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हुई। पर कोर्ट ने जमानत दे दी। सामान्य प्रशासन विभाग ने कई बार ड्यूटी ज्वाइन करने को कहा पर वह नहीं आए।

    सब को पता है कहां है पर कार्रवाई नहीं

    राज्य के दो चर्चित मामलों-बीएसएससी पेपर लीक घोटाला और एससी/एसटी छात्रवृत्ति घोटाला में इन दोनों अफसरों की जांच एजेंसियों को तलाश है लेकिन ये पकड़ में नहीं रहे हैं। एकबारगी यह विश्वास नहीं होता कि एसआईटी और निगरानी की टीम दो आईएएस अफसरों को ईमानदारी से पकड़ने की कोशिश करे और कामयाबी नहीं मिले। इससे साफ है कि कहीं कहीं अंदरखाने में मिलिभगत का खेल चल रहा है। दरअसल प्रशासनिक हलके में सब को पता है कि सीके अनिल और एसएम राजू कहां हैं लेकिन अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हो पायी है।

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