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पति की लाश लेकर पत्नी पहुंची एसपी आवास, कहा- हमारे पति को लौटा दो साहब

एसपी आवास पर सुलेमान की बीवी हसनतारा पति के गम को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं। रोते रोते उनका बुरा हाल था।

Danik Bhaskar | Jan 16, 2018, 05:02 AM IST

बेतिया (मुजफ्फरपुर). 45 साल के सुलेमान की हत्या सिर्फ इसलिए हो गई कि वो छेड़खानी कर रहे बदमाशों से अपनी बेटी को बचा रहे थे। दरअसल, बेटी से छेड़छाड़ के बाद सुलेमान ने आरोपी के परिजनों से इसकी शिकायत की थी। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें चाकुओं से गोद दिया था। पटना में इलाज के दौरान रविवार को उनकी मौत हो गई। सोमवार को परिवार वाले उनका शव लेकर सीधे एसपी आवास पहुंचे। यहां उनकी पत्नी हसनतारा खातून ने एसपी जयंतकांत से कहा- हमें हमारा आदमी लौटा दो साहेब। इस पर एसपी ने कहा कि उन्हें लौटा तो नहीं सकता पर न्याय जरूर दिलाऊंगा।

यह है मामला

सुलेमान अंसारी की 11 वर्षीय बेटी पर पड़ोसी जाकिर अंसारी की गलत नीयत थी। 12 जनवरी की शाम बेटी काे खींचकर गन्ना के खेत में ले जाने लगा था। लड़की के चीखने चिल्लाने पर गांववालों की मदद से उसे बचा लिया गया। जब सुलेमान और उसकी पत्नी इसकी शिकायत करने जाकिर के घर गए तो उन्हें घायल कर दिया। जिसके बाद उन्हें भर्ती कराया गया जहां से चिकित्सकों ने उन्हें पटना रेफर कर दिया था।

फर्द बयान पर दर्ज हुई थी आरोपियों पर प्राथमिकी

पुलिस अफसर राजीव ने बताया कि इस मामले में सुलेमान के भतीजा सलीम अंसारी के बयान के आधार पर 13 जनवरी को मामला दर्ज कर पुलिस मामले की छानबीन ही कर रही थी कि सुलेमान की मौत की सूचना आई। उन्होंने बताया कि इस मामले में जाकिर अंसारी, इमरान अंसारी सहित सात लोगों को नामजद किया गया है। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।

घर तोड़ो या जमीन खोदो आरोपियों को पकड़ो: एसपी

परिजन एसपी के आवास पर सुलेमान की लाश लेकर पहुंचे और पूरी दास्तां सुनाई। परिजनों ने एसपी से आरोपियों पर कार्रवाई नहीं करने की बात एसपी को बताई। इसके बाद एसपी ने तुरंत अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों को आदेशित करते हुए कहा घर तोड़ो या जमीन फाड़ाे। हर हाल में गिरफ्तार करो या मैं चलूं, लेकिन मुझे हर हाल में आरोपियों की गिरफ्तारी चाहिए।

पत्नी ने कहा- मेरा सबकुछ उजड़ गया

एसपी आवास पर सुलेमान की बीवी हसनतारा पति के गम को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं। रोते रोते उनका बुरा हाल था। वह बार-बार कह रही थीं कि मेरा तो सबकुछ उजड़ गया। ऐसी ही स्थिति सुलेमान के दो मासूम बेटियों का भी है। हालांकि अन्य पड़ोसी दोनों को शांत कराने व सांत्वना देते रहे, लेकिन उनकी भी आंखें नम थीं।