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... पति कर रहा बनारस में काम, पत्नी गांव में उठा रही 11 साल से विधवा पेंशन

महिला 400 रुपये प्रति महीना के लिए अपने जीवित पति को कागजी तौर पर मृत घोषित कर चुकी है।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 10, 2018, 04:41 AM IST

  • ... पति कर रहा बनारस में काम, पत्नी गांव में उठा रही 11 साल से विधवा पेंशन

    हसनपुर (मुजफ्फरपुर).एक महिला का पति बनारस में नौकरी कर रहा है और वह गांव में 11 वर्षों से विधवा पेंशन लेती रही। मामला मंगलगढ़ पंचायत के सरहचिया गांव वार्ड संख्या-8 का है। गांव के ही एक व्यक्ति ने इसकी शिकायत एसडीओ से की है। इसके बाद बीडीओ ने जांच शुरू कर दी है। बीडीओ ने लाभुक महिला, उसके पति व पंचायत के तत्कालीन मुखिया रामप्रवेश यादव को प्रखंड कार्यालय में पहुंचकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। आज यह अवैध लाभ लेने का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है।

    महिला 400 रुपये प्रति महीना के लिए अपने जीवित पति को कागजी तौर पर मृत घोषित कर चुकी है। हालांकि सामाजिक सुरक्षा के लाभ के लिए फर्जीवाड़ा का मामला कोई नया नहीं है। पिछले वर्ष ही प्रखंड के सकरपुरा गांव में पेंशन के लाभ के लिए 115 लोग कागजी तौर पर विकलांग बन गए। यह मामला भी काफी जोर शोर से विभागीय पदाधिकारियों के कानों तक पहुंची थी। लेकिन उदासीनता ही माना जाय कि इस मामले की कोई जांच नहीं की गई। यदि पूरे प्रखंड में जांच की जाए तो ऐसे कई मामले और उजागर हो सकते हैं।

    आखिर किसने किया मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत

    इस मामले में जब लाभुक महिला का पति सकुशल जीवित है। तो आखिर किसने और कैसे उसका मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया। बिना मृत्यु प्रमाण पत्र संलग्न किए विधवा पेंशन का लाभ मिल पाना संभव नहीं है। यदि फर्जीवाड़ा के तहत ही मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत किया गया जो आश्चर्य की बात है। आखिर इस फर्जीवाड़े के तहत विधवा पेंशन का लाभ भी तो मृत घोषित व्यक्ति की पत्नी ही ले रही है। यदि इस मामले में वरीय पदाधिकारियों द्वारा जांच किया जाय, तो दोषी कटघरे में होंगे।

    बीडीओ ने बताई ये प्रक्रिया

    विधवा पेंशन का लाभ दिए जाने की प्रक्रिया के बारे में बीडीओ ने बताया कि इसके लिए विधवा को पति के मृत्यु प्रमाण पत्र को आवेदन के साथ संलग्न कर पंचायत कार्यालय में जमा किया जाता है। जहां मुखिया व पंचायत सेवक द्वारा इसे अग्रसारित कर प्रखंड मुख्यालय भेज दिया जाता है। बीडीओ अंतिम रुप से इसकी जांच पड़ताल कर अनुशंसा कर इसकी रिपोर्ट जिला कार्यालय भेजते हैं। अब ये प्रश्न उठता है कि, जब इतनी सारी प्रक्रिया हुई तो फर्जीवाड़ा कैसे हुआ।

    मुखिया ने कहा, याद नहीं कैसे हुआ फर्जीवाड़ा

    पंचायत के तत्कालीन मुखिया रामप्रवेश यादव ने बताया कि, वर्ष 2007 में पंचायत सेवक व प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी के माध्यम से सरहचिया गांव के करीब 15 से 20 महिलाओं को विधवा पेंशन का लाभ दिया गया था। लेकिन इसमें किस तरह फर्जीवाड़ा हुआ इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

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Web Title: Woman Take Widow Pension By Fraudulently
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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