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नेता तंत्र नाटक में दिखी जनता की बदहाल स्थिति

खगौल में नाटक नेता तंत्र का मंचन करते रंगकर्मी। खगौल | हर शनिवार साप्ताहिक नुक्कड़ संवाद शृंखला मे की नई कड़ी में...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:00 AM IST
खगौल में नाटक नेता तंत्र का मंचन करते रंगकर्मी।

खगौल | हर शनिवार साप्ताहिक नुक्कड़ संवाद शृंखला मे की नई कड़ी में सदा ने उदय कुमार लिखित एवं निर्देशित नाटक नेता तंत्र का प्रदर्शन किया।

दानापुर स्टेशन परिसर में नाटक की शुरुआत गीत.. जनता त्रस्त है, नेता मस्त गजब तमाशा देखो भाई लोकतंत्र है या नेता तंत्र से हुई। नाटक में दर्शाया गया कि जनता जिसे जनता जनार्दन कहा जाता है उसकी हालत लगातार बदतर होती जा रही है। वहीं दूसरी तरफ जनता से हाथ जोड़कर वोट मांगने वाले, गिड़गिड़ाने वाले नेता सत्ता हासिल कर लगातार धनवान होते जा रहे हंै। मौज उड़ा रहे हैं। लोकतंत्र मे जनता मालिक है और नेता सेवक, पर असलियत मे उल्टी गंगा बह रही है। आम जनता आजादी के सत्तर साल के बाद भी रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, महंगाई आदि के मुद्दों से आज भी जूझ रही है। वही जनता देखती है उसके हाथ फैलाकर वोट के लिए गिड़गिड़ाने वाला, कल तक आम जिंदगी बसर करने वाला नेता के पास बिल्डिंग, गाड़ियों का काफिला, तमाम ऐशो-आराम, हवाई यात्राएं करता हुआ धरती से आसमान पर पहुंचता जा रहा है और और आम जनता है कि दिनों-दिन बदहाली के दलदल मे धंसती जा रही है। जनता देखती है कि जन सेवा के नाम पर उनसे वोट लेने वाला, सत्ता पाकर पूंजीपतियोंं की सेवा मे लग जाता है। फिर पूंजीपतियों के साथ मिलकर आम जनता के शोषण के खेल मे लग जाता है। जनता सवाल पूछती है कि ये लोकतंत्र है या नेता तंत्र। कलाकारों में प्रभात किशोर, उदय कुमार, अशोक सिंघल, संजय साहनी, मनोज कुमार सिन्हा, विजय आदि ने अभिनय किया।