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‘योजनाओं के निजीकरण से गरीबों को लाभ नहीं’

पटना|वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए आए केंद्रीय बजट को अर्थशास्त्री डॉ. एनके चौधरी ने गरीबों पर मार बताया। उन्होंने कहा कि...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:00 AM IST
‘योजनाओं के निजीकरण से गरीबों को लाभ नहीं’
पटना|वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए आए केंद्रीय बजट को अर्थशास्त्री डॉ. एनके चौधरी ने गरीबों पर मार बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस बजट में कृषि, ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं आदि की बात कर डायरेक्शनल बदलाव की उम्मीद तो जगाई, लेकिन नवउदारवाद के तरीके से विकास की राह ढूंढ़ने का सारा बोझ गरीबों पर ही पड़ेगा। सरकार ने स्वास्थ्य बीमा और समर्थन मूल्य की बात तो जरूर की है, लेकिन इन मुद्दों का निस्तारण प्राइवेट हाथों में देने से गरीबों को लाभ नहीं मिलेगा। रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि बेसिक चीजें सरकारी हाथों में ही फायदा पहुंचा सकती हैं। सरकार जब तक इन सेवाओं को पूरी तरह हाथ में नहीं लेगी, आम जनता इसका पूरा लाभ नहीं उठा सकती। निजी हाथों में जाने पर इनका सही इस्तेमाल होने पर शक है। केंद्र सरकार उसी ढर्रे पर जा रही है, जिसकी शुरुआत वित्तमंत्री रहते मनमोहन सिंह ने की थी।

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