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खादी से जुड़े लोगों की आय बढ़ाने के लिए उद्योग विभाग बना रहा नीति

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा- हम चाहते हैं कि खादी से जुड़ी संस्थाएं मजबूत हों और इस काम में लगे लोगों की आमदनी भी...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:00 AM IST
खादी से जुड़े लोगों की आय बढ़ाने के लिए उद्योग विभाग बना रहा नीति
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा- हम चाहते हैं कि खादी से जुड़ी संस्थाएं मजबूत हों और इस काम में लगे लोगों की आमदनी भी बढ़े। इसके लिए जल्द खादी नीति बनेगी। उद्योग विभाग जो भी योजना बना रहा है, उसमें खादी से जुड़े जानकार लोगों से सलाह लिए जाएंगे। वह गुरुवार को ज्ञान भवन स्थित सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र में राष्ट्रीय खादी/शिल्प महोत्सव 2018 के उद्‌घाटन के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खादी नीति में आधुनिक चरखा और आधुनिक लूम के लिए 90% अनुदान, खादी संस्थाओं को ब्याज में 4% अनुदान, खादी संस्थाओं को उत्पादन लागत का 20 % अनुदान जैसे कई प्रावधान होंगे, ताकि इस उद्योग से जुड़े लोगों की आमदनी बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि खादी नीति में संस्थाओं को क्रय या लीज पर ली गई भूमि पर लगने वाला स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क की प्रतिपूर्ति, बुनकरों के लिए कॉमन वर्क सेट का निर्माण, सिल्क कुकुन एवं ऊन के कच्चे माल के लिए बैंक बनाने जैसे अन्य कई प्रावधान होंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री ने ज्ञान भवन परिसर में कतिया चरखा, त्रिपुरारी मॉडल चरखा, मृणमय शिल्प धातु शिल्प, मधुबनी पेंटिंग, पाषाण शिल्प, काष्ठ कला एवं अन्य शिल्प कलाओं की लगी जीवंत प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मौके पर उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के उप निदेशक अशोक कुमार सिन्हा द्वारा लिखित पुस्तक ‘बिहार के हस्तशिल्प’ का उन्होंने लोकार्पण भी किया। खादी महोत्सव को गांधी संग्रहालय के सचिव सह गांधीवादी विचारक रजी अहमद ने भी अपनी बातें रखीं।

शिल्प महोत्सव 2018 में लगाई गई प्रदर्शनी को देखते सीएम नीतीश कुमार, मंत्री विनोद नारायण झा व प्रधान सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ।

व्यापारिक नहीं, खादी संस्थाओं को सामाजिक संगठन माना जाए

मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी का जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, उसके साथ गांधी जी के विचार भी लोगों तक पहुंचेंगे। खादी संस्थाओं को व्यापारिक नहीं, बल्कि सामाजिक संगठन मानना चाहिए। 100 साल पहले चंपारण सत्याग्रह के समय गांधी ने खादी को बढ़ावा देने के लिए काफी जोर दिया और इसे लेकर संस्थाएं भी बनाई गईं, जिसके बाद खादी लोगों की भावना बन गई। इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन हर वर्ष और हर प्रमंडल में होना चाहिए। इससे खादी उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी।

2000 त्रिपुरारि चरखा का वितरण किया जाएगाा

उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने कहा कि पिछले साल विभाग ने एक हजार त्रिपुरारि चरखा का वितरण किया था। अभी 1070 चरखा का वितरित किया गया। आगे 2000 त्रिपुरारी चरखा का वितरण किया जाएगा। सरकार ने चरखा चलाने के लिए जरुरी कार्यशील पूंजी की भी व्यवस्था की है।

खादी भवन की जमीन पर है भू-माफियाओं की नजर

पीएचईडी मंत्री विनोद नारायण झा ने कहा कि हर जिले और शहरों में स्थित खादी भवन की जमीन को भूमाफियाओं ने अतिक्रमित कर लिया है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। खासकर के मधुबनी में खादी भवन की काफी जमीन थी, जिसका अतिक्रमण कर लिया गया है। मधुबनी की खादी का जिक्र करते हुए पीएचईडी मंत्री ने कहा कि यहां खादी जनआंदोलन के रुप में था, खादी आंदोलन से जुड़े लोग सांसद और विधायक भी बने।

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