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चार अप्रैल से एजुकेशन लोन देगा वित्तीय निगम

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत छात्रों को शिक्षा लोन देने के लिए वित्त विभाग वित्तीय निगम बनाएगा। इस निगम के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:00 AM IST

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत छात्रों को शिक्षा लोन देने के लिए वित्त विभाग वित्तीय निगम बनाएगा। इस निगम के संचालन की जिम्मेदारी वित्त विभाग की होगी। अप्रैल से यह निगम काम करने लगेगा। 4 लाख रुपए तक के लोन पर सरकार की गारंटी के बाद भी बैंकों द्वारा लोन देने में आनाकानी के कारण सरकार खुद निगम बना रही है।

मुख्यमंत्री तो पिछले दिनों एक कार्यक्रम में निगम के अप्रैल से प्रभावी होने की घोषणा भी कर चुके हैं। शिक्षा और वित्त विभाग इस निगम को बनाने के लिए लगातार बैठक करते रहे। वित्तीय एक्सपर्ट के साथ ही कंपनी और वित्तीय मैनेजमेंट के विशेषज्ञों से विभिन्न बिंदुओं पर विमर्श कर फिर से ड्राफ्ट बनाने का निर्देश दिया गया है। विचार किया जा रहा है कि लोन कितनी ब्याज दर पर दिया जाए। पढ़ाई के बाद नौकरी पा लेने के बाद ब्याज सहित राशि वसूली कैसे हो, इस पर भी विमर्श हो रहा है।

वित्तीय अनुशासन बनाए रखने को लेकर भी आवश्यक प्रावधान किया जा रहा है। शिक्षा विभाग छात्रों के संस्थान की जांच कर वित्त निगम को कागजात उपलब्ध करा देगा। निगम के माध्यम से तुरंत संबंधित छात्रों या संस्थान के खाते में राशि भेज दी जाएगी।

लोन लेने के लिए जाति और आय का बंधन नहीं

19 जनवरी तक स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के लिए 32842 ऑनलाइन आवेदन मिले। इसमें 19907 आवेदन जांच कर बैंक को 19034 आवेदन भेजे गए हैं। इसमें 14174 स्वीकृत हो चुके हैं। इसके लिए 424.48 करोड़ लोन स्वीकृत हुए हैं। 13413 स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जारी हुए हैं। इसमें 70.67 करोड़ लोन जारी किया गया है। इस योजना से लोन लेने के लिए जाति और आय का बंधन नहीं है। 80 प्रतिशत लोन के लिए विभिन्न राज्यों के प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़नेवाले छात्रों के आवेदन आते हैं। इस योजना का अधिक से अधिक लाभ दिलाने के लिए इसमें कई नए कोर्स भी जोड़े गए। बीए, बीएससी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, नर्सिंग सहित 36 कोर्स के लिए इस योजना से लोन दिलाने का प्रावधान किया गया है। इस योजना में पॉलीटेक्निक सहित अन्य कोर्स भी शामिल करने की आगे योजना है। शिक्षा सचिव के साथ विकास आयुक्त की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी इसकी मॉनीटरिंग करती है। जिला स्तर पर जिलाधिकारी को मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी दी है।

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