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मांझी ने एनडीए का साथ छोड़ा तो अशोक चौधरी समेत चार एमएलसी ने कांग्रेस से नाता तोड़कर नीतीश का हाथ थामा

हम के सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को एनडीए का साथ छोड़कर महागठबंधन की पतवार थाम ली।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:00 AM IST

मांझी ने एनडीए का साथ छोड़ा तो अशोक चौधरी समेत चार एमएलसी ने कांग्रेस से नाता तोड़कर नीतीश का हाथ थामा
हम के सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को एनडीए का साथ छोड़कर महागठबंधन की पतवार थाम ली। बुधवार की रात मांझी ने अपने सरकारी आवास पर महागठबंधन में शामिल होने का औपचारिक एेलान किया और सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी पर खूब बरसे। उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को पवित्र बताया पर राज्य भाजपा के नेताओं पर आश्रित रहने का आरोप लगाया। इधर मांझी के महागठबंधन में आने के साथ ही राजद ने राज्यसभा-विधानपरिषद उम्मीदवार चयन के लिए पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद को अधिकृत कर दिया।

बुधवार रात संसदीय बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया। राजद सूत्रों की मानें तो ने मांझी को राज्यसभा का ऑफर दिया गया है। लेकिन मांझी अपने बेटे को एमएलसी बनाने को इच्छुक हैं। मांझी खुद भी केन्द्र की जगह राज्य की राजनीति करना चाहते हैं। हालांकि मांझी ने कहा कि बेटा को एमएलसी बनने की शर्त पर नहीं, पार्टी को मजबूत करने के लिए महागठबंधन में आए हैं। 6 मार्च से उपचुनाव में महागठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में रैली करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में एक भी भाजपा नेता से उनकी बात नहीं हुई है। इधर रालोसपा के सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि फैसला उपेन्द्र कुशवाहा को लेना है।

बुधवार सुबह जीतन राम मांझी के आवास पर मिलने पहुंचे तेजस्वी यादव।

मांझी ने एनडीए छोड़ने के ये कारण गिनाए

जहानाबाद सीट मांगी थी। वह नही मिली तो राज्यसभा या विधानपरिषद में सीट देने को कहा। पर नहीं सुनी गई।

शराबबंदी से 90 हजार लोग जेल में हैं। बालूबंदी से मजदूरों के बच्चे बिलबिला रहे हैं। लेकिन इसपर बात करने से नीतीश उपहास उड़ाते हैं।

विस चुनाव में भाजपा ने हमें 21 सीट दी पर 16 सीट पर अपने लोगों को खड़ा करवा हमारे उम्मीदवारों को हरवाया।

एनडीए आरक्षण में कटौती की बात करता है। द्ववेदी भागलपुर दंगा में इंस्ट्रुमेंटल थे। डीजीपी क्यों बनाया?

ढाई साल एनडीए के साथ रहे जीतनराम

मांझी ने 8 मई 2015 को अपना नया दल हम (से) का गठन किया था। वो ढाई साल एनडीए गठबंधन में रहे। इसके पूर्व उन्होंने 20 फरवरी को जदयू छोड़ा था। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले 7 अगस्त को हम को सिंबल और मान्यता मिली। बिहार विधानसभा में उनकी पार्टी ने एनडीए गठबंधन में रहते हुए 21 सीटों पर चुनाव लड़ा पर एक सीट इमामगंज से खुद जीतन राम मांझी ही जीत सके। वो खुद अपनी परम्परागत सीट मखदुमपुर से हार गये थे।

दल-बदल कानून से बच जाएंगे चारों एमएलसी

पॉलिटिकल रिपोर्टर | पटना

बिहार कांग्रेस में अरसे से जारी उठा-पटक बुधवार की रात अपने मुकाम पर पहुंच गई। पटकथा तय थी। शाम पांच बजे कांग्रेस एमएलसी अशोक चौधरी, तनवीर अख्तर, दिलीप चौधरी और रामचंद्र भारती से सभापति को पत्र लिख कर जदयू में शामिल होने की जानकारी दे दी। सभापति से इसे मंजूरी भी दे दी। रात साढ़े आठ बजे चौधरी ने पोलो रोड स्थित अपने घर पर प्रेस कांफ्रेंस में इसकी घोषणा हुई।

चौधरी बोले- अब अपमान सहन नहीं हो रहा था। उपचुनाव में पार्टी ने ऐसे-ऐसे स्टार प्रचारक बनाए जिनको पहले किसी ने देखा तक नहीं। मेरे जैसे समर्पित कार्यकर्ता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को चुनाव समन्वयक बना दिया। इधर, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी बोले-हमने चारों एमएलसी को पार्टी से निकाल दिया है। इस बारे में पूछे पर अशोक चौधरी ने कहा कि कौकब कादरी अभी मैच्योर नहीं है। मैंने शाम 5 बजे ही सभापति को लिख कर दे दिया था। वे तीन घंटे तक क्या कर रहे थे? उन्हें अभी बहुत सीखने की जरूरत है। अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। कांग्रेस के विधान परिषद में 6 एमएलसी थे। 4 जदयू में चले आए। दो-तिहाई संख्या 4 ही होती है। इसलिए इन लोगों पर दलबदल कानून लागू नहीं हो सकेगा।

रात साढ़े 8 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में तनवीर अख्तर, रामचंद्र भारती, अशोक चौधरी, दिलीप चौधरी।

चौधरी ने कांग्रेस छोड़ने के ये कारण गिनाए

सीएलपी की बैठक में सदानंद सिंह ने मुझे अपमानित किया। मुझ पर आरोप लगाया कि भभुआ सीट को हराना चाहते हैं।

जदयू का ही भविष्य है। श्रीकृष्ण सिंह के बाद नीतीश कुमार के रूप में बिहार को सर्वश्रेष्ठ सीएम मिला है।

कांग्रेस महामंत्री सीपी जोशी ने एक व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए साजिश रची है।

राहुल गांधी अच्छे इंसान है लेकिन सीपी जोशी जैसे लोगों से घिरे हुए हैं। कांग्रेस में दलितों का अपमान होता है।

उठा-पटक का राज्यसभा चुनाव पर भी होगा असर

मांझी के महागठबंधन से जुड़ने से एनडीए को एक वोट का नुकसान हो गया है। चौधरी ने कांग्रेस से नाता तोड़ते समय दावा किया कि दल के अनेक विधायक उनके संपर्क में हैं और सही समय का इंतजार कर रहे हैं। क्या यह सही समय राज्यसभा चुनाव होगा? इस चुनाव में ह्विप जारी नहीं होता है। लिहाजा विधायक पार्टी के फैसले के खिलाफ वोट कर सकते हैं। कांग्रेस के विधायकों की संख्या 27 है। अगर चौधरी कांग्रेस के विधायकों से एनडीए के पक्ष में वोटिंग करा सके तो एनडीए को लाभ होगा।

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Web Title: मांझी ने एनडीए का साथ छोड़ा तो अशोक चौधरी समेत चार एमएलसी ने कांग्रेस से नाता तोड़कर नीतीश का हाथ थामा
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