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मॉडल स्कूलों की योजना को एक बार फिर शुरू कराने की तैयारी

बिहार में प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की व्यवस्था तो कर ली गई है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:05 AM IST

बिहार में प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की व्यवस्था तो कर ली गई है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता के मामले में कार्रवाई नहीं हो सकी है। राज्य सरकार ने हर प्रखंड में एक मॉडल स्कूल के निर्माण की योजना बनाई है। इसके लिए सरकार की ओर से प्रखंड स्तर पर पंचायत के एक हाईस्कूल का चयन कर कार्यक्रम को पूरा कराने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से राज्य में 216 मॉडल स्कूलों के निर्माण का कार्यक्रम तैयार किया गया था। वर्ष 2007 में शुरू हुई इस योजना के दायरे में बिहार के खाते में आए मॉडल स्कूलों का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं कराया जा सका है। अभी भी 81 मॉडल स्कूलों के भवन अर्द्ध निर्मित हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार ने तय किया है कि शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने और प्रखंड के हाईस्कूलों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के लिए इन मॉडल स्कूलों की योजना को पूरा कराया जाएगा। उसके बाद से बिहार की शैक्षणिक स्थिति पर मंथन शुरू हो गया है।

सिमुलतल्ला की तर्ज पर बनेगा स्कूल

प्रखंड स्तरीय मॉडल स्कूल का स्वरूप सिमुलतल्ला आवासीय विद्यालय का होगा। मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की संख्या छात्रों को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाएगी। हर कक्षा में 100 से 120 बच्चों का दाखिला होगा। प्रखंड के भीतर प्रतियोगिता आयोजित कर इन प्रतिभाओं का चयन किया जाएगा। बच्चों को वहां पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल मिलेगा। माना जा रहा है कि सरकार की ओर से इन स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को उनके घरों से स्कूल तक लाने व स्कूल से घर वापस छोड़ने के लिए परिवहन व्यवस्था भी होगी।

केंद्र से 186 करोड़ की मांग

शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने राज्य में अधूरे मॉडल स्कूलों के निर्माण कार्य को पूरा कराने के लिए केंद्र सरकार से 186 करोड़ की मांग की है। बिहार में बाद में योजना को स्वीकृति मिली और निर्माण शुरू कराने का निर्णय हुआ। इस कारण कार्य को पूरा कराना संभव नहीं हो सका है। मंत्री ने बताया कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को हमने ताजा स्थिति से अवगत कराया है। अगर ये भवन बनकर निर्मित होते हैं तो वहां पर मॉडल स्कूलों को खड़ा करने में सहूलियत मिल जाएगी। वहां आसपास के हाईस्कूलों के विद्यार्थियों व शिक्षकों को स्थानांतरित कर दिया जाएगा। साथ ही, इन स्कूलों में प्रशिक्षित योग्य शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति कर उसे मॉडल के रूप में स्थापित किया जाएगा।

विज्ञान-गणित में कमजोर

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से आयोजित होने वाली मैट्रिक परीक्षा के परिणाम बताते हैं कि विज्ञान व गणित में राज्य के विद्यार्थी कमजोर हो रहे हैं। प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर शैक्षणिक व्यवस्था का सर्वे करने वाली संस्था असर की रिपोर्ट में भी यह मामला सामने आया है। विश्व बैंक भी इस क्षेत्र में बच्चों के गणित, विज्ञान व अंग्रेजी में कमजोर ज्ञान पर चिंता जता चुका है। शिक्षक नेता मार्कंडेय पाठक का कहना है कि बच्चों को अगर मॉडल स्कूल की सुविधा मिले तो बच्चे निश्चित तौर पर बेहतर प्रदर्शन करेंगे और इससे उनमें बेहतर प्रदर्शन करने की प्रतिस्पर्धा विकसित होगी।

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