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50 हजार से अधिक के अंतरराज्यीय माल परिवहन के लिए आज से ई-वे बिल अनिवार्य

जीएसटी के तहत गुरुवार से राष्ट्रीय ई-वे बिल अनिवार्य रूप से लागू हो जाएगा। 50 हजार से अधिक की वस्तुओं के अंतरराज्यीय...

Danik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:05 AM IST
जीएसटी के तहत गुरुवार से राष्ट्रीय ई-वे बिल अनिवार्य रूप से लागू हो जाएगा। 50 हजार से अधिक की वस्तुओं के अंतरराज्यीय कारोबार करने वाले व्यवसायियों को अनिवार्य रूप से ई-वे-बिल जेनरेट करना होगा। अब कारोबारियों को हर राज्य के लिए रोड परमिट बनाने की जरूरत नहीं होगी। यह नई व्यवस्था 31 जनवरी की मध्य रात्रि से लागू हो जाएगी। इसके साथ ही बिहार ई-वे बिल प्रणाली समाप्त कर दी गई है। वहीं बिहार समेत देश के 16 राज्यों में 2 लाख से ज्यादा की वस्तुओं के इंट्रा स्टेट परिवहन के लिए भी ई-वे बिल लेना होगा। ये बातें बुधवार को सचिवालय सभागार में ई-वे-बिल की शुरुआत करते हुए जीएसटी काउंसिल के सदस्य और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहीं।

24 घंटे काम करेगी हेल्पलाइन

उन्होंने कहा कि व्यवसायियों की समस्या के समाधान के लिए वाणिज्यकर विभाग में 24 घंटे हेल्पलाइन काम करेगी, जहां लीगल और तकनीकी मामलों के जानकार अधिकारियों की तैनाती की गई है। पेट्रो उत्पाद को दायरे से बाहर रखा गया है। यानी पेट्रो उत्पाद के परिवहन के लिए ई-वे-बिल की जरूरत नहीं है। जीएसटी के तहत बिहार को 2017-18 के निश्चित रूप से 16402 करोड़ का राजस्व मिलेगा। मौके पर वाणिज्यकर और वित्त विभाग की प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी, वाणिज्य आयुक्त डॉ प्रतिमा, अपर आयुक्त अरुण कुमार मिश्र, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट पीके अग्रवाल और बीआईए के प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।

ई-वे बिल का औपचारिक उद‌्घाटन करते उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, वित्त सह वाणिज्यकर विभाग की प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी और वाणिज्यकर आयुक्त डॉ. प्रतिमा।

भरने पड़ेंगे सिर्फ 9 फील्ड

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के कारोबारियों के लिए यह व्यवस्था कोई नई नहीं है। वे पहले से ही ऑनलाइन परमिट सुविधा जेनरेट करते रहे हैं। फर्क इतना है कि अब वाणिज्यकर विभाग की साइट पर नहीं बल्कि ewaybillgst.gov.in साइट पर जेनरेट करना होगा। नई व्यवस्था के तहत ई-वे-बिल जेनरेट करने के लिए मात्र 9 फील्ड भरना होगा, जबकि सुविधा में 26 फील्ड भरने पड़ते थे। व्यवसायी चाहे तो अपने पंजीकृत स्मार्ट मोबाइल पर भी एप्स डाउन करके ई-वे-बिल जेनरेट कर सकते हैं।

क्या है ई-वे बिल

जीएसटी प्रावधानों के अनुसार, किसी भी वस्तु जिसका मूल्य 50,000 रुपए से ज्यादा है, इसे बाजार में स्थानांतरित करने से पहले ऑनलाइन पंजीकृत होना जरूरी है। इसके लिए एक केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर प्लेटफार्म बनाया गया है। ई-वे बिल दरअसल माल के परिवहन के लिए बनाया जाने वाला रोड परमिट है। इसे ऑनलाइन माध्यम से एनआईसी के पोर्टल ewaybill.nic.in पर बनाया जाएगा।

दो नंबर का माल आने लगा, राजस्व घटा, इसलिए ई-वे

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने एक अप्रैल से ई-वे- बिल को अनिवार्य करने का निर्णय लिया था। लेकिन अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में राजस्व संग्रह कम हो गया। कारोबारी दो नंबर से माल मंगवाने लगे। इसको देखते हुए काउंसिल ने एक फरवरी से इसे अनिवार्य करने को निर्णय लिया। एक बार ई-वे बिल प्रणाली लागू होने के बाद टैक्स चोरी काफी मुश्किल हो जाएगी क्योंकि सरकार के पास 50,000 रुपए से अधिक के सभी सामान का ब्योरा होगा और वह आपूर्तिकर्ता या खरीदार द्वारा टैक्स रिटर्न नहीं होने पर गड़बड़ी को पकड़ सकेगी। इस प्रणाली के तहत सप्लायर और खरीदार को दोनों को ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन करना होगा। ऐसा अनुमान है इस बिल के आने से सरकारी राजस्व में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी।

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