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विकास के लिए चुनाव, पार्टी और शिक्षा का सिस्टम बदलना जरूरी

पटना

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:05 AM IST

पटना डीबी स्टार

भारत के सर्वांगीण विकास के लिए चुनाव, राजनीतिक पार्टी और शिक्षा के सिस्टम में सुधार करना होगा। आज देश की राजनीति धन और बाहुबल आधारित होती जा रही है। आज चुनाव प्रक्रिया हाथ से फिसल रहा है। जब देश आजाद हुआ था, तब 14 राज्य और इतनी ही भाषाएं थीं, लेकिन आज 29 राज्य और 22 भाषाएं हो चुकी हैं। इसका दायरा और बढ़ाने की जरूरत है। राजनीतिक, आर्थिक और आध्यात्मिक सुधार के साथ भाषा और जातीय विविधता का सम्मान कर हम देश को खुशहाल और संपन्न बना सकते हैं। ये बातें जेएनयू के सेवानिवृत्त प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहीं। बुधवार को वे एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में सांस्कृतिक बहुलता और सामाजिक सामंजन विषय पर आयोजित लेक्चर में दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में 1980 के बाद धन का बोलबाला बढ़ा। धन संपन्न लोगों को ही राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवार बना रही है। नैतिकता की बात पूछने पर कहते हैं बाध के सामने बकरी कैसे खड़ी कर दें। विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में जब विमर्श किया गया तो तय हुआ पार्टी सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। जर्मनी में 5 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करने वाली राजनीतिक पार्टी को सरकार राशि उपलब्ध कराती है। उन्होंने शिक्षा मंत्री से कहा- मंत्री जी विश्वविद्यालयों में छात्र संसद का अभ्यास कराइए। शिक्षा सुधार मांग रही है। शहरी और औद्योगिकीकरण में पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. बीएस नायपॉल ने भारत के स्वतंत्रता के बाद 1950 में लिखा भारत में अंधेरा है। फिर दुबारा 1975 में भारत आकर लिखा-पिछड़ा, दलित, महिला सब लोग अपनी आवाज उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा राजा शशांक ने बौद्ध धर्म के विनाश का खूब प्रयास किया, लेकिन यह धर्म अंतरराष्ट्रीय हो गया। आज भारत को गुरु के रूप माना जाता है तो वेद उपनिषद और बुद्ध के कारण। औरंगजेब को शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह ने कड़ी चुनौती दी। महमूद गजनबी, बख्तियार खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी, मो बिन तुगलक और बाबर ने भारत में तबाही मचाई। फिर अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा किया। आज भारत में हिंसा, ईष्या, द्वेष, अलगाववाद चुनौती है। अस्मिता की राजनीति को बढ़ावा देने की जरूरत है। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि विविधता में एकता ही भारत की विशेषता है। कई चुनौतियों के बावजूद, संस्कृति विविधता मजबूत है। हमारे देश में 40 करोड़ देवी देवता मानने वाले लोग है, तो कई और भी अलग-अलग धर्म के लोग। संस्कृति देश को जोड़ता है। अध्यक्षता करते हुए शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान को संकलन कर पुस्तक का रूप दिया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के निदेशक सुनील रॉय व धन्यवाद ज्ञापन रजिस्ट्रार नील रतन ने किया।

जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर ने कहा- धन का दखल बढ़ा

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