पटना

  • Hindi News
  • Bihar
  • Patna
  • सूर्यमुखी, सरसों से वातावरण के ज़हर को कर सकते हैं कम
--Advertisement--

सूर्यमुखी, सरसों से वातावरण के ज़हर को कर सकते हैं कम

पटना

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:05 AM IST
पटना
हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्लांट साइंसेज विभाग के प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक डॉ. इरफान अहमद ग़ाज़ी ने दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के पटना कैंपस में बुधवार को विशेष व्याख्यान दिया। विवि के सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज ने ‘बायो टेक्नोलॉजी बेस्ड एप्रोचेज फॉर एनवायरमेंटल पॉल्यूशन कंट्रोल’ शीर्षक पर डॉ. ग़ाज़ी ने अपना लेक्चर दिया। डॉ. ग़ाज़ी ने बायोटेक्नोलॉजी के उपयोग से वातावरण को प्रदूषण रहित करने को लेकर चल रहे अपने शोध पर आधारित चर्चा की। उन्होंने कहा कि वातावरण को प्रदूषित करने वाले कारक कई स्रोतों से आते हैं जिसमें फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा प्रमुख है। यह कचरा फूड चेन के माध्यम से सब्जियों, फलों मांस एवं मछलियों में पहुंच जाता है जिसके सेवन से मनुष्य बीमार पड़ते हैं। पारा, शीशा, आर्सेनिक आदि गंगा नदी के किनारे पटना के साथ-साथ बिहार के अन्य भागों में बड़ी मात्रा में पाया जाता है ! उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाले हानिकारक कारकों का बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से निष्क्रिय करने और कम हानिकारक बनाने के उपाय बताए जिसका इस्तेमाल भारत के साथ-साथ विदेशों में किया जा सकता है। डॉ. गाजी ने सूर्यमुखी, सरसों की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला और यह बताया कि इनके इस्तेमाल से वातावरण में फैले ज़हर को कम किया जा सकता है। इससे पहले बॉयोटेक विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. जावेद अहसन ने डॉ. गाजी का परिचय करवाया। व्याख्यान में डीन प्रोफेसर आरएस राठौर, विभाग के अध्यक्ष डॉ. रिजवानुल हक, प्राध्यापकगण डॉ. राकेश कुमार, डॉ. आशीष शंकर, डॉ. अजय कुमार, डॉ. जावेद अहसन, डॉ. नीतीश कुमार, डॉ. कृष्ण प्रकाश, डॉ. अमृता श्रीवास्तव, डॉ. लोकेन्द्र शर्मा आदि के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे।

X
Click to listen..