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खाताधारियों को अंधेरे में रखकर उनके एकाउंट से चल रहा था खेल

पुराने नोटों को फर्जीवाड़ा कर बदलने के मामले में बिहार के कई व्यापारी प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) के सर्विलांस पर हैं।...

Dainik Bhaskar

Feb 03, 2018, 02:05 AM IST
पुराने नोटों को फर्जीवाड़ा कर बदलने के मामले में बिहार के कई व्यापारी प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) के सर्विलांस पर हैं। इसमें गया के कई व्यापारी हैं। दरअसल नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 रुपए के करोड़ों रुपए के नोट बैंकों के मार्फत इधर से उधर किए गए थे। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बिहार के कई व्यापारियों को सर्विलांस पर ले रखा है। मामला करीब 40 करोड़ को बैंक खातों में डालकर सफेद करने का है।

ताजा कार्रवाई में ईडी ने कोलकाता के एक व्यापारी श्याम सुंदर बजाज की 1.08 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त करने का आदेश जारी कर दिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट के तहत की गई है। आरोप है कि नोटबंदी के दौरान गया में बैंक ऑफ इंडिया की जीबी रोड शाखा से 1.81 करोड़ रुपए अलग-अलग खाताधारियों के एकाउंट में डालकर श्याम सुंदर बजाज के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। बजाज कोलकाता में एम/एस शिवम एजेंसी के प्रोपराइटर हैं। ईडी सूत्रों के अनुसार बजाज के खाते से 1 करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं। इसके अलावा कोलकाता के स्ट्रैंड रोड स्थित उनके कार्यालय व 24 परगना स्थित एक प्लाट को भी जब्त किया गया है।

कई व्यापारी ईडी के सर्विलांस पर, नोटबंदी के दौरान कालेधन को सफेद करने का शक

अभी तक 2.61 करोड़ की संपत्ति हुई जब्त

इसके पहले ईडी ने इसी मामले में एक अन्य व्यवसायी के 1.53 करोड़ रुपए की संपति जब्त की थी। अभी तक 2.61 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। हालांकि पीएमएलए के तहत यह ईडी की शुरूआती कार्रवाई है। ईडी सूत्रों के अनुसार इस नेटवर्क में कई व्यवसायियों के शामिल होने के सुराग मिले हैं, जिसके बाद गया के कई व्यवसायियों को सर्विलांस पर रखा गया है।

चीनी के नाम पर दिया गया था आर्डर

नोटबंदी के दौरान कालेधन को चीनी के आर्डर से भी सफेद करने की कोशिश हो रही थी। गया के बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े इस मामले की जब प्रवर्तन निदेशालय ने पड़ताल शुरू की तो पता चला कि श्यामसुंदर बजाज के खाते में यह पैसे चीनी के आर्डर के नाम पर पर ट्रांसफर किए गए थे। इसके लिए चार अलग-अलग एजेंसियों के बैंक खाते में बिना उनकी जानकारी के 1.81 करोड़ जमा कराए गए। फिर उस रकम को बजाज के खाते में ट्रांसफर किए गए। ईडी ने जब उन चारों एजेंसियों से पूछताछ की तो सभी ने चीनी के आर्डर के नाम पर अपने खाता में पैसा डालने की बात से इनकार कर दिया। उनका यह भी तर्क था कि उनके खाते में पैसे डाले गए इसकी जानकारी भी उनको नहीं थी। ईडी की पड़ताल में बैंक ऑफ इंडिया जीबी रोड शाखा के अफसर और कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। ईडी के अनुसार कालेधन को सफेद करने के लिए व्यापारियों और कुछ बैंककर्मियों ने मिलकर काम किया था। खाताधारियों की जानकारी के बगैर उनके एकाउंट में पैसे बैंककर्मियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।

बैंक में सर्च वारंट लेकर पहुंची थी ईडी की टीम

कालेधन को सफेद करने के मामले में ईडी ने पिछले साल गया में बैंक ऑफ इंडिया की जीबी रोड शाखा में सर्च वारंट के साथ पड़ताल की थी। ईडी सूत्रों के अनुसार बैंक कर्मियों व कालेधन को सफेद करने के मामले में हुए ट्रांजेक्शन से जुड़े और सुराग हासिल करने के लिए यह कार्रवाई की गई थी। यह पहला मौका था जब बिहार में ईडी की टीम ने किसी बैंक की शाखा में पड़ताल के लिए सर्च वारंट के साथ ऑपरेशन किया था। बताया जा रहा है कि ईडी जल्द ही कुछ बैंक कर्मियों पर भी शिकंजा कसेगी।

हाल ही में कानपुर में एक बिल्डर के ठिकाने से करीब 100 करोड़ रुपए मूल्य के 500 और 1000 के पुराने नोट जब्त किए गए हैं। इस मामले में नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी, यूपी पुलिस और आयकर विभाग की टीम कार्रवाई कर रही है। कहा जा रहा है कि इन पैसों को हवाला के जरिए बदले जाने थे।

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