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गाइडलाइन में बार-बार संशोधन व सात निश्चय बन रहा बाधक

राज्य में विधायकों की सिफारिश पर होने वाले विकास कार्यों की गति ठप है। विधायकों ने पूरे साल में जनता के लिए 1530...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:05 AM IST

राज्य में विधायकों की सिफारिश पर होने वाले विकास कार्यों की गति ठप है। विधायकों ने पूरे साल में जनता के लिए 1530 योजनाएं दीं, लेकिन 25 को ही पूरा किया जा सका। कभी गाइडलाइन में बदलाव तो कभी सात निश्चय के प्रावधान, हर बार मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की राह में बाधा खड़ी कर देते हैं। नियम-प्रक्रियाओं की जकड़न से मुक्ति मिलती है तो अफसरों-इंजीनियरों की कमी के साथ बालू का संकट सामने खड़ा हो जाता है।

योजना विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में जितनी सिफारिश विधान पार्षदों और विधायकों ने अब तक की है, उनमें से 393 पर ही काम हो रहा है। ऐसे में जनता की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाने की पीड़ा न सिर्फ राजद और कांग्रेस, बल्कि भाजपा और जदयू के एमएलए और एमएलसी को भी है। काम में सुस्ती का ही परिणाम है कि इस साल जनप्रतिनिधियों ने पिछले पांच साल की तुलना में सबसे कम सिफारिश की। जन प्रतिनिधि इसकी वजह गली-नाली और सड़क की सिफारिश पर लगी रोक को बताते हैं। उन्हें उम्मीद है कि नियमों में बदलाव हो जाने के बाद फिर से गली-नाली का निर्माण जोर पकड़ लेगा।

विधायकों ने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत दीं 1530 योजनाएं, पूरी हुईं 25

31 जिलों में एक भी योजना पूरी नहीं

राजधानी पटना समेत राज्य के 31 जिलों में एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी है। यह बात विभाग के आंकड़ों में दर्ज है। इनमें अररिया, अरवल, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज, खगड़िया, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, दरभंगा, नवादा, नालंदा, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, बेगूसराय, बांका, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मधेपुरा, मधुबनी, रोहतास, लखीसराय, वैशाली, शिवहर, सुपौल, समस्तीपुर, सहरसा और सीतामढ़ी शामिल हैं।

अफसर नहीं देते ध्यान

जनता विधायक से चापाकल, गली, नाली और पीसीसी सड़क बनवाने की उम्मीद करती है, लेकिन सरकार इस योजना की गाइड लाइन में बार-बार बदलाव कर देती है। नतीजा हम समय पर काम नहीं करा पाते हैं। न तो सरकार का नीति निर्धारण तंत्र मजबूत है और न ही सरकार की दिशा सही है। सिफारिशों पर अफसर ध्यान नहीं देते। - शिवचंद्र राम, विधायक, राजद

नियमित मॉनिटरिंग जरूरी

जिलों में पर्याप्त पैसा पड़ा हुआ है, लेकिन अधिकारी विधायकों की सिफारिश वाली योजनाओं पर न तो ध्यान देते हैं और न ही इसकी नियमित मॉनिटरिंग करते हैं। जनता की अपेक्षा सबसे अधिक नाली, गली और सड़क को लेकर रहती है। कुछ समय पहले तक सरकार ने विधायक फंड से इस काम पर रोक लगा रखी थी। नतीजा सिफारिशों की संख्या घट गई। - विजय शंकर दूबे, विधायक, कांग्रेस

क्या कहता है विभाग

योजना विभाग के संयुक्त सचिव सुनील कुमार यादव ने सभी जिला योजना पदाधिकारी और कार्यपालक अभियंता को भेजे पत्र में कहा है कि वेब पोर्टल पर वर्ष 2011-12 से 2017-18 तक के आंकड़े अधूरे हैं। इस माह वेब पोर्टल पर प्रविष्टि की अलग से समीक्षा की जाएगी। आदेश का पालन नहीं करने वाले अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

पार्क के लिए जमीन की समस्या

कोई विधायक अपने इलाके में कितने पार्क और सामुदायिक भवन बनवाएगा। क्या इसके लिए इतनी मात्रा जमीन उपलब्ध है? अगर जमीन मिल भी गई तो एनओसी की प्रक्रिया जटिल है। गली, नाली और पीसीसी सड़क को फिर से विधायक फंड की गाइड लाइन में शामिल कर लिया है। इससे योजनाओं की सिफारिश की संख्या बढ़ेगी। - डॉ. संजीव चौरसिया, विधायक, भाजपा

योजना का हाल

वर्ष योजना पूरी हुई

2012-13 13224 1686

2013-14 13683 2039

2014-15 17159 3070

2015-16 18612 6171

2016-17 8521 1049

2017-18 1530 25

बालू संकट से काम पर असर

स्थानीय स्तर पर इंजीनियर विधायक की सिफारिश वाली योजनाओं के प्रति लापरवाह हैं। हम सिफारिश कर देते हैं, लेकिन दो-दो माह तक काम नहीं होता है। वार्ड चुनाव की वजह से भी काम बंद था। बालू संकट ने भी समस्या को गंभीर बना दिया है। गाइड लाइन में बदलाव योजना में सुधार के लिए किया जाता है। - वशिष्ठ सिंह, विधायक, जदयू

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