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पांच हजार परिवार को गंदा पेयजल पिला रहे, मगर 10 मीटर पाइप नहीं बदल रहे

आलोक द्विवेदी

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:05 AM IST
आलोक द्विवेदी
गर्मी में गला सूख रहा है। सामने पानी है, फिर भी उसे पी नहीं सकते हैं। एक घूंट पानी के लिए राजेंद्र नगर के लोगों को पसीना बहाना पड़ता है। दिन की शुरुआत ही पानी के लिए मशक्कत से शुरू होती है। पानी पीने के लिए दो घंटे पहले इसकी तैयारी करनी पड़ती है। सप्लाई के पानी में गंदगी रहती है। पीने से दो घंटे पहले ही उसे इकट्ठा करके फ्रिज या घड़े में रखना पड़ता है। उसके बाद उसे छानकर पीने लायक बनाया जाता है। डॉक्टर के अनुसार यदि भूल से गंदा पानी शरीर के अंदर चला जाए तो जिंदगी खतरे में पड़ जाएगी। सबसे अधिक समस्या गर्भवती महिलाओं के लिए है। गंदा पानी पीने हेपाटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा है, जो माता और बच्चे दोनों के लिए खतरा है।

बहादुरपुर पुल के नीचे राजेंद्रनगर में 10 मीटर पाइप जोड़ने का काम है अटका

राजेंद्र नगर में 5000 हजार परिवार 10 मीटर पाइप की कमी से गंदा पानी पीने को मजबूर है। बहादुरपुर पुल के नीचे एक साल पहले वाटर सप्लाई का पाइप क्षतिग्रस्त हो गया था। इससे पुल के दोनों तरफ पानी की सप्लाई बंद हो गई। सड़क पर जलजमाव होने लगा था। निगम ने क्षतिग्रस्त पाइप की मरम्मत की, लेकिन उसके बाद भी पाइप ठीक नहीं होने से लोगों के घरों में गंदा पानी जाने लगा। लोगों ने इसकी शिकायत नगर निगम और जल पर्षद के अधिकारियों से की। जल पर्षद ने पुल के दोनों तरफ पानी की सप्लाई के लिए पाइप बिछाया, लेकिन जिस हिस्से में पंप हाउस है उसे पुल के दूसरी तरफ जोड़ा नहीं गया। ऐसे में फिर से पुराने पाइप से पेयजल लोगों के घरों में जा रहा है। इस कारण लोगों को मिलने वाला पेयजल काफी गंदा है। दोनों तरफ के पाइप को लिंकअप करने के लिए मात्र 10 मीटर लंबी पाइप चाहिए, जबकि 10-10 मीटर की दो पाइप एक साल से पुल के नीचे रखा हुआ है।

पाइप भी है और समस्या की गंभीरता का पता भी। मगर, इच्छाशक्ति का अभाव सामने दिख रहा है राजेंद्रनगर में। पेयजल सप्लाई पाइप को ठीक कराने की जगह जलापूर्ति शाखा ने पांच हजार परिवारों को गंदे पानी के भरोसे छोड़ रखा है। बहादुरपुर पुल के नीचे के इलाके की यह हालत करीब एक साल से है।

जोड़ने के लिए प्रयास नहीं किया जा रहा, वरना पाइप तो वैसे ही पड़ा हुआ है

गंदे पानी से ही घर के ज्यादातर कामकाज

हर घर में खाना बनाने, पीने और नहाने-धुलने के लिए लगभग 300 लीटर पानी की खपत होती है। पानी से गंदगी निकालने के लिए कम से कम दो घंटे की जरूरत होती है। अधिक पानी को फिल्टर करने के लिए और समय का आवश्यकता पड़ती है। हर घर में इतने पानी के स्टोरेज की सुविधा नहीं है। ऐसे में राजेंद्र नगर के इस हिस्से में लोगों ने पानी को दो कैटगरी में बांट दिया है। पहली कैटगरी में पानी को फिल्टर कर पीने-खाने में इस्तेमाल करते हैं। दूसरी कैटगरी मे पानी का उपयोग नहाने, कपड़ा धोने के लिए करते हैं। सप्लाई के पानी को देसी तरीके से फिल्टर करते हैं। वे पानी में थोड़ा बालू मिलाकर रख देते हैं या फिर वाटर सप्लाई का पानी बाल्टी में भरने के बाद उसे एक जगह बगैर हिलाए दो से तीन घंटे रखते हैं। ऐसे में गंदगी बाल्टी के तल में जमा हो जाती है, फिर उसको सावधानी से ऊपर से पानी निकाल लिया जाता है। पानी पीने से पहले उसे सूती कपड़े से छानकर गर्म करते हैं या फिर फ्रिज में रख देते हैं।

समस्या को दिखवाकर समाधान करवाता हूं

सप्लाई के लिए पाइप तो बिछाया गया था। यदि पाइप को लिंकअप नहीं किया गया है तो मैं अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश देकर समस्या को दिखवाता हूं और जल्द से जल्द उसे दूर करने की कोशिश करूगा।  अब्दुल हमीद, कार्यपालक पदाधिकारी, जल पर्षद, जलापूर्ति शाखा

पीना ही नहीं नहाना भी खतरे से खाली नहीं

गंदा पानी शरीर के अंदर जाए या फिर ऊपर पड़े, दोनों ही स्थित में खतरा है। पानी का सीधा संबंध पेट से होता है। फिजीशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी के अनुसार गंदा पानी लगातार पीने से जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। पानी से पीलिया, पेचिश, डिसेंट्री, अमीबा जोसीस, पेट में कीड़ा पड़ना, जोक, टाइफाइड, हेपाटाइटिस ए और ई जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। इसके साथ गंदे पानी से लगातार नहाने से खुजली, जलन शरीर पर चकत्ता के साथ ही पूरा शरीर लाल हो सकता है। पीलिया और टाइफाइड समय से पता नहीं चलने पर जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है। गंदा पानी पीने से माता-बच्चे दोनों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।