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प्रयोगवाद को बढ़ावा देने वाले कवि थे प्रो. केसरी

प्रसिद्ध कवि प्रो. केसरी कुमार हिंदी कविता में प्रयोगवादी विचारों को बढ़ावा देने वाले थे। आचार्य नलिन विलोचन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:05 AM IST

प्रयोगवाद को बढ़ावा देने वाले कवि थे प्रो. केसरी
प्रसिद्ध कवि प्रो. केसरी कुमार हिंदी कविता में प्रयोगवादी विचारों को बढ़ावा देने वाले थे। आचार्य नलिन विलोचन शर्मा, केसरी जी और नरेश ने साहित्य में एक तरह के प्रयोगवाद को जन्म दिया। जिसे ‘प्रपद्यवाद’ कहा गया। इसका एक दूसरा नाम इन तीनों के नाम के पहले अक्षर से बना जिसे ‘नकेनवाद’ भी कहते हैं। यह बातें शनिवार को बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में प्रो. केसरी कुमार और मुरलीधर श्रीवास्तव ‘शेखर’ की जयंती पर आयोजित समारोह में कहीं। इसमें सम्मेलन अध्यक्ष डाॅ अनिल सुलभ ने कहा कि साहित्य वह अमर होगा जो समाज की मौलिक जरूरतों पर केंद्रित होगा। इस अवसर पर शेखर जी की समग्र रचनावली ‘मुरली-गीतांजलि’ और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ केशव चंद्र तिवारी की पुस्तक “ग्रामीण संस्कृति की धरोहर” का लोकार्पण भी किया गया। डाॅ. शिववंश पांडेय ने कहा कि डाॅ. तिवारी की पुस्तक भारत की ग्रामीण संस्कृति की धरोहर को समेटती है। वरिष्ठ कवि सत्य नारायण ने कहा कि डाॅ. तिवारी की लोकार्पित पुस्तक हमें अपने जड़ों से जोड़ती है। इस मौके पर सम्मेलन के उपाध्यक्ष डाॅ. शंकर प्रसाद, उपाध्यक्ष पं. शिवदत्त मिश्र, डाॅ. मधु वर्मा, प्रो वासुकी नाथ झा, बच्चा ठाकुर, राजकुमार प्रेमी, डाॅ. अर्चना त्रिपाठी, जय प्रकाश पुजारी, डाॅ. नागेश्वर प्रसाद यादव, डाॅ. शकुंतला मिश्र, डाॅ. विनय कुमार विष्णुपुरी मौजूद थे।

बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में पुस्तक का लोकार्पण करते अतिथि।

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