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ऑटिज्म तो दूर, मंदबुद्धि बच्चों का भी स्कूल दो ही प्रमंडलों में

डीबी स्टार

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:05 AM IST

डीबी स्टार पटना

भारत के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार 110 में से एक बच्चा आटिज्म के शिकार होता है और हर 70 बच्चों में से एक इस बीमारी से प्रभावित होता है। ऑटिज्म पर तो सरकार सोच ही नहीं सकी है। वह अपने टारगेट के अनुसार हर कमिश्नरी में मंद बुद्धि बच्चों का स्कूल भी नहीं चला पाई है। सिर्फ पटना और गया में मंद बुद्धि बच्चों का स्कूल एनजीओ के माध्यम से सरकार चला रही है।

शिक्षकों को समय पर मानदेय भी नहीं

डीबी स्टार ने इसकी पड़ताल की कि ऑटिज्म के शिकार बच्चों के लिए क्या किया जा रहा है। पड़ताल में यह सामने आया कि पटना के रुकनपुरा में मानसिक विकलांग दिवाकालीन विशेष विद्यालय का संचालन उमंग बाल विकास नामक संस्था की ओर से किया जा रहा है। सरकार ने पूर्व डीजीपी नारायण मिश्रा का आवास सीज कर इसमें यह स्कूल खोला था। यह भवन भी अंदर कई जगह जर्जर हो गया है। चार साल से रंगाई भी नहीं हुई है। इसमें 50 बच्चे हैं, जिनमें से छह ऑटिज्म के शिकार हैं। इनमें से तीन ही आते हैं। ऐसा विशेष विद्यालय गया में भी चल रहा है। दरभंगा में चल रहा था लेकिन वह बंद हो गया। सरकार ने यह तय भी किया था कि प्रमंडल स्तर पर ऐसे विद्यालय चलाए जाएंगे। पैनल भी बन गया और प्रेजेंटेशन भी लिया गया। टेंडर के बावजूद जमीन पर काम नहीं दिख रहा। जिन दो स्थानों में यह विद्यालय चल रहा है, वहां के शिक्षकों को हर माह मानदेय नहीं मिलता। मानसिक विकलांग दिवाकालीन विशेष विद्यालय रुकनपुरा के शिक्षकों को नवंबर 2017 का ही मानदेय मिला है। इन शिक्षकों को मानदेय सामाजिक सुरक्षा नि:शक्कतता निदेशालय से सामाजिक कोषांग होकर मिलता है।

बेटे को आटिज्म हुआ तो कुछ करने की ठान ली

अपने स्तर से उत्कर्ष सेवा संस्थान चला रहीं डॉ. मनीषा कृष्णा का 18 साल का बच्चा आटिज्म से ग्रस्त है। बच्चे की उम्र जब तीन साल की थी उसी समय उन्होंने बंगलोर में ट्रेनिंग ली। अमेरिका और इंग्लैंड इलाज के लिए बच्चे को ले गईं लेकिन नतीजा यही निकला कि लंबे समय के लिए रिहेबलिटेशन प्लान करना पड़ेगा। उन्होंने आटिज्म के शिकार बच्चों पर ही काम करने की ठान ली। अब उत्कर्ष सेवा संस्थान में सुबह के समय 40 बच्चों की पढ़ाई होती है। शाम के समय 10 बच्चों की पढ़ाई होती है। शाम में बच्चों के साथ अभिभावकों को भी ट्रेड किया जाता है ताकि घर बच्चों की सही देखभाल हो सके।

मंदबुद्धि बच्चों से अलग होते हैं ऑटिज्म पीड़ित बच्चे

ऑटिज्म, डिसएबिलिटी एंड रिहैबिलिटेशन पर काम कर रहे डॉ. शिवाजी कुमार बताते हैं मंदबुद्धि और ऑटिज्म की समस्या अलग है। ऑटिज्म मस्तिष्क के विकास में बाधा डालने वाला विकार है। ऑटिज्म से ग्रसित व्यक्ति अपनी ही दुनिया में खोया रहता है। ऑटिज्म के दौरान व्यक्ति को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। व्यक्ति मानसिक रूप से विकलांग हो सकता है। रोगी को मिर्गी के दौरे भी पड़ सकते हैं। कई बार ऑटिज्म से ग्रसित व्यक्ति को बोलने और सुनने की समस्या भी आ जाती है। यह बीमारी जब गंभीर रूप लेती है तब ऑटिस्टिक डिसऑर्डर के नाम से जानी जाती है। जब ऑटिज्म के लक्षण कम प्रभावी होते हैं तो इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिस्‍ऑर्डर (एएसडी) के नाम से जाना जाता है। कई शोधों में यह भी बात सामने आई है कि ऑटिज्म महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में अधिक देखने को मिला है। आॅटिज्म के 100 मरीजों में से 80 फीसदी पुरुष इस बीमारी से प्रभावित हैं। इसके लिए अलग स्कूल की व्यवस्था होनी ही चाहिए।

मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए प्रमंडल स्तर पर विद्यालय सभी जगह नहीं खुल पाया है। यह डायरेक्टरेट को करना है। चार अप्रैल को एक बैठक रखी गई है, जिसमें समीक्षा होगी। दिव्यांग जनों के लिए दिव्यांग जन सशक्तीकरण निदेशालय का नोटिफिकेशन भी ऑटिज्म जागरुकता दिवस पर जारी किया जाएगा।  अतुल प्रसाद, प्रधान सचिव, समाज कल्याण विभाग

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