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साहित्यिक त्रैमासिक ‘नया भाषा भारती संवाद’ का लोकार्पण

पटना | बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में भारतीय भाषा साहित्य समागम की साहित्यिक समाचार की त्रैमासिक पत्रिका “नया...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:10 AM IST
पटना | बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में भारतीय भाषा साहित्य समागम की साहित्यिक समाचार की त्रैमासिक पत्रिका “नया भाषा भारती संवाद’ के नए अंक का लोकार्पण रविवार को किया गया। इस मौके पर पत्रिका के संपादक और सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष नृपेंद्रनाथ गुप्त ने कहा कि इस पत्रिका का आरंभ इस संकल्प के साथ हुआ था कि देशभर में हिंदी न केवल सबकी ज़ुबान पर चढ़े बल्कि भारत के राजकाज की भाषा भी बने। जब तक हिंदी देश की राजभाषा का अधिकार नहीं पा लेती यह संघर्ष जारी रहेगा। साहित्यकार जियालाल आर्य ने कहा कि यह पत्रिका पाठकों से सीधा संवाद करती है। यह बिहार में हीं नहीं पूरे देश में लोकप्रिय है। आज की कविताएं अपनी जड़ों से दूर होकर अपरिपक्व कवियों के मानसिक विलास का साधन बन गई है जो साहित्य और समाज के लिए घातक है। यही कारण है कि आज की कविताएं अख़बारों की शोभा तो बन रही है लेकिन पाठकों के दिल में जगह नहीं बना पा रही। ये बातें सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कही। डॉ. शंकर प्रसाद ने कहा कि नया भाषा भारती संवाद 18 सालों से नियमित प्रकाशित हो रही हिंदी की एकमात्र पत्रिका है। सम्मेलन की उपाध्यक्ष डॉ. मधु वर्मा, डॉ.कल्याणी कुसुम सिंह, साहित्य मंत्री डॉ. शिववंश पाण्डेय, डॉ. मेहता नगेंद्र सिंह, कृष्ण कांत शर्मा, बच्चा ठाकुर, ओम् प्रकाश पाण्डेय ‘प्रकाश, डॉ. उपेन्द्र राय, श्रीराम तिवारी, डॉ. पुष्पा जमुआर, डॉ.शालिनी पाण्डेय, डॉ.नागेश्वर प्रसाद यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए।