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बच्चों के सपनों और सृजनशीलता को सजाता है किलकारी

पटना

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:10 AM IST
पटना
किलकारी बिहार बाल भवन एक ऐसी जगह है जहां समाज का हरेक बच्चा, जात-पात, रंग-भेद, अमीरी-गरीबी को भुलाकर एक साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग ले सकता है। यहां ये बच्चे प्रेमभाव से हर गतिविधि में शामिल होते हैं ताकि अपनी क्षमताओं को पहचान सके और अपनी प्रतिभा को निखार सके। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव, अंजनी कुमार सिंह ने ‘किलकारी बिहार बाल भवन’ की स्थापना की। इसका पंजीकरण 30 मई्, 2008 को हुआ। जुलाई 2008 में इसकी निदेशक ज्योति परिहार ने अपना पदभार ग्रहण किया। इसके साथ ही किलकारी की यात्रा प्रारंभ हई जो बच्चों के लिए एक अनोखी दुनिया बनकर आज सामने है। किलकारी 08 से 16 वर्ष तक के बच्चों को सीखने के लिए स्वस्थ, तनाव रहित एवं आनंदमयी वातावरण प्रदान करती है। ‘किलकारी’ बिहार बाल भवन, पटना एवं प्रमंडलों में संचालित बाल भवन तथा बाल केंद्रों में बच्चों को चार सृजनात्मक क्षेत्रों (कला, विज्ञान, खेल एवं व्यक्तित्व विकास) में विभिन्न विधाओं के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इनमें नाटक, सृजनात्मक लेखन, चित्रकला, हस्तकला, कंप्यूटर, संगीत, शास्त्रीय नृत्य, विज्ञान केंद्र, लोक नृत्य, संगीत, तबला, गिटार, फोटोग्राफी, मूर्तिकला, आदि शामिल हैं। किलकारी के बच्चों द्वारा निर्मित सामग्रियों की बिक्री के लिए एक विक्रय केंद्र ‘किलकारी हाट’ खोला गया है। यहां हाल के दिनों में हुई फिल्म फेस्ट भी है। यहां बच्चों में शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास के लिए स्कूल रेडिनेश प्रोग्राम ‘चहक’ की शुरुआत की गई। यहां के बच्चों ने विभिन्न क्षेत्रों में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। 2015 के राष्ट्रीय बालश्री सम्मान के लिए किलकारी से छह बच्चों का चयन किया गया। इसके बच्चों ने कई फिल्मों और टीवी सीरियलों में भी अभिनय किया है। 2016 में समर कैंप में एक ही परिसर में 95 प्रकार की गतिविधियों के सफल संचालन के लिए दूसरी बार ‘लिम्का बुक ऑफ रिकाड‌्‌र्स ’ में इसका नाम दर्ज हुआ था।

शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव, अंजनी कुमार सिंह ने 2008 में ‘किलकारी बिहार बाल भवन’ की स्थापना की

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