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नाटक ने दिखाया छल-कपट का फल हमेशा होता है बुरा

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:10 AM IST

पटना
पटना डीबी स्टार

एक पुरानी कहावत है कि जो दूसरे के लिए गड‌्ढा खोदता है वह स्वयं उसमें गिरता है। छल-कपट करने की सोचने वाले के साथ भी बुरा होता है। इतिहास बताता है कि जब नफरत के सौदागर अपने ही बुने जाल में फंस गए हैं। कुछ ऐसी ही बातें दिखा गया कालिदास रंगालय में मंचित नाटक ‘बुद्धम शरणम गच्छामि’। पुखराज फाउंडेशन की ओर से मंचित इस नाटक के निर्देशक थे उपेंद्र कुमार। इसमें दिखाया गया कि देवदत्त बुद्ध के आश्रम का उत्तराधिकारी बनना चाहता है। उसकी गलत हरकतों से परिचित बुद्ध उसके प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं जिससे वह अपमानित महसूस करने लगता है। वह प्रण करता है कि इसका बदला जरूर लेगा। वह अजातशत्रु से दोस्ती कर उसका सहयोग चाहता है। इसके लिए वह बिम्बिसार की हत्या करवाता है। अजातशत्रु को अपने इस कुकर्म पर पछतावा होता है और वह देवदत्त की हत्या करना चाहता है। अंत में महामात्य के समझाने पर वह बुद्ध की शरण में जाता है और कहता हैं कि बुद्धम शरण गच्छामि।

कलाकार

मंच पर-सुदीप कुमार, अजीत गुज्जर, अभिषेक रंजन, राज पटेल, अनुज कुमार, अभिषेक पांडेय, सोनु कुमार, सौरभ कुमार, उज्जवला गांगुली, अश्वनी सिंह, राजकुमार, प्रवीण कुमार, शैलेंद्र कुमार।

मंच परिकल्पना

प्रदीप गांगुली

सहायक निर्देशक

स्नेहा रानी, प्रकाश

परिकल्पना और निर्देशन

उपेंद्र कुमार

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Web Title: नाटक ने दिखाया छल-कपट का फल हमेशा होता है बुरा
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