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मियाद गुजरे साल पूरा, आधे से अधिक स्कूलों ने सीबीएसई को नहीं सौंपा प्रमाण

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:10 AM IST

आलोक द्विवेदी
आलोक द्विवेदी पटना

बिहार में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त आधे से अधिक स्कूलों ने बोर्ड को भवन सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं दिया है। सेफ्टी सर्टिफिकेट देने के लिए सीबीएसई की ओर से स्कूलों को लगभग डेढ़ साल पहले निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय-सीमा समाप्त हुए भी एक साल हो चुका है। इसके बावजूद प्रदेश के सैकड़ों स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या किया है, इसके बारे में बोर्ड को नहीं बताया है। अब सीबीएसई स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

प्रदेश में 830 स्कूलों की सीबीएसई से मान्यता, इनपर भी नियंत्रण नहीं

प्रदेश में 830 स्कूलों को सीबीएसई ने मान्यता दी है। इसमें हाईस्कूल के साथ ही प्लस टू स्कूल भी शामिल हैं। मान्यता लेने के लिए स्कूल सीबीएसई को भवन, सुरक्षा, पेयजल, वाशरूम, लाइब्रेरी, क्लास, शिक्षक, पुस्तकालय, कंप्यूटर, खेल परिसर के बारे में जानकारी देता है। इसके साथ ही स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं, यह भी बताना होता है। आगजनी या भूकंप के दौरान स्कूल किस तरह बच्चों की सुरक्षा करेगा, इसकी भी जानकारी देनी है। स्कूल में बच्चे 7 से 8 घंटे बिताते हैं। ऐसे में सीबीएसई मान्यता देने से पहले इन्हीं जानकारी का निरीक्षण करता है।

ट्रांसपोर्ट की स्थिति कैसी है, इस बारे में जानकारी नहीं देना चाहते स्कूल

भवन सेफ्टी के साथ ही स्कूलों को ट्रांसपोर्ट के बारे में भी सीबीएसई को जानकारी देनी थी। अक्सर स्कूलों में बगैर लाइसेंस के ही ड्राइवर वाहन चलाते हैं। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कुछ स्कूल परिवहन विभाग की परेशानी से बचने के लिए प्राइवेट ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था करते हैं। ट्रांसपोर्ट एक विशेष स्कूल से बंधे रहते हैं, लेकिन इसकी जबावदेही स्कूल प्रशासन को नहीं होती है। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो स्कूल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच जाता है। सीबीएसई की ओर से दिए गए निर्देश में बच्चों के ट्रांसपोर्ट के लिए क्या व्यवस्था की गई है, इसकी जानकारी भी देना अनिवार्य है। ये वाहन प्राइवेट हैं तो उसके बारे में भी सीबीएसई को जानकारी देनी होगी।

स्कूलों की मनमानी पर सवाल उठते रहे हैं। स्कूल सीबीएसई की भी नहीं सुन रहे हैं। सीबीएसई से मान्यता प्राप्त आधे से ज्यादा स्कूलों ने बोर्ड को भवन सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं सौंपा है। ट्रांसपोर्ट की स्थिति कैसी है, इसे भी कई स्कूल छिपाने में लगे हुए हैं। इसे वेबसाइट पर भी नहीं डाला गया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए ही ये सारे निर्देश दिए गए थे। निर्देश का पालन नहीं होने से बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा है। प्रावधान के तहत सीबीएससी को गंभीरता दिखानी चाहिए, हालांकि ऐसा दिख नहीं रहा।

सख्ती नहीं होने के कारण कमियों को लगातार छिपाने में लगे रहते हैं ज्यादातर स्कूल

सेफ्टी सर्टिफिकेट को स्कूल की वेबसाइट पर किया जाना है अपलोड

सीबीएसई ने भवन सेफ्टी सर्टिफिकेट देने के साथ ही स्कूलों को निर्देश दिया था कि जो प्रमाण पत्र बोर्ड को सौंपे, उसकी प्रति को स्कूल की वेबसाइट पर लोड करना अनिवार्य है। इसमें स्कूल के बारे में जानकारी लिखित देनी है। बिहार में सीबीएसई की ओर से मान्यता प्राप्त कई स्कूलों की वेबसाइट ही नहीं है। ऐसे में वे जानकारी लिखित रूप से स्कूल के बोर्ड पर ही चिपका देते हैं।

स्कूलों के भवन में खिड़कियां काफी कम होती हैं। एक खिड़की बनवाने में अमूमन 8 से 10 हजार रुपए का खर्चा होता है। 30 फीट लंबे और 20 फीट चौड़े कमरे में कम से कम आठ खिड़कियां होनी चाहिए। स्कूल पैसे बचाने के लिए चार से छह खिड़कियां रखते हैं।

स्कूलों में फायर मशीन नहीं रखते हैं, मशीन है भी तो वे एक्सपायर हो चुकी रहती हैं। बहुमंजिले बड़े स्कूलों में आग पर काबू पाने के लिए हर क्लास के साथ ही बिल्डिंग के दूसरे हिस्से में पानी बौछार करने वाला सिस्टम होना चाहिए। अमूमन प्रदेश के अधिकतर स्कूलों में ऐसी व्यवस्था नहीं है।

हादसे के दौरान जिम्मेदारी से बचने के लिए अधिकतर स्कूल ट्रांसपोर्ट के लिए प्राइवेट वाहनों का सहारा लेते हैं। बच्चों की ओर से दिए जाने वाली फी में स्कूल का भी हिस्सा रहता है। स्कूल को प्राइवेट बस के बारे में कोई जानकारी नहीं रहती है। वे न तो बस ड्राइवर के बारे में जानते हैं और न ही उन्हें ड्राइवर के सहायक के बारे में कुछ पता होता है। ऐसे में प्राइवेट बस चालक अनट्रेंड ड्राइवर के सहारे वाहन चलवाते हैं।

सितंबर 2016 में दिया गया था निर्देश

सीबीएसई ने सितंबर 2016 में बिहार के स्कूलों को भवन और ट्रांसपोर्ट के संबंध में सेफ्टी सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया था। इसके लिए स्कूलों को 31 जनवरी 2017 सर्टिफिकेट जमा करने की अंतिम तिथि भी दी थी। एक साल खत्म हो चुके हैं। इसके बाद भी स्कूलों ने सीबीएसई को सर्टिफिकेट नहीं दिए। सीबीएसई अब स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई का मन बना रहा है। स्कूल मान्यता प्राप्त करने के लिए सीबीएसई को जो सर्टिफिकेट देता है, उसके आधार पर वास्तविक जानकारी की जांच की जाएगी।

स्कूल में ये होती हैंकमियां

अनहोनी की स्थिति में स्कूलों में लिफ्ट और सीढ़ियों के साथ ही दूसरी व्यवस्था भी होनी चाहिए। स्कूल परिसर के मुख्य गेट के साथ ही ऐसा गेट भी होना चाहिए, जहां से किसी हंगामे या आपदा के दौरान बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इस तरह की व्यवस्था प्रदेश के ज्यादातर स्कूल में नहीं है।

स्कूल की बसों पर बच्चों के घर से स्कूल और स्कूल से घर पहुंचाने के दौरान एक शिक्षक का होना अनिवार्य है। स्कूल से घर पहुंचने के दौरान अंतिम बच्चे तक शिक्षक को बस में रहना चाहिए, लेकिन प्रदेश में शिक्षक ,बच्चों के पहुंचाने के दौरान बीच में ही उतर जाती है।

बिहार के अधिकतर स्कूल घनी आबादी के बीच बने हुए हंै। संकरी गलियों में बहुमंजिला स्कूल का भवन है। इसकी वजह से अनहोनी की स्थिति में हताहत की अधिक संख्या होती है। बिहार में कई स्कूलों ने बस और उनके सहायक को स्कूल का कोई कार्ड भी नहीं दिया है। इससे उनकी कोई पहचान नहीं हो पाती है।

निर्देश को देख आगे की कार्रवाई की जाएगी

इस संबंध में जानकारी नहीं है। यदि सीबीएसई की तरफ से ऐसे निर्देश जारी किए गए हैं तो उसे दिखवाती हूं। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।  रमा शर्मा, वरीय जनसंपर्क अधिकारी, सीबीएसई

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