Hindi News »Bihar »Patna» प्रकृति का संगीत सुनना है तो घूम आएं ककोलत

प्रकृति का संगीत सुनना है तो घूम आएं ककोलत

प्रकृति की गोद में बसा ककोलत अपनी मनोरम सुंदरता के लिए जाना जाता है। गर्मियों की शुरुआत होते ही यहां पर्यटकों की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 02:10 AM IST

प्रकृति का संगीत सुनना है तो घूम आएं ककोलत
प्रकृति की गोद में बसा ककोलत अपनी मनोरम सुंदरता के लिए जाना जाता है। गर्मियों की शुरुआत होते ही यहां पर्यटकों की आमद बढ़ जाती है। ककोलत का जलप्रपात सदियों से प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यहां आकर लोग प्रकृति के संगीत को करीब से सुन पाते हैं। पहाड़ से गिरते पानी को निहारना रोमांचक एहसास देता है।

पटना से करीब 140 किलोमीटर और नवादा से 35 किलोमीटर दूर ककोलत सड़क से आसानी से जाया जा सकता है। निजी गाड़ियों के अतिरिक्त बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से चलाई जाने वाली बसों से भी आप यहां सुबह जाकर शाम तक लौट सकते हैं। ककोलत न सिर्फ पर्यटन के लिहाज से एक खूबसूरत जगह है बल्कि इसका पुरातात्विक और पौराणिक महत्व भी है। हर वर्ष यहां 14 अप्रैल को पांच दिनों तक चलने वाला सतुआनी मेला लगता है। इसमें पर्यटकों के साथ ही आस-पास के इलाके के लोग बड़ी संख्या में जुटते हैं। ककोलत का धार्मिक महत्व भी है। मान्यता है कि इसके जलप्रपात में स्नान करने से सांपयोनी में जन्म लेने से मनुष्य मुक्त हो जाता है। राजा नृप किसी ऋषि के श्राप के कारण अजगर बनकर इसी जलप्रपात में निवास करते थे। तब ऋषि मार्कण्डेय ने उन्हें सांप योनी से मुक्ति दिलाई। महाभारत में जिस कायंक वन का वर्णन है वह वर्तमान का ककोलत ही है। कहते हैं कि अज्ञातवाश के दौरान पांडवों ने अपना कुछ समय यहां बिताया था। कभी इस इलाके में कोल जाति के लोग निवास करते थे जिनके नाम पर इसका नाम ककोलत हुआ।

प्रकृति का मनाेरम रूप दिखता है यहां, 14 अप्रैल से लगने वाले सतुआनी मेला में जुटती है भीड़

गर्मी आते ही पर्यटकों से हो जाता है गुलजार

Weekend Trip

160 फीट की ऊंचाई से गिरता है पानी

ककोलत का जलप्रपात ठंडे पानी का है जहां 160 फीट की उंचाई से पानी गिरता है। चारो तरफ जंगलों से घिरा होने के कारण प्रकृति का सौंदर्य देखते बनता है। हरियाली से भरपूर जगह पर ठंडे पानी की कल-कल ध्वनि अांखों को सुकून पहुंचाती है। यही कारण है कि गर्मियों के दिनों में दूर-दूर से सैलानी यहां आते हैं। इसके ऐतिहासिक महत्व और मनोरम सुंदरता को देखते हुए डाक विभाग ने इसपर पांच रुपये का डाक टिकट भी जारी कर चुका है।

अंग्रेजों का पसंदीदा रहा है ककोलत

ककोलत पर अंग्रेजों की नजर 1811 में पड़ी। तब फ्रांसिस बुकानन ने इसे देखकर बाकी लोगों से इसका परिचय करवाया। तब यहां का तलाब काफी गहरा था इसकी गहराई भरने के लिए अंग्रेजों ने एक अजीब सा आदेश दे दिया। आदेश था कि इसमें स्नान करने वालों को स्नान करने से पहले तालाब में एक पत्थर फेंकना होगा। आजादी से पहले घने जंगल और खराब रास्ते के बावजूद प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर ककोलत जलप्रपात बिहार में रह रहे अंग्रेजों की पसंदीदा जगह थी।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Patna News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: प्रकृति का संगीत सुनना है तो घूम आएं ककोलत
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Patna

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×