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मशीन बनते आदमी की कहानी थी मेड इन इल्वा

प्रेमचंद रंगशाला सिटी रिपोर्टर| पटना यह दुनिया हजारों साल में जितनी नहीं बदली थी उतनी पिछले दो साै साल में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 02:10 AM IST

मशीन बनते आदमी की कहानी थी मेड इन इल्वा
प्रेमचंद रंगशाला

सिटी रिपोर्टर| पटना

यह दुनिया हजारों साल में जितनी नहीं बदली थी उतनी पिछले दो साै साल में बदली है। औद्योगिक क्रांति ने इंसान के जीवन को बदल कर रख दिया। हम अाज भी जिस आधुनिकता की दौर में लगातार भागते जा रहे हैं वह हमें धीरे-धीरे इंसान से मशीन बनाती जा रही है। यह मशीन घंटो बिना थके अमानवीय स्थिति में लगातार काम करती जाती है। थकावट का एहसास तब होता है जब हम बीमार हो जाते हैं या फुर्सत के दो पल नसीब होते हैं।

इंसान के मशीनीकरण की इसी कहानी को दिखा गया शनिवार की शाम प्रेमचंद रंगशाला में मंचित नाटक ‘मेड इन इल्वा’। यहां चल रहे थियेटर ओलंपिक्स 2018 के पहले दिन इटली से आई टीम ने इस नाटक को पेश किया। फिजिकल थियेटर की ओर से मंचित इस नाटक की निर्देशक थी एना डोरा डोर्नाे। नाटक में इल्वा स्टील प्लांट में काम करने वाले मजदूरों की आपबीती को दिखाया गया। नाटक में कविता और साउंड का बेहतरीन इस्तेमाल कर इसे प्रभावी ढ़ंग से मंच पर पेश किया गया। नाटक में दिखाया गया कि स्टील उद्योग के कारण यूरोप के विभिन्न हिस्सों में वातावरण और मानव जनसंख्या पर बुरा प्रभाव पड़ा है। नाटक में कलाकारों की आंगिक गतिविधियों, जुनूनी लयात्मकता, मौलिक संगीत का शानदार संयोजन देखने को मिला।

प्रेमचंद्र रंगशाला में इटली के कलाकारों की ओर से प्रस्तुत नाटक मेड इन इलवा को देखने पहुंचे शहर के नाट्‌य प्रेमी।

सहयोग मिले तो पटना में भी खुल

सकता है एनएसडी

आठवां थियेटर ओलंपिक्स 2018 की मेजबानी इस वर्ष भारत कर रहा है। देश में यह दिल्ली समेत 17 राज्यों में चल रहा है। इसी कड़ी में शनिवार से पटना में 14 दिवसीय आयोजन शुरू हुआ। प्रेमचंद रंगशाला में इसके तहत 14 नाटकों का मंचन और 21 नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति होगी। इसकी जानकारी शनिवार को थियेटर ओलंपिक्स के उदघाटन समारोह में कही गई। संयोजक संजय उपाध्याय ने कहा कि पटना में रंगमंच का बेहतर माहौल है। ऐसे में राज्य सरकार सहयोग दे तो यहां भी एनएसडी की शाखा संभव है। पटना रंगमंच हिन्दी रंगमंच का प्रतिनिधत्व कर सकता है। उदघाटन समारोह में कला संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में कला संस्कृति के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हंै। मौके पर साहित्यकार पद्मश्री उषा किरण खान, एनएसडी के रजिस्ट्रार प्रदीप कुमार मोहंती ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान रिटायर्ड आईएएस अधिकारी व्यास जी, वरिष्ठ कवि अरूण कमल समेत बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे।

ये थे कलाकार

निकोला पिआनज़ोला

एना डोरा डोर्नाे

रिकार्डो नैनी

निकोलेटा कसाली

आज का नाटक

नाटककाराच्या शोधत साहा पात्र

निर्देशक : विजय कुलकर्णी

नाट्य संस्था : आराधना विश्वस्त मंडल, शोलापुर

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Web Title: मशीन बनते आदमी की कहानी थी मेड इन इल्वा
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