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टॉप बनना तो दूर नेशनल रैंकिंग से भी बाहर रहा पटना विवि

पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां आए। उनसे उम्मीद थी कि पीयू को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:10 AM IST

टॉप बनना तो दूर नेशनल रैंकिंग से भी बाहर रहा पटना विवि
पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां आए। उनसे उम्मीद थी कि पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मांग को पीएम के समक्ष खुले मंच से रखा भी। लेकिन पीएम ने पीयू को केंद्रीय विवि नहीं बनाया। बल्कि देश के उन टॉप 10 विश्वविद्यालयों की चयन प्रक्रिया में शामिल होने का निमंत्रण दे दिया, जिन्हें वर्ल्ड क्लास विवि बनाने के लिए केंद्र सरकार अतिरिक्त सहायता देगी। यह योजना अभी शुरू तो नहीं हुई, लेकिन इसमें भाग लेने की शर्तों पर खरा उतरने की तैयारी करने का आश्वासन तब कुलपति प्रो. रासबिहारी प्रसाद सिंह ने दिया था। हालांकि छह महीने बाद हालात ऐसे हैं कि पटना विवि देशभर के टॉप विश्वविद्यालयों में तो शामिल नहीं हो पाया है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर हुई रैंकिंग प्रतियोगिता में भी पीयू प्रशासन ने आवेदन नहीं किया।

तीन वर्षों से जारी है रैंकिंग

केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग ने तीन साल पहले राष्ट्रीय स्तर के संस्थान, विश्वविद्यालय और कॉलेजों की रैंकिंग प्रक्रिया शुरू की थी। हर साल होने वाली इस रैंकिंग में देशभर के अलग अलग कैटेगरी के टॉप 100 संस्थानों की सूची जारी की जाती है, जिसके लिए आवेदन पहले ही किया जाता है। लेकिन इन तीनों वर्षों में पटना विवि ने कभी आवेदन नहीं किया है। इस बार नहीं आवेदन करने के पीछे पीयू प्रशासन का तर्क है कि अबतक नैक के लिए आवेदन नहीं किया गया है, इसलिए नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में भाग लेने का फायदा नहीं होगा। कुलपति प्रो. रासबिहारी सिंह कहते हैं कि अगली बार की रैंकिंग प्रक्रिया में हम भाग भी लेंगे और उसमें बेहतर रैंक भी प्राप्त करेंगे।

3 संस्थानों से उम्मीद

एनआईआरएफ में बिहार से सिर्फ आईआईटी, एनआईटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) से उम्मीदें हैं। पहले साल की रैंकिंग में बिहार से सिर्फ ये तीन ही जगह बना पाए थे। लेकिन पिछले साल की रैंकिंग तीनों की स्थिति खराब थी। आईआईटी पटना अपने पहले के रैंक से पिछड़ गया था जबकि एनआईटी पटना और सीयूएसबी दोनों टॉप 100 संस्थानों और विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर हो गए थे।

2016 की रैंकिंग

चार अप्रैल 2016 को जारी हुई पहली रैंकिंग में बिहार से सिर्फ तीन संस्थान शामिल हुए थे। इसमें आईआईटी पटना की पोजीशन सबसे बेहतर रही जो देश भर के टॉप 100 इंजीनियरिंग कॉलेजों की सूची में 10वें स्थान पर रहा। वहीं एनआईटी पटना इसी सूची में 87वें स्थान पर रहा था। इसके अलावा टॉप 100 विश्वविद्यालयों की सूची में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार 94वें स्थान पर रहा था।

2017 की रैंकिंग

2016 की रैंकिंग में इंजीनियरिंग संस्थानों की सूची में आईआईटी पटना को 10वां स्थान मिला था। लेकिन 3 अप्रैल 2017 को जारी रैंकिंग में यह 19वें स्थान पर रहा। ओवरऑल रैंकिंग में आईआईटी पटना देश के टॉप 100 संस्थानों की सूची में 83वें स्थान पर आया है। एक साल पहले टॉप 100 में जगह बनानेवाले एनआईटी पटना व सीयूएसबी 2017 में सूची से बाहर हो गए थे।

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