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Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:15 AM IST
हम चाहते हैं कि इस पृष्ठ पर धर्म के जानकारों की सहभागिता बढ़े। जो लिखना चाहते हैं, वे आलेख आदि भेज सकते हैं। अपनी तस्वीर भेजें और पता लिखें। पता: संपादक, दैनिक भास्कर, 23बी, श्रीकृष्णापुरी पश्चिमी बोरिंग कैनाल रोड, पटना-1, टेलीफोन :०६१२-३९२२००० ई-मेल :featuredesk.patna@dbcorp.in

आनंद पाने के लिए नहीं, बल्कि आनंदित होकर हर काम करें आनंदित होने का दिखावा नहीं करें, जीवन बोझ बन जाएगा

सद्गुरु कहते हैं जीवन में हम दो तरीकों से काम करते हैं-हम या तो अपने आनंद को व्यक्त करते हैं या फिर आनंद पाने के लिए कोई काम करते हैं। दूसरा तरीका मुश्किलें पैदा कर देता है। अक्सर लोग उल्लास या आनंद का मतलब समझते हैं-संगीत सुनना, नाचना और झूमना। आनंद के लिए ये सब बिल्कुल जरूरी नहीं है। आप चुपचाप एक जगह शांति से बैठकर भी पूरी तरह से आनंद और उल्लास को अपने भीतर महसूस कर सकते हैं। कई बार आपका जीवन उल्लासपूर्ण नहीं होता, बल्कि आप कुछ गतिविधियों की मदद से इसे उल्लासपूर्ण बनाने की कोशिश कर रहे होते हैं। असलियत तो यह है कि जब पौधे अपने भीतर ऊर्जा या उल्लास को संभाल नहीं पाते तो वह फूलों के रूप में उसे व्यक्त कर देते हैं। जीवन भी इसी तरह होना चाहिए। दोनों स्थितियों में फर्क है। एक में आप नृत्य करके आनंद पाते हैं, जबकि दूसरी में आप आनंद से भरे होते हैं और उसे संभाल न पाने के कारण आप नाचने लगते हैं।

लोग समझते हैं आनंद का अर्थ है-संगीत सुनना, नाचना, जबकि ये बिल्कुल जरूरी नहीं, आप शांति से बैठकर भी पूरा आनंद महसूस कर सकते हैं

कुछ लोग वाकई खुश होने पर खुश दिखते हैं। दुखी होते हैं तो दुखी दिखते हैं। वहीं बनावटी हंसी में ऊर्जा खर्च होती है। इससे शरीर के अंदर कई रोग पैदा होते हैं। ट्यूमर बन सकता है। आप किधर जाना चाहते हैं, तय कर लें। जहां भी जाना है, उस दिशा में लगातार बढ़िए। कुछ ही घंटों में मैं आप ही के द्वारा आपके शरीर में ट्यूमर पैदा करवा सकता हूं। मैं मजाक नहीं कर रहा। अगर आप अपने मन को खास दिशा में ढाल लेते हैं, तो आप यह कर सकते हैं। सौभाग्य से आप कोई काम लगातार नहीं करते, जिससे आप बच जाते हैं। आप कभी खुश होते हैं, कभी दुखी। कोई भाव लगातार नहीं रहता। अगर आप लगातार दुखी रहते हैं तो आप उसके नतीजे देख सकते हैं। अगर आप लगातार खुश रहते हैं तो उसके नतीजे भी देख सकते हैं। आप हमेशा गुस्से में हैं, तो उसका भी खास नतीजा होगा। आपको किसी चीज के पूरे नतीजे इसलिए नहीं मिलते, क्योंकि आपकी भावनाओं की तीव्रता घटती-बढ़ती रहती है।

बनावटी ख़ुशी जताने में बहुत ऊर्जा खर्च होती है, इससे शरीर होता है रोगी

प्रेम या गुस्सा, जो भी करें, 24 घंटे करें

लोग सवाल करते हैं कि हमें कैसी भावनाएं रखनी चाहिए। मेरा जवाब है हर भाव, हर रवैया अच्छा है। आप गुस्सा करना चाहते हैं तो 24 घंटे लगातार गुस्सा करें। आपको खुद आत्मानुभूति हो जाएगी। मैं मजाक नहीं कर रहा। आपको प्रेम पसंद है, तो 24 घंटे प्रेम करें। आपको अनुभूति हो जाएगी। आप जो भी कर रहे हैं, उसे लगातार 24 घंटे करें। आपको खास अनुभूति होगी। चीजें ऐसे ही घटित होती हैं।

दिशा तय कर लें, फिर लगातार उस दिशा में चलते रहें

सृष्टि का कण-कण आपके लिए अस्तित्व से परे जाने का द्वार बन सकते हैं। अगर आप लगातार एक दिशा में चलें, एक भाव में रहें। लेकिन लोग लगातार दिशा और दशा बदलते रहते हैं। यह आज के दौर की इतनी बड़ी समस्या है, जितनी पहले नहीं थी। लोग ऐसा कहने में अपनी तारीफ समझते हैं कि मेरी एकाग्रता की अवधि छोटी है। आप फोकस लगातार बदलते रहेंगे तो कुछ होने वाला नहीं। आप जिस तरफ भी जाना चाहते हैं, आप तय कर लें। लेकिन जहां भी जाना है, उस दिशा में लगातार बढ़िए। (प्रस्तुति: ईशा फाउंडेशन, कोयंबटूर)

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