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इंजीनियर संजीव ने 12 हजार परिवारों के जीवन में लाई खुशहाली

नालंदा की मंजू व माया देवी की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। अब मशरूम का प्रशिक्षण लेकर उत्पादन कर रही हैं, तो आय भी होने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:15 AM IST

इंजीनियर संजीव ने 12 हजार परिवारों के जीवन में लाई खुशहाली
नालंदा की मंजू व माया देवी की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। अब मशरूम का प्रशिक्षण लेकर उत्पादन कर रही हैं, तो आय भी होने लगी है और परिवार को पोषक तत्व भी मिल रहा है। झारखंड खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड की आदिवासी महिला मगदली और रूपा का परिवार संकट में था। पिछले साल मशरूम का उत्पादन शुरू किया। मंजू, माया, मगदली और रूपा जैसे 12 हजार महिलाओं और पुरुषों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर नालंदा के संजीव कुमार ने उनकी जिंदगी बदल दी। ये परिवार आज प्रतिमाह 5 से 20 हजार रुपए तक कमा रहे हैं।

संजीव कुमार ने बीआईटी सिंदरी से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद कुछ दिन नौकरी की। फिर कुछ अलग करने और बिहार-झारखंड के लोगों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया। 2002 से मशरूम का उत्पादन शुरू किया। नालंदा के तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी सुदामा महतो ने इन्हें सरकारी योजना से जोड़ा और प्रोत्साहन दिया। हिमाचल के सालन में मशरूम बीज तैयार करने का प्रशिक्षण लिया और बीज उत्पादन का छोटा लैब लगाया। आज लैब बड़ा हो गया है, जिससे प्रतिदिन 70 से 90 किलो बीज तैयार होता है। संजीव बताते हैं कि प्रशिक्षण देते समय लोगों को मशरूम खाने और बेचने के फायदे बताते हैं। संजीव खुद सालाना 10 से 12 लाख रुपए मशरूम और बीज उत्पादन से कमा रहे हैं। 2008 में संजीव को मशरूम उत्पादन के लिए किसान श्री का एक लाख रुपए पुरस्कार मिला था।

बिहार के साथ झारखंड की महिलाओं को ट्रेनिंग देकर उनकी आर्थिक स्थिति में ला रहे सुधार, मशरूम बीज से खुद भी कमा रहे सालाना 10-12 लाख रुपए

100 वर्गफीट में 3500 रुपए तक की आय

एक किलो मशरूम उत्पादन में 20 से 25 रुपए खर्च आता है। वहीं प्रति किलो 80 से 100 रुपए कीमत मिल जाती है। 100 वर्गफीट जगह में मशरूम उत्पादन कर प्रतिमाह 3000 से 3500 रुपए कमाया जा सकता है। एक किलो भूसी या पुआल से 800 ग्राम से एक किलो मशरूम उत्पादन होता है। मशरूम उत्पादन में भूसी और पुआल का उपयोग कर पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। आज देशभर में 60 करोड़ टन पुआल और भूसी जलाया जाता है। इससे पर्यावरण के साथ मिट्टी की उर्वरता भी खत्म हो रही है। अमेरिका, फ्रांस आदि देशोंं में प्रति व्यक्ति मशरूम की खपत सालाना 4 किलो है, जबकि भारत में 40 ग्राम।

क्या है मशरूम

यह एक प्रकार का फफूंद है। डेढ़ लाख फफूंद में 15 हजार मशरूम होते हैं। इनमें 200 प्रजातियां खाने योग्य होती हैं। वैज्ञानिक तकनीक से इसमें 80 तरह के मशरूम का उत्पादन हो रहा है। 150 प्रकार का मशरूम जहरीला होता है, लेकिन वैज्ञानिक तकनीक से उत्पादित मशरूम फायदेमंद है। बिहार में आयस्टर, दुधिया और बटन मशरूम का अधिक उत्पादन होता है। आयस्टर और दुधिया मशरूम का उत्पादन सालभर होता है, जबकि बटन मशरूम दिसंबर से फरवरी तक ही लिया जा सकता है। मशरूम में कई खनिज तत्व और प्रोटीन होते हैं। इसका उपयोग दवा के रूप में भी होता है।

कैसे होता है उत्पादन

भूसा भर कर तैयार किए गए प्लास्टिक के बैग में मशरूम के बीज डाल कर हर दो-तीन दिनों पर 200 से 300 ग्राम मशरूम उगा सकते हैं। घर में ही बैग लटका कर रखा जा सकता है। इसमें धूप की जरूरत नहीं होती है। एक बैंग लगाने में लागत 40 से 45 रुपए आता है। 100 बैग लगाने पर कोई भी परिवार 10 से 12 हजार रुपए महीना कमा सकता है। मशरूम उत्पादन और मशरूम बीज उत्पादन लैब लगाने के लिए सरकार 50 प्रतिशत अनुदान देती है।

तीन प्रकार के मशरूम का हो रहा उत्पादन

ओयस्टर मशरूम

20 से 30 डिग्री तापमान पर उगाया जाता है मशरूम।

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बटन मशरूम

इसका उत्पादन 15 से 20 डिग्री तापमान पर होता है। यानी नवंबर से फरवरी तक इसका उत्पादन लिया जा सकता है।

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आयस्टर से भी महंगा है बटन

आयस्टर मशरूम 100 से 110 रुपए किलो मिलता है। बटन मशरूम 150 से 170 रुपए किलो मिलता है। मशरूम बीज की कीमत अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग है। जमुई में 80 से 90 रुपए प्रति किलो बीज मिलता है। वहीं पटना और अन्य इलाकों में करीब 150 रुपए प्रति किलो मिलता है।

गरमा या दुधिया मशरूम

30 से 35 डिग्री तापमान पर उत्पादन होता है। गर्मी के दिनों में इसका उत्पादन होता है।

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बहुत ही लाभकारी है मशरूम

कुपोषण दूर करने में सहायक

प्रचुर मात्रा में होता है प्रोटीन

डायबिटीज और गेस्ट्रिक के रोगियों के लिए लाभदायक

कैंसर से बचाव की क्षमता

कोलेस्ट्रोल नहीं रहता है

इसमें विटामिन डी और बी कॉम्प्लेक्स की प्रचुर मात्रा होती है

हड्डियों को मजबूत करने में सहायता

मशरूम से हृदय रोग से बचाव

मशरूम उत्पाद

सब्जी, आचार, खीर, सूखा पाउडर, मशरूम की मीठी चटनी, दवा, सूप आदि।

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