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मंटो के तोहफा ने दिखाई प्यार पर जिंदगी कुर्बान करने की कहानी

जागृति कला मंच की 28 वीं वर्षगांठ पर मसौढ़ी के गांधी मैदान में आयोजित नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को नाट्य...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:15 AM IST

मंटो के तोहफा ने दिखाई प्यार पर जिंदगी कुर्बान करने की कहानी
जागृति कला मंच की 28 वीं वर्षगांठ पर मसौढ़ी के गांधी मैदान में आयोजित नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को नाट्य संस्था हमनावा की ओर से ड्रामा ‘तोहफा’ का मंचन किया गया। ड्रामा में इंसान के दोहरे चरित्र को दिखाया गया है। दर्द को दिल में समेटे लोग, पैसे का गुरूर, लापरवाही और आवारगी से जिंदगी बर्बाद करने वाले लोगों की कहानी है ‘तोहफा’। कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से हर चरित्र को जीवंत कर दिया। मुख्य पात्रा शीला के दर्द से जहां दर्शक द्रवित हो रहे थे, वहीं पर राय साहब के जुल्मों के प्रति आक्रोशित और दूसरे पात्र जुगल की आवारगी पर लोगों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। ड्रामा में इंसानी रिश्तों की कशमकश और खुद को सही साबित करने की जद्दोजहद दिखाई गई।

नाट्य संस्था हमनावा के लिए सआदत हसन मंटो के ड्रामा ‘तोहफा’ का निर्देशन शबाना आफरीन ने किया। मुख्य पात्रा शीला (शबाना आफरीन) है जो जुगल (बबलू मिश्रा) से प्यार करती है। जुगल की लापरवाही, आवारगी से दोनों की शादी नहीं हो पाती है। शीला के परिवार वाले उसकी शादी शहर के रईस राय बहादुर लाला गणेश प्रसाद (अरविंद कुमार) से कर देते हैं। इनको अपने पैसा का घमंड रहता है। कहावत है कि इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते। ऐसा ही शीला और जुगल की प्रेम कहानी का भी हुआ। एक दिन राय साहब को भी इस प्रेम का चल गया। प|ी की प्रेम कहानी और पैसे के घमंड में गुस्साए राय साहब ने जुगल को सरे महफिल बेइज्जत करने का निर्णय लिया। राय साहब ने सालगिरह की पार्टी आयोजित की और उसमें जुगल को भी बुलाया। राय साहब महफिल में जुगल को खुद बेइज्जत कर रहे थे। अचानक जुगल ने कुछ ऐसा कर दिया कि खुद ही राय साहब की इज्जत चली गई। जुगल, शीला को अपनी जिंदगी का सबसे कीमती तोहफा बता कर दो आंसू की बूंदें उसे देकर जिंदगी को हमेशा के लिए अलविदा कर दिया। दर्शक भी जुगल की अचानक मौत से स्तब्ध हो गए। नाटक में शबाना आफरीन, बबलू मिश्रा, अरविंद के अतरिक्त अवधेश, गौतमी, हिमांशु पांडेय, अविनाश डोबरियाल. संजय सागर, निरंजन, कुणाल पांडे, मृत्युंजय, खुशी, पूजा, रामू, लाइट रविभूषण बबलू, कास्टयूम डिजाइन उदय सागर, मंच का डेकोरेशन संजय सागर ने किया था।

नाटक में सबकुछ ऐसे चल रहा था कि दर्शक भी किरदार जुगल की अचानक मौत से स्तब्ध हो गए।

लोकनृत्य के हर स्टेप पर बजती रहीं तालियां

पटना| नाटक और लोक नृत्य मसौढ़ी नाट्य महोत्सव का विशेष आकर्षण था। मसौढ़ी के साथ पटना के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों का मन मोह लिया। महोत्सव के अंतिम दिन रंग समूह के कलाकारों ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया। इसमें लगभग एक दर्जन कलाकारों ने हिस्सा लिया। मंच पर नृत्य के दौरान वहां पर उपस्थित दर्शक गीत के आगे की लाइन बोल रहे थे। नृत्य के हर स्टेप पर लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। कुमार उदय सिंह के निर्देशन में कलाकारों ने मंच पर बिहार के प्रसिद्ध लोक नृत्य कजरी, जट-जटिन, झिझिया, चैता और लोक गाथाओं पर आधारित डांस प्रस्तुत किया। नृत्य में सोनाली सरकार, कुमारी तान्या, दिव्या रानी, राधा सिन्हा, निशा कुमारी, अमित राज ज्योति, विकास, रविकांत शामिल थे।

रंगकर्मी रूबी खातून को मिला अनवर वारसी सम्मान

पटना|
जागृति कला मंच की 28 वीं वर्षगांठ पर मसौढ़ी के गांधी मैदान में आयोजित नाट्य महोत्सव के अंतिम दिन रंगकर्मी रूबी खातून को अनवर वारसी स्मृति सम्मान दिया गया। तीन सदस्यीय चयन समिति ने रूबी खातून को चयनित कर उन्हें सम्मानित किया। चयन समिति में स्थानीय विधायक रेखा देवी, साहित्यकार सिद्धेश्वर नाथ पांडेय और प्रखंड प्रमुख रमाकांत रंजन किशोर शामिल थे।

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