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दरकी दीवार, खुले वाटर टैंक, लटके तार के खतरों के बीच हॉस्टल में रह रहे डॉक्टर

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:20 AM IST

एकता कुमारी
एकता कुमारी पटना

नालंदा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स हॉस्टल में छात्र मौत के साए में रहने को मजबूर हैं। कॉलेज का हॉस्टल जर्जर हो चुका है। दीवारों में दरार पड़ गई है। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। अक्सर छत से प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। यह कई बार छात्रों को घायल भी कर चुका है। वाटर टैंक पर ढक्कन तक नहीं तो सफाई की जरूरत कौन समझे।

खुली टंकी के गंदे पानी से नहाने-धोने की है मजबूरी

नालंदा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स हॉस्टल में मेडिकल छात्र एक्वागार्ड रहते गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। सारे एक्वागार्ड खराब हुए पड़े हैं। हॉस्टल के हर फ्लोर पर बेसिन तो है, लेकिन कहीं न तो कहीं पाइप बगैर। तीन टंकी है, लेकिन एक की भी सफाई नहीं होती है। दो टंकी पर ढक्कन नहीं है। पानी में कई तरह की गंदगी जाती है। टंकी के चारों तरफ काई की मोटी परत दिखती है। बोतलबंद पानी जो नहीं मंगा पाते या नहीं मंगाते हैं, उन्हें बीमारी का शिकार होना पड़ता है। टंकी के गंदे पानी से ही कपड़ा धोने और नहाने के कारण स्किन प्रॉब्लम की शिकायत सुनने को मिलती रहती है।

छात्र खुद करते हैं कमरे की सफाई बिजली बैकअप दूर की बात

हॉस्टल में पावर बैकअप नहीं है। यहां सफाईकर्मी नहीं हैं। वॉशरूम तक की सफाई नहीं कराई जाती है। छात्र खुद ही कमरे की सफाई करते है। वॉशरूम के लिए बाहर से बुलाते हैं। हॉस्टल की सारी गंदगी पीछे में फेंक दी जाती है। इसी कूड़े-कचरे के कारण शाम होते ही कमरों में चारों तरफ से मच्छर भर जाते हैं। हॉस्टल से निकला पानी कैंपस में ही जमा हो जाता है। सड़ा हुआ पानी दूर-दूर तक दुर्गंध फैलाता है। हॉस्टल में छात्रों को बिजली कट जाने के बाद इन्वर्टर या जेनरेटर की सुविधा नहीं दी गई है। मोमबत्ती जला कर जरूरी पढ़ाई करना मजबूरी है। हर फ्लोर पर बिजली का पैनल बोर्ड खुला-टूटा है। कमरों में तो बिजली के लिए बोर्ड हैं ही नहीं। बाहर पैनल से लटके तार के आसपास बाइक खड़ी करने को मजबूर छात्र कमरे में ऐसे ही खुले तारों के बीच बचते हुए उठते-बैठते-चलते हैं। हर वक्त हादसे का खतरा रहता है। बल्ब और पंखे की व्यवस्था छात्रों ने खुद कर रखी है। इस हालत पर बात छेड़ते ही छात्र कहते हैं कि अधीक्षक तक बात पहुंचाने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है।

एमबीबीएस इंटर्नशिप कर रहे करीब 200 मेडिकल छात्र इस हॉस्टल में रहते हैं। यह प्रतिष्ठित नालंदा मेडिकल कॉलेज का डॉक्टर्स हॉस्टल है। लेकिन, कहीं से भी यह इस प्रतिष्ठा का एहसास नहीं कराता है। मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में हर तरफ की हकीकत डराती है। घुसते ही बिजली के खुले-झूलते तार के पास बाइक खड़ी दिखती है। किचन तक कामचलाऊ नहीं है। उसपर, खास बात यह भी कि अस्पताल प्रशासन इस हालत की जानकारी तक से इनकार कर रहा है।

हकीकत ऐसी, मगर अस्पताल प्रशासन को जानकारी नहीं

बरामदा, वॉशरूम से लेकर कमरे तक की स्थिति जर्जर

एनएमसीएच डॉक्टर हॉस्टल की स्थिति पूरी तरह से जर्जर है। क्षतिग्रस्त भवन में ही छात्रों को रखा जा रहा है। बाहर से लेकर अंदर तक कमरों की स्थिति खराब है। बरामदा, वॉशरूम से लेकर कमरे तक हर जगह प्लास्टर टूट कर गिरने के निशान हैं। कमरों में दीवार के बीच दरार के बाद भी मजबूरी में रहना पड़ रहा है। दीवारों में दरार के कारण बरसात में पानी टपकता है। इससे कमरे में रखा सामान बर्बाद हो जाता है। किताबें भी खराब हो जाती हैं।

एक तरफ गंदगी दूसरी तरफ बनता है खाना

हॉस्टल के मेस में साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं है। एक तरफ छात्र खाना खाकर गंदगी फैलाए रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ दूसरे छात्र बैठ कर खाना खा रहे होते हैं। किचन में सिंक और डस्टबिन की सुविधा नहीं दी गई है। इससे छात्र नल पर ही बचे हुए खाने को फेंक देते हैं। यहां कुक की सुविधा नहीं दी गई है। छात्र खुद से ही कुक को बुलवाकर खाना बनवाते हैं। इसी कारण किचन की साफ-सफाई नहीं होती है।

ऐसी वायरिंग से हादसे का खतरा

हर संभव सुविधा दे दे रहे, भवन के लिए भी पत्र लिखा गया है

हॉस्टल की समस्या के संबंध में संबंधित अधिकारी से बात की है। हमलोगों की तरफ से जो सुविधा दी जा सकती है, वह दी जा रही है। जर्जर भवन के लिए अधिकारी को पत्र लिखा गया है। जल्द ही सारी समस्याओं को दूर किया जाएगा।  डॉ. शिव कुमारी प्रसाद, प्राचार्य, एनएमसीएच

पता लगाकर समाधान कराएंगे

हॉस्टल में होने वाली समस्या के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में संबंधित अधिकारी के माध्यम से पता लगाया जाएगा। कोशिश रहेगी कि जल्द से जल्द हॉस्टल की सभी समस्याओं को दूर किया जाए।  डॉ. गोपाल कृष्ण, उपाधीक्षक, नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल

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