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डेढ़ रुपए का फ्लेवर मिलाया और 30 का चावल बन गया 100 रुपए किलो वाला ग्रेड का बासमती और कतरनी

3 वर्ष पहले
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पाउडर बनाने वाली कंपनी के मालिक बोले-हम तो नुस्खे बेचते हैं, आप जो चावल चाहो बना लो

ऐसे बनती है नकली बासमती

भागलपुर|जिले मेंनकली बासमती चावल और चूड़ा बनाने का गोरखधंधा चल रहा है। जगदीशपुर रजौन ब्लॉक के मिलों में 30 रुपए किलो बिकने वाले सामान्य चावल में महज डेढ़ रुपए का पाउडर मिलाकर उसे 100 रु. किलो बेचा जा रहा है। प. बंगाल, दिल्ली, पटना और रांची के व्यापारी यहां से चावल लेकर मप्र, छग, गुजरात समेत पूरे देश में सप्लाई कर रहे हैं। बिहार में इसे कतरनी बासमती के नाम से बेचा जा रहा है। ईस्ट बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स के अनुसार जिले से हर माह 3000 क्विंटल बासमती 5000 क्विंटल कतरनी चावल एक्सपोर्ट हो रहा है, जबकि बासमती धान की उपज यहां होती ही नहीं और कतरनी का रकबा बेहद कम है। हर साल 70 करोड़ की काली कमाई इस कारोबार से जुड़े लोग कर रहे हैं।

(जगन इंडस्ट्रीज, दिल्ली के मालिक ईश्वर शर्मा ने फोन पर बात की)













{क्यासभीचावल से बासमती और कतरनी बना सकते हैं? खर्च कितना आता है?

>चावलकी ग्रेडिंग होती है। बस साइज मिलना चाहिए, फिर आप जो चाहो बना लो। 1500 रुपए कीमत के एक किलो पाउडर से 1000 किलो सुगंधित चावल तैयार हो जाता है।

{सुगंधितचावल तैयार करने में कौन सा पाउडर काम आएगा?

>हमतो 400 से 500 तरह की खुशबू वाले पाउडर बनाते हैं। आपको जो पाउडर चाहिए, ले लो।

{पाउडरका इस्तेमाल किसी और अनाज में भी कर सकते हैं?

>हमतो सिर्फ फ्लेवर देते हैं, नुस्खा बेचते हैं। आप मिल लगाने वाले कंसल्टेंट से मिल लें। वो अनाज की पैकिंग कर इसके ब्रांड का नाम भी तय कर देंगे। मैं को-ऑर्डिनेट कर दूंगा। ये देशभर में फैले हैं।

पाउडर मिठाई, फास्ट फूड, सॉस, चॉकलेट में भी ये मिलाया जाता है।

ऐसे समझें मुनाफे के इस खेल को

डंकल,सौरभ सीता और सीता सार धान की कीमत 26-30 रुपए किलो तक है। इसमें खुशबूदार पाउडर मिलाकर मिल मालिक इसे बासमती बना रहे हैं। इस तरीके से बनने वाला नकली बासमती बाजार में 70-100 रुपए प्रति किलो की दर से खपाया जा रहा है। इसी तरह 30 रुपए प्रति किलो की दर से उपलबध सोभान और सोनम धान को कतरनी में तब्दील कर 70-100 रुपए किलो बेचा जा रहा है।

चावल में सुगंधित पाउडर मिलाता मजदूर (ऊपर) और नकली बासमती चावल बनाने के लिए लंबे बीज वाले डंकल धान को केमिकल मिले गुनगुने पानी में धोता मिल का कर्मचारी।

(जैसा रजौन के मदहा के मिल मालिक ललन ने बताया)

{बासमती के लंबे दाने के लिए लंबे दाने वाले सामान्य चावल वाले धान जैसे सीता सार, सौरभ सीता और डंकल की किस्में ली जाती हैं। अगर कतरनी चावल बनाना है तो उससे मिलता-जुलता छोटे दाने वाला सोभान और सोनम धान लिया जाता है। ये सभी चावल 26 से 30 रुपए प्रति किलो बाजार में बिकते हैं।

{धान को पानी की टंकियों में गुनगुने पानी में भिगोया जाता है।

{इन्हीं टंकियों में सुगंधित पाउडर को मिला दिया जाता है।

{गीले धान को निकाल बॉयलर में डाला जाता है।

{इससे तैयार चावल पूरी तरह बासमती जैसी खुशबू देता है।

गौतम वेदपाणि/तुलसी यादव

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