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मैकेनिक ने बनाया ऑटोमेटिक रेल फाटक, ट्रेन आने से पहले ही बंद होगा गेट

नेशनल एनोवेशन फाउंडेशन के बिहार प्रदेश के खोजकर्ता मुकेश सिंह ने बताया कि अवधेश कुमार के इस नये प्रयोग में नवीनता है।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 04:20 AM IST
अवधेश ने ट्रेन आने से पहले फाटक बंद कर दिखाया। अवधेश ने ट्रेन आने से पहले फाटक बंद कर दिखाया।

नवादा. तीन साल पहले 16 दिसंबर 2014 को यहां के सफीगंज की रेलवे क्रासिंग के पास ट्रेन एक्सीडेंट हुआ था। इस घटना में छह बारातियों की मौत हो गई थी। छह अन्य लोग घायल हो गए थे। उस क्रासिंग के पास कोई फाटक नहीं थी। यहां के रहने वाले अवधेश कुमार उर्फ जुम्मन मिस्त्री घटना के बाद से परेशान थे। वह इसका हल ढूंढने के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे। बुधवार को अवधेश ने इस कोशिश को एक प्रयोग के तौर पर जमीन पर उतार दिया। अवधेश ने एक आॅटोमेटिक मानव रहित रेलवे सुरक्षा फाटक का निर्माण किया है।

60 हजार रुपए की आई लागत

इसका सिंचाई भवन के कैंपस में ट्रायल दिखाया। इसकी खासियत है कि रेलवे क्रासिंग के पास रेल आने से पहले रेलवे फाटक अपने से बंद हो जाता है और रेलवे जाने के बाद रेलवे फाटक खुल जाता है। यही नहीं, लाल और ग्रीन का सिग्नल भी लाइट के जरिए दिखता है। इसमें करीब 60 हजार रुपए की लागत आई है। इसमें साइकिल का फ्राॅक, चैन, फलाइविल, लोहे का एंगल, एल्युमुनियम की लंबी पट्टी, सायरन, लाइट, बैटरी, 12 वोल्ट का मोटर उपयोग किया गया है।


नए-नए प्रयोग करते रहे हैं अवधेश

नवादा के रामनगर में गैराज चलाने वाले अवधेश अक्सर अपने नए प्रयोग से लोगों को चकित किए हैं। इसके पहले आॅटो जल सुरक्षा कवच बनाया है। पांच सौ की लागत की इस सुरक्षा कवच से टंकी में पानी भरते ही मोटर आॅटोमेटिक बंद हो जाता है। यही नहीं, खेत पटानेवाले इंजन से आॅटो बनाया था। इसके पहले डीजल इंजन का प्रयोग कर बुलेट मोटरसाइकिल भी बना चुका है।


कैसे करता है काम

रेलवे क्रासिंग के पास चार पाेल लगाया गया है। दो पाॅल 50 फीट की दूरी और दो पोल 150 फीट की दूरी पर गाड़ा गया। चारो पोल पर एक एक स्पार्क स्विच है, जो पाॅल के बीचोंबीच लटका हुआ है। रेलगाड़ी आती है तब इंजन के ऊपर लगे इंगल से डेढ़ सौ फीट वाली पाेल में लटके स्पार्क स्विच से स्पर्श करता है। उसके बाद रेल फाटक गाड़ी पहुंचने के पहले बंद हो जाता है। फिर फाटक से गुजरने के बाद 50 फीट के पाॅल में लटके स्पार्क स्विच से इंजन का इंगल स्पर्श करता है।

खोजकर्ता ने कहा-नया प्रयोग

नेशनल एनोवेशन फाउंडेशन के बिहार प्रदेश के खोजकर्ता मुकेश सिंह ने बताया कि अवधेश कुमार के इस नये प्रयोग में नवीनता है। काफी कम खर्च में बड़ा काम किया जा सकता है। इस रिपोर्ट को आर्गेनाइजेशन को भेजा जाएगा। प्रयोग अभूतपूर्व रहने पर ऐसे लोगों को दस हजार से लेकर साढ़े सात लाख रुपए तक पुरस्कार दिया जाता है।

गैराज मिस्त्री अवधेश। गैराज मिस्त्री अवधेश।