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जापानी बटेर के बिजनेस ने दिलाई कामयाबी, कमाते हैं एक से डेढ़ लाख रुपए सलाना

ग्रेजुएशन कर चुके सुजीत को नौकरी या फिर रोजगार की तलाश थी। परिवार तंगहाली झेल रहा था। कई तरह के काम किए, लेकिन किसी में नुकसान हो गया।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 10, 2016, 11:38 PM IST

  • सरैया (मुजफ्फरपुर).अनइंप्लाइमेंट से परेशान दो भाइयों ने पेशे के तौर पर जापानी बटेर पालन के पेशे को चुना। इससे दोनों साल के करीब एक से डेढ़ लाख रुपए कमाते हैं। अब न वे सिर्फ खुशहाल हैं बल्कि उनसे सीखने के लिए आसपास के लोग भी उनके पास आते हैं।
    तामिलनाडु में मिली जापानी बटेर की जानकारी
    सरैया प्रखंड के अंबारा तेज सिंह पंचायत अंतर्गत श्रीकृष्णपुर निवासी सुजीत तिवारी व रंजीत तिवारी ने जापानी बटेर का पालन कर अपने लिए रोजगार ढूंढ़ लिया है। ग्रेजुएशन कर चुके सुजीत को नौकरी या फिर रोजगार की तलाश थी। परिवार तंगहाली झेल रहा था। कई तरह के काम किए, लेकिन किसी में नुकसान हो गया। इसी दौरान उनका छोटा भाई रंजीत रोजगार की तलाश में तमिलनाडु चले गए। वहां उन्हें बटेर पालन की जानकारी मिली। रंजीत ने तुरंत इसकी और जानकारी ली और 2013 में घर आ गए। फिर दोनों भाइयों ने जापानी बटेर का पालन शुरू कर दिया। शुरुआत में कुछ कम, लेकिन धीरे-धीरे आय बढ़ी तो इसे कुटीर उद्योग के रूप में बढ़ाने लगे।
    एक से डेढ़ लाख होती है एनुअल इनकम
    रंजीत ने बताया कि अभी चार कट्ठा जमीन में शेड लगाकर 5 हजार जापानी बटेर रखे हुए हैं। इससे वार्षिक अाय एक-डेढ़ लाख तक हो रही है। इनके अाम्रपाली ब्रिडिंग फाॅर्म में लोग जानकारी के लिए भी आने लगे हैं। सुजीत का कहना है कि यह रोजगार का नया और बिल्कुल आसान जरिया है। इसे छोटे से छोटे व बड़े स्तर पर भी किया जा सकता है।
    सालभर हो सकता है बटेर पालन
    उन्होंने बताया कि बटेर के लिए 12 महीने मौसम ठीक रहता है। रंजीत ने बताया कि हैदराबाद के इंडेवर रिसर्च एंड ब्रिडिंग फाॅर्म के बटेर विशेषज्ञ डाॅ. कोटेया से परामर्श लेकर इसे आगे बढ़ाया। इसके पालन के संबंध में वे बताते हैं कि चंडीगढ़ से अंडा मंगाकर पटना के हेचरी प्लांट में चूजा तैयार होता है। वहां से चूजा लाकर अपने फॉर्म में साइंटिफिक तरीके से इसे पाला जाता है। फूड के रूप में मुर्गी दाना ही देते हैं। फॉर्म के बीट से तैयार खाद का उपयोग खेत में करने पर पैदावार भी अच्छी होती है।
    120 रुपये जोड़ा, ऑर्डर भी
    हेचरी में 35 से 40 दिनों में बटेर खाने लायक हो जाता है। एक अंडा पांच रुपए में बिकता है। बटेर तीन-चार सौ ग्राम का हो जाता है तो 120 रुपए जोड़ा बिकता है। प्रति बटेर 15 से 20 रुपए बचत होती है। एक मादा बटेर साल में 250 तक अंडे देती है। दोनों भाइयों ने कहा कि शुरुआत में परेशानी हुई, लेकिन अब बड़े-बड़े होटलों से ऑर्डर आता है। कई शहरों के विक्रेता एडवांस ऑर्डर बुक करा जाते हैं। सर्वाधिक मांग नवंबर से मार्च तक होती है।
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