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बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, अचानक तबीयत खराब होने से हुई थी मौत

इस एरिया में बेटियां, पौत्री व नतिनी के द्वारा अर्थी के कंधा देने की यह पहली घटना है।

Dainik Bhaskar

Nov 30, 2017, 07:13 AM IST
पिता के अर्थी को कंधा देती बेटियां। पिता के अर्थी को कंधा देती बेटियां।

इमामगंज (गया). मानवता, सामाजिकता व पिता के प्रति बेटियों की समर्पण की अनोखी कहानी माओवादियों के गढ़ के रूप में चर्चित इमामगंज क्षेत्र के बभंडीह गांव में लिखी गई। रिटायर्ड शिक्षक रामबालक प्रसाद बचपन से अपने ही गांव में रहे। यहां से पढ़ाई लिखाई किए। पूरी जिंदगी विश्रामपुर मिडिल स्कूल में बच्चों के पढ़ाते रहे। सेवानिवृत के दो माह पहले गांव के मिडिल स्कूल में तबादला करा लिए।

बुधवार की सुबह हृदयगति रूकने से उनकी मौत हो गई। उनकी बड़ी कुमारी विद्यावती सिन्हा, रेणू सिन्हा, नतिनी रीनम सहित पौत्री ने अर्थी को कंधा देकर मोरहर नदी किनारे अंतिम विदाई दी। पिता की मुखाग्नि बड़े पुत्र अरविंद कुमार ने दिया। क्षेत्र में बेटियां, पौत्री व नतिनी के द्वारा अर्थी के कंधा देने की यह पहली घटना है। घटना ने समाज के मिथक तो तोड़ा ही, साथ ही नया उदाहरण भी पेश किया।


मंगलवार को अपने साथियों के साथ दिखे थे, अचानक बिगड़ी तबीयत


रालोसपा नेता संतोष कुमार के पिता सेवानिवृत शिक्षक रामबालक प्रसाद गांव में ही रहते थे। बीते दिन इमामगंज बाजार में अखबार पढ़े थे व अपने साथियों के साथ चाय पी थी। उनके पुत्र संतोष कुमार ने बताया कि बीती रात में हल्का सीने में दर्द हुआ था लेकिन कुछ देर में ठीक हो गया था।

बेटियों द्वारा पिता को कंधा देना क्षेत्र की पहली घटना


इमामगंज क्षेत्र की यह पहली घटना है, जब बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा दिया हो। देखकर लोग अचंभित थे। बेटियां, पौत्री व नतिनियों ने शिक्षक की अंतिम यात्रा को भी यादगार बना दिया। अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले बुद्धिजीवियों ने कहा कि बेटियों का यह काम समाज को नई दिशा देनेवाला है। सर के बेटियों ने मिसाल कायम की है। मोरहर नदी किनारे अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके अंतिम संस्कार में सभी राजनीतिक पार्टी के नेता, समाजसेवक, शिक्षक आदि सैकड़ो लोग मौजूद थे। सभी ने नम आंखों से विदाई दी।

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पिता के अर्थी को कंधा देती बेटियां।पिता के अर्थी को कंधा देती बेटियां।
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