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बिहार पहुंचे पूर्व उपराष्ट्रपति, कहा- यहां की मिट्टी अजीब, बागी भी हुए और प्रेमी भी

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि बिहार की मिट्टी अजीब है। यहां बागी भी हुए और प्रेमी भी होते हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 05, 2017, 07:04 AM IST

  • बिहार पहुंचे पूर्व उपराष्ट्रपति, कहा- यहां की मिट्टी अजीब, बागी भी हुए और प्रेमी भी
    पटना.पूर्व विदेश सचिव मुचकुंद दूबे ने कहा कि देश में बनावटी राष्ट्रवाद की हवा बह रही है। यह एक ऐसा दौर है, जिसमें तमाम तर्क-वितर्क बेमानी साबित हो जाते हैं। दावा किया जाता है कि हमने चीन को पछाड़ दिया है, लेकिन वस्तुस्थिति एकदम अलग है। वह शनिवार को बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स में पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित सैयद शहाबुद्दीन मेमोरियल लेक्चर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। पूरे कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार श्रोता बनकर बैठे रहे। हालांकि पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने उन्हें मंच पर आने का न्योता दिया था। पर वे नीचे ही बैठे रहे।

    दूबे ने कहा कि अगर किसी राजनीतिक दल को देश की सत्ता संभालनी है तो उसे शिक्षा और स्वास्थ्य का एजेंडा सबसे ऊपर रखना होगा। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में शिक्षा हमारा मुख्य एजेंडा था, लेकिन आजाद में भारत में इसे दरकिनार कर दिया गया। हमारा संविधान जीवन का अधिकार देता है। इसके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन और जीविका मुख्य तत्व हैं। विश्व के सभी विकसित देशों में समान शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था है। इसका नियंत्रण निजी क्षेत्र की बजाय सरकार के हाथों में होना चाहिए। भारत में इस पर ध्यान नहीं देने की वजह से ही आजादी के सत्तर साल बाद भी सामाजिक और आर्थिक बदहाली कायम है। चीन से मुकाबला करना है तो मानव विकास सूचकांक में अपना स्थान दुरुस्त करना होगा। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री परवीन अमानुल्लाह, पूर्व नौकरशाह अफजल अमानुल्लाह, इकबाल अहमद और पूर्व एमएलए मुन्ना शाही आदि मौजूद थे।
    हामिद अंसारी : बिहार की मिट्टी अजीब, यहां बागी भी हुए और प्रेमी भी
    पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि बिहार की मिट्टी अजीब है। यहां बागी भी हुए और प्रेमी भी होते हैं। यह भी संयोग है कि बागी कई बार प्रेमी बन गए और प्रेमी ही बागी हो गए। वह शनिवार को बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के सभागार में आयोजित सैयद शहाबुद्दीन मेमोरियल लेक्चर की अध्यक्षता कर रहे थे। व्याख्यान का विषय था, भारत के विकास में किसकी कितनी साझेदारी। उन्होंने कहा कि भारत विविधता में एकता वाला देश है। इस देश की अखंडता के लिए समावेशी विकास जरूरी है। यह ना सिर्फ विकास को स्थायित्व देता है, बल्कि राष्ट्र को छिन्न-भिन्न होने से बचाता है। इस देश के संविधान में 22 भाषाओं को जगह मिली है। तीन-चार अन्य भाषाओं को संविधान में शामिल करने पर लंबे समय से चर्चा चल रही है। इसके अलावा सौ से अधिक दूसरी भाषाएं भी हैं जिनको अलग-अलग हिस्सों में बोला जाता है। अंसारी ने कहा कि स्व. सैय्यद शहाबुद्दीन के जीवन, उनसे जुड़ी बातों, उनकी विचारधारा और व्यक्तित्व के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन जितने ईमानदार थे, उतने ही मुंहफट भी थे। बात अगर सच है तो उसे बोलने में कोई परहेज नहीं करते थे।
    भीड़ ने घेर लिया : सुरक्षा में चूक, पीएसओ की देर तक होती रही तलाश
    बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स में शनिवार की शाम पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की सुरक्षा में चूक दिखी। कार्यक्रम खत्म होने के बाद मंच पर ही उन्हें भीड़ ने घेर लिया। कोई उनके साथ फोटो खिंचवाना चाहता था तो सवाल पूछ रहा था। आसपास कोई सुरक्षाकर्मी नहीं था। चैंबर के पदाधिकारियों और कार्यक्रम के आयोजकों ने उन्हें अपनी सुरक्षा में लेकर सभागार के बाहर एक कमरे में पहुंचाया। इसके बाद भीड़ से उनका पीछा छूटा। इसी क्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति के सहायक अनिल कौशिक और आयोजकों ने पीएसओ की खोजबीन शुरू की। वहां पुलिस वाले मौजूद थे, लेकिन उनका कहना था कि कार्यक्रम स्थल पर उनकी प्रतिनियुक्ति की गई है। तब कई पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधा गया। थोड़ी देर बाद गांधी मैदान थानाध्यक्ष भी पहुंचे। थानेदार ने तलाश की, तो पीएसओ दौड़ते-भागते उनके सामने पहुंचा। पूर्व उपराष्ट्रपति के सहायक अधिकारी ने पीएसओ के देर से आने पर नाराजगी जताई। पीएसओ का कहना था कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात अधिकारियों ने हथियार होने के कारण सभागार के अंदर नहीं जाने दिया था। इसलिए कैंपस में मौजूद था।
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