Hindi News »Bihar »Patna» Government Controversial Statement Chanan River Dam

पहले 366 करोड़ से बनाया बांध, अब कह रहे- गलती से बना, अब तो इसे तोड़ना है

यह सरकारी धन का दुरुपयोग ही नहीं भागलपुर के दामन पर एक और घोटाले का दाग है।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 07, 2017, 05:15 AM IST

  • पहले 366 करोड़ से बनाया बांध, अब कह रहे- गलती से बना, अब तो इसे तोड़ना है
    चानन तटबंध।
    भागलपुर.यह सरकारी धन का दुरुपयोग ही नहीं भागलपुर के दामन पर एक और घोटाले का दाग है। सिंचाई विभाग भागलपुर प्रमंडल ने चानन नदी की बाढ़ से दर्जनों गांव को बचाने के लिए पहले 366 करोड़ 67 लाख रुपए खर्च कर तटबंध बना दिया। इसके लिए किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया। हजारों पेड़ काटे। खड़ी फसल को उजाड़ दिया। किसानों से स्वेच्छा से जमीन देने के लिए शपथ पत्र भी भरवा लिया।
    तटबंध बनाने वाले ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया गया, मगर जब किसानों ने जमीन का मुआवजा मांगा तब सिंचाई विभाग, बाढ़ नियंत्रण व भूअर्जन विभाग ने हाथ खड़े कर दिए। किसानों को दो टूक शब्दों में बता दिया गया कि चानन पर तटबंध गलती से बन गया है। इसे तोड़कर पूर्व की स्थिति में लाया जाएगा। इसलिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता है।
    चंदन नदी के दोनों तट पर कुल 106.27 किमी की लंबाई में तटबंध बनाने के लिए वर्ष 2012 में टेंडर फाइनल हुआ। इसके लिए भूअर्जन विभाग के माध्यम से किसानों की जमीन भी अधिगृहीत कर ली गई। किसानों का मुआवजा नहीं दिया, ठेकेदार को कर दिया भुगतान सिंचाई विभाग ने चंदन नदी पर बने तटबंध के लिए संबंधित ठेकेदार को तो आनन-फानन में भुगतान कर दिया गया, मगर किसानों का मुआवजा लटका दिया। किसान कभी सिंचाई विभाग तो कभी भू-अर्जन विभाग के कार्यालय का चक्कर लगाते रहे, मगर उन्हें सिर्फ आजकल का रटा रटाया जवाब दिया जाता था।
    विभाग द्वारा बनाए गए तटबंध को हटाने की पूरी तैयारी गुपचुप तरीके से अंदर ही अंदर की जा रही थी। किसानों का मुआवजा भी लटका दिया गया। इसी बीच गोराडीह थाना क्षेत्र के फाजिलपुर गांव निवासी राजेश कुमार ने सूचना के अधिकार के तहत चन्द नदी प्रबंधन योजना से संबंधित जानकारी मांगी। राजेश कुमार ने विभाग से पूछा था कि क्या तटबंध पर किए गए कार्य का भुगतान संबंधित ठेकेदार को कर दिया गया। जिन किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई थी क्या उन्हें मुआवजा दिया गया। राजेश कुमार के आवेदन के जवाब में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल भागलपुर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जिन किसानों की जमीन ली गई है उनमें किसी को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। तटबंध का काम वर्ष 2012 में शुरू हुआ था। अब काम को रोक दिया गया है और तीन फरवरी 2017 को ही चंदन नदी के दोनों तरफ के तटबंध को हटाने के लिए विभाग को कहा जा चुका है।
    सिंचाई विभाग ने बनवाया, अब बाढ़ नियंत्रण विभाग तोड़ेगा

    तटबंध का निर्माण कार्य सिंचाई विभाग ने 2012 में शुरू किया था। जैसे-जैसे काम होता रहा तटबंध की लागत भी बढ़ती गई। पूर्व में निर्धारित लागत से लगभग 70 प्रतिशत काम हुआ था, जिसका भुगतान भी संबंधित ठेकेदार को कर दिया गया। इसके बाद जून 2016 में जब चानन बाढ़ प्रबंधन योजना का काम बाढ़ नियंत्रण विभाग को हस्तगत हो गया तब उसने रिवाइज्ड एस्टीमेट तैयार किया। रिवाइज्ड एस्टीमेट अभी स्वीकृत होता उसके पहले ही विभाग को एहसास हुआ कि यह बांध तो गलती से बन रहा है। इसके बाद से ही तटबंध का काम रोक दिया गया।

    तटबंध पहले जरूरत, अब खतरा
    बाढ़ नियंत्रण विभाग भागलपुर अंचल के कार्यपालक अभियंता ने 26 अप्रैल 2017 को विभाग के अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजकर अवगत कराया कि गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग, जल संसाधन मंत्रालय भारत सरकार और सिंचाई भवन पटना ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि चानन तटबंध योजना जानमाल की सुरक्षा प्रदान करने के बजाय पहले से भी ज्यादा क्षति पहुंचाने वाली हो गई है। अत: चानन नदी पर बनाए गए तटबंध को हटाकर पूर्व की स्थिति में लाया जाए।
    पब्लिक का पैसा पानी में, अब इन सवालों का जवाब कौन देगा
    - जब चानन नदी पर बना तटबंध जानमाल के लिए खतरा था तब किन अभियंताओं ने उसे बनाने की जरूरत बताई थी। कैसे 366.67 करोड़ की लागत से तटबंध बनाया दिया। निर्माण में जो धन खर्च हुआ क्या उसकी वसूली संबंधित अभियंताओं से की जाएगी। तटबंध को हटाने में जो खर्च आएगा उसका भुगतान कौन करेगा।
    - तटबंध बनाने के लिए किसानों की जमीन 2012 में ही ली गई थी। किसान जिस जमीन से फसल प्राप्त करते थे उनके हाथ से वह निकल चुकी थी। क्या किसानों को अब उनकी जमीन वापस की जाएगी? इस पांच साल के दौरान किसानों का जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई कौन करेगा?
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