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बैंक की जॉब छोड़ ये ऐसे कमा रहे लाखों रु., वाइफ भी सरकारी बैंक में थी एम्पलॉई

प्रत्यूष अब आधुनिक खेती कर रहा है। साथ ही डेयरी व मछली पालन भी कर रहा है।

अभय कुमार | Last Modified - Nov 06, 2017, 06:39 AM IST

  • बैंक की जॉब छोड़ ये ऐसे कमा रहे लाखों रु., वाइफ भी सरकारी बैंक में थी एम्पलॉई
    हसपुरा (औरंगाबाद).बैंक की नौकरी छोड़ हसपुरा के प्रत्यूष अब आधुनिक खेती कर रहा है। साथ ही डेयरी व मछली पालन भी कर रहा है। इससे हर माह उसे लाखों की कमाई हो रही है। 40 वर्षीय प्रत्यूष सिन्हा हसपुरा प्रखंड के मौआरी गांव का रहने वाला है। एमबीए तक की पढ़ाई कर चुके प्रत्युष 14 वर्षों तक नागपुर में अच्छे पैकेज पर बैंक की नौकरी की। उसकी पत्नी भी बैंकिंग की नौकरी में थी। लेकिन उन्हें सुबह से शाम तक बंद कमरे में नौकरी करना नहीं भाया और उसे छोड़कर खेती का रास्ता अख्तियार कर लिया।
    डेयरी व मछली पालन का आया था ख्याल

    प्रत्यूष सिन्हा को नौकरी के दौरान ही डेयरी व मछली पालन का ख्याल आया था। क्योंकि बैंक में आने वाले कई ग्राहक इस व्यवसाय से जुड़े थे और अच्छे पैसे कमा रहे थे। इधर अपने मिट्टी व गांव से काफी लगाव था। यही कारण था कि उसका झुकाव खेती की ओर लगातार बढ़ता चला गया। नौकरी के दौरान ही वह हरियाणा के करनाल में जाकर डेेयरी की ट्रेनिंग ली। फिर पत्नी के साथ खुद नौकरी छोड़ कर गांव चला आया।
    ढाई हेक्टेयर जमीन में शुरू की खेती और डेयरी के काम

    प्रत्यूष गांव पहुंचने के बाद अपने पुश्तैनी ढ़ाई हेक्टेयर यानी साढ़े चार बीघा जमीन में 3 तालाब खुदवाया। जिसके किनारे पर बागवानी और सब्जी की खेती लगायी। तालाब में रोहू, कतला जैसी मछलियों के बीज डाले। अच्छे तरीके से उनकी देखरेख की। जिसका नतीजा भी सामने आया। पहले ही खेप में उसे एक लाख रुपए से ज्यादा की मछली बिकी। वहीं अभी लाखों की मछली तालाब में पड़े हैं। जबकि पपीता, अमरूद व सब्जी की खेती से उसे 10 लाख रुपए बचत होने की उम्मीद है। 2 सालों में अब तक वह लाखों की कमाई कर चुका है। आगे यह व्यवसाय को व्यापक करने की योजना है।
    कभी चिढ़ाते थे लोग, आज सीख रहे हुनर

    अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर गांव आने के बाद लोग उसे चिढ़ाते थे। उसकी खेती के तरीकों को देखकर लोग उसका मजाक बनाते थे। लेकिन चंद दिनों में उसकी सफलता देखकर लोग मुरीद हो गए और आज आसपास के किसान उससे खेती के हुनर सीख रहे हैं। प्रत्यूष की प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा गांव पर ही हुई। उनके पिता डाॅक्टर थे। बड़े परिवार से वह ताल्लुक रखता है।

    लागत का 40 गुणा तक हो सकती कमाई

    प्रत्यूष बताते हैं कि आधुनिक खेती के साथ डेयरी व मछली पालन में लगी लागत से 40 गुणा ज्यादा तक कमाई की जा सकती है। आगे अपनी खेती व व्यवसाय व्यापक करने की योजना है। किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।
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