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सास को बचाने के लिए लोगों को रोक रही थी बहू, तभी भीड़ से आने लगी ये आवाज

सिमरिया धाम स्थित स्नान घाट एक के लिए जाने वाली सड़क, जो महज 5 फीट चौड़ी है, इसी सकरे रास्ते से अचानक आवाज सुनाई देती है।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 05, 2017, 06:11 AM IST

  • सास को बचाने के लिए लोगों को रोक रही थी बहू, तभी भीड़ से आने लगी ये आवाज
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    भगदड़ के बाद जूते और चप्पलों के ढेर से निकलते लोग।
    बीहट (बेगूसराय).सुबह 5.50 बजे सिमरिया धाम स्थित स्नान घाट एक के लिए जाने वाली सड़क, जो महज 5 फीट चौड़ी है, इसी सकरे रास्ते से अचानक आवाज सुनाई देती है। लोग हल्ला करते हैं अपनी जान बचाने के लिए। इसी सकरे रास्ते में राम जानकी मंदिर के ठीक सामने एक 70 वर्षीय महिला गिर जाती है। साथ में चल रहे परिजन पीछे से आ रही भीड़ को रोकने की कोशिश करते हैं। वृद्ध महिला को जब तक उठाने के लिए परिजन तैयार होते तब तक पीछे से आ रही भीड़ महिला को कुचलते हुए आगे बढ़ गई। इस बीच लोग अपनी जान बचाने के लिए भीड़ से निकलना चाह रहे थे और दुकानदार उन्हें अपनी दुकान में घुसने नहीं दे रहे थे।

    लोग जबरदस्ती होटलों में घुस रहे थे

    सुबह 5:55 बजे कंचन देवी गिर जाती हैं, उनके ऊपर लोग निकलने लगते हैं। कंचन देवी को घायल अवस्था में खीचने का प्रयास किया ही जा रहा था कि लोगों ने चिल्लाना शुरू कर दिया मैयर गेलै, मैयर गेलै। फिर क्या इतना सुनते ही लोग भीड़ में इधर-उधर भागने लगे। लोग जबरदस्ती होटल, और मंदिरों में जान बचाकर भागने लगे। इसी भागम-भागी में जिला सीतामढ़ी थाना बथनाहा के माधोपुर निवासी स्व योगेंद्र झा की पत्नी 75 वर्षीय त्रिवेणी देवी और तेघराही दरभंगा निवासी स्व मन्टुन मण्डल की 80 वर्षीय पत्नी शकुन्ती देवी की मौत भीड़ में दबने से हो गई।
    4 फीट के रास्ते से थी आवाजाही
    राजेन्द्र पुल स्टेशन के सामने आदि कुंभ स्थली सिमरिया धाम द्वार से सीधे लोग मुख्य घाट की ओर बढ़ रहे थे। वहीं राजेंद्र पुल से नीचे आने वाली सीढ़ी से भी लोग मुख्य घाट की ओर ही आ रहे थे। काफी चौड़ी सड़क से आ रहे लोगों के लिए महज चार फीट की सकरी सड़क घटना का मुख्य कारण बन गया। प्रत्यक्षदर्शी और स्थानीय दुकानदार संघ के अध्यक्ष महेश प्रसाद गुप्ता कहते हैं कि दोनों तरफ बरौनी रिफाइनरी के पाइप को सुरक्षित रखने के लिए जाल लगाया गया है।
    मंदिर की छत पर बच्चे को फेंका
    घटना के वक्त भीड़ में फंस गए समस्तीपुर आधारपुर निवासी लाल बाबू ठाकुर कहते हैं कि भीड़ ने यह भी सोचने का मौका नहीं दिया कि आखिर हुआ क्या। लोग अपनी अपनी जान बचाकर भाग रहे थे। मेरे साथ मेरा आठ वर्षीय पुत्र चन्दन स्नान कर लौट रहा था। भगदड़ की स्थिति बनते देख मैंने अपने पुत्र को सामने वाली मंदिर की छत पर फेंक दिया और खुद भी जान बचाकर किसी तरह निकल पाया। दोनों तरफ दुकान लगी होने के कारण लोग अपनी जान बचाने के लिए दुकान में भागना चाह रहे थे लेकिन दुकानदार दुकान में घुसने नहीं दिया।
    मंत्री बोले-व्यवस्था में थोड़ी सी चूक हुई
    यह भीड़ जिला प्रशासन के लिए पहला अनुभव रहा है, जिससे सबक लेकर आगे काम करने की जरूरत है। ये बातें पंचायत भवन में प्रेस वार्ता करते हुए बिहार सरकार के श्रम सह जिला प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कही। उन्होंने कहा कि अन्य वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष महाकुंभ को लेकर कार्तिक पूर्णिमा पर लोगों की भीड़ कई गुना बढ़ी है। डीएम नौशौद युसुफ ने कहा कि भगदड़ जैसी कोई घटना नहीं हुई है। अत्यधिक भीड़ होने से बुजुर्ग महिलाओं की दम घुटने से मौत हुई है।
    समिति की तरफ से 50 हजार का मुआवजा
    जिला प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा, डीएम नौशाद यूसुफ, एसपी आदित्य कुमार, कुंभ सेवा समिति के महासचिव रजनीश कुमार, संयोजक संजय कुमार, उपाध्यक्ष भूमिपाल राय ने घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। मौके पर कुंभ सेवा समिति की ओर से 50- 50 हजार अनुदान देने की घोषणा की गई।
    महासचिव रजनीश कुमार ने बताया कि कुंभ सेवा समिति सिमरिया धाम के प्रति बढ़ती इस आस्था ने यह साबित कर दिया कि लोग सिमरियाधाम के महाकुंभ की मान्यता को स्थापित किया है। पूर्णिमा के दिन जो परिवार आहत हुआ, कुंभ सेवा समिति उनके प्रति गहरी सवेदना व्यक्त करती है। साथ ही मृतक परिवार को 50 -50 हजार रुपये सहायता के लिए देती है।
    यहां चूके इसलिए हुआ हादसा
    - बाहर से आने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुल पर नौ पुरुष व चार महिला जवान की तैनाती थी, जो ड्यूटी के बजाए गपबाजी में लगे थे।
    - पुल से उतरने वाला सीढी है खतरनाक।
    - अत्यंत सकरी सड़कों से सैकड़ों की संख्या में गुजरते हैं लोग।
    - ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त, जिला प्रशासन के पास नहीं थी तैयारी।
    - जहां तहां वाहनों को गाड़ी खड़ी करने से रास्ता हुआ अस्त-व्यस्त।
    - घटनास्थल पर भी नहीं थी पुलिस।
    महिलाओं ने हमें भी गिरा दिया था
    घाट नंबर एक पर भगदड़ के कारण घायल हुए बांका सीटीएस ट्रेनिंग सेंटर के जवान शुभम कुमार, मनीष कुमार और मिथुन कुमार ने बताया कि हमलोग एक नंबर घाट पर रात के दो बजे से ड्यूटी कर रहे थे। अचानक पुल पर से उतने के दौरान लोगों का रैला आया और गंगा तट पर लोगों का हुजूम बढ़ गया। हमलोग जबतक कुछ सोच या कर पाते दर्जनों महिलाएं गिरने से बचने के लिए हमारे शरीर में ही लटक गई। जिससे बचाने के बजाय हमलोग ही घाट पर गिर गये। हमने तो समझा अब बचना मुश्किल है।
  • सास को बचाने के लिए लोगों को रोक रही थी बहू, तभी भीड़ से आने लगी ये आवाज
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    सिमरिया में भगदड़ के बाद जूते और चप्पलों का ढेर जमा हो गया।
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    इसी रास्ते में हुई मौत के बाद मची थी भगदड़। रास्ते के दोनों ओर दुकानें सजी हैं।
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    घायल जवान ने कैमरे को देखते ही चेहरा ढंक लिया।
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    सिमरिया पुल से इस तरह आता है श्रद्धालुओं का रेला।
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