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कभी 100 रुपए महीने में गुजारा करते थे ये सिंगर, एक गाने ने बना दिया था स्टार

फेमस सिंगर उदित नारायण की लाइफ स्ट्रगल वाली रही। बिहार के एक जिले में जन्मे उदित का जन्म एक किसान के घर में हुआ था।

Dainik Bhaskar

Nov 26, 2016, 01:42 AM IST
बिहार के एक जिले में जन्मे उदित का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। बिहार के एक जिले में जन्मे उदित का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था।
राजगीर/बिहार. फेमस सिंगर उदित नारायण की लाइफ स्ट्रगल वाली रही। बिहार के एक जिले में जन्मे उदित का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन में वे अपनी मां के साथ मैथिली भाषा में गाते थे फिर थियेटर्स में और फिर फाइव स्टार होटल्स तक में गाने गाए। लंबे स्ट्रगल के बाद उन्हें फिल्म उन्नीस-बीस में गाए गाने से पहचान मिली और वे स्टार बन गए। 100 रुपए महीने में करते थे गुजारा...
- सुपौल जिले के वाइसी गांव के करजाइन बाजार में एक गरीब किसान के घर उदित का जन्म हुआ था। वे चार भाई आैर उनकी एक बहन थी।
- उदित ने बताया कि 10 साल की उम्र से ही उन्हें गाने का शौक लग गया। अपनी मां उमेश्वरी झा के साथ शादी और उत्सव में वे मैथिली गाने गाते थे।
- वे बचपन से अपनी बहन के यहां रहने लगे और वहीं पढ़ाई-लिखाई करने लगे। वाइसी में दिवाली में मेला लगता था। जिसमें उन्हें मेले के थियेटर में गाना गाने का मौका मिलता था।
- कुछ दिन थियेटरों में गाने के बाद फारबिसगंज में लगे मेले में भी गाने का मौका मिला। कुछ पैसे की कमाई होने लगी तो संगीत के प्रति और उत्साह बढ़ता गया।
- उदित ने बताया कि उनके माता-पिता दुखी रहते थे कि वे अपना करियर बर्बाद कर रहे हैं। फिर उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की।
- पिता कहते थे कि काॅलेज जाकर पढ़ाई-लिखाई करो, लेकिन उनका मन पढ़ाई से ज्यादा संगीत में ही लगा रहा।
काठमांडू रेडियो पर मिला गाने का मौका
- उदित ने इंटरव्यू में बताया कि नेपाल में एक प्रोग्राम में मैथिली में गाना गया। वहां कुछ लोगों ने रेडियो पर गाने की सलाह दी।
- 1971 में पहली बार काठमांडू रेडियो पर गाने का मौका मिला, जो मेरे लिए यादगार था।
- 'सुन-सुन-सुन पनभरनी गे तनी घुरीयो के ताक' गीत मैंने गाया, जो श्रोताओं को काफी पसंद आया और धीरे-धीरे नेपाल के संगीत के क्षेत्र में कदम बढ़ता चला गया।

100 रुपए महीने में किया काम
- इंटर पास करने के आठ साल बाद उदित मुंबई चले आए। यहां 100 रुपए महीने पर काम करना शुरू किया।
- उदित ने रात में फाइव स्टार होटलों में गाना शुरू किया। वहां से करीब 150 रुपए मिल जाते थे।
- इसी बीच भारतीय विद्या भवन में संगीत की शिक्षा लेनी शुरू की, जिसे पूरा करने के बाद वे फिल्मी दुनिया में संघर्ष करने लगे। करीब दस साल तक वे दर-दर भटकते रहे।
( चर्चा में क्यों : सिंगर उदित नारायण राजगीर महोत्सव में भाग लेने राजगीर आए हुए थे। जहां उन्होंने अपने संघर्ष के दौर को शेयर किया।)
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, कैसे एक गाने ने उन्हें बना दिया था स्टार...
बचपन में वे अपनी मां के साथ मैथिली भाषा में गाते थे फिर थियेटर्स में और फिर फाइव स्टार होटल्स तक में गाने गाए। बचपन में वे अपनी मां के साथ मैथिली भाषा में गाते थे फिर थियेटर्स में और फिर फाइव स्टार होटल्स तक में गाने गाए।
पहली फिल्म उन्नीस-बीस से मिला ब्रेक
 
- उदित ने बताया कि संघर्ष के बाद उन्हें फिल्म उन्नीस-बीस में गाने का मौका मिला। लोगों को मेरी आवाज पसंद आई और फिर धीरे-धीरे फिल्में मिलने लगी। 
- कयामत से कयामत तक, पापा कहते हैं बेटा बड़ा नाम करेगा जबर्दस्त हिट रही। बहुत कुछ मेरे जीवन संघर्ष से जुड़ा था। 
- उन्होंने बताया कि रफी साहब के साथ फिल्म मेजर में गाने का उन्हें मौका मिला जो उनके लिए अद्भुत क्षण है। 
- उन्होंने बताया कि किशोर दा, रफी साहब, लता मंगेशकर सभी को अपना गुरु मानकर आगे बढ़ता चला गया। 
- लगान फिल्म आस्कर के लिए नॉमिनेट हुई। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खाप, सलमान खां, आमिर खान सहित सभी सुपर स्टारों के लिए अपनी आवाज दी है। 
- स्वदेश फिल्म भी सुपरहिट रही। आज गुरुजनों, माता-पिता और चाहने वालों के दुआ से सैकड़ों हिट गाने मेरे नाम हैं। 
 
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें,  36 भाषाओं में गाने गा चुके हैं उदित...
लंबे स्ट्रगल के बाद उन्हें फिल्म उन्नीस-बीस में गाए गाने से पहचान मिली और वे स्टार बन गए। लंबे स्ट्रगल के बाद उन्हें फिल्म उन्नीस-बीस में गाए गाने से पहचान मिली और वे स्टार बन गए।
36 भाषाओं में गा चुके हैं गाने
 
उन्होंने बताया कि 36 भाषा में वे गाना गाते हैं। 10 भाषा बोलते हैं। पांच बार फिल्म फेयर अवार्ड, तीन बार नेशनल अवार्ड मिला है। 2009 में पद्मश्री और 2016 में पद्मभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक अवार्ड दिया गया।
 
देश में बज रहा बिहार का डंका
 
उदित नारायण ने कहा कि फिल्म दुनिया ही नहीं पूरे देश में बिहार का डंका बज रहा है। फिल्मी दुनिया में बिहार से जो भी कलाकार जाते हैं मैं उनकी मदद करता हूं।
 
आगे की स्लाइड्स में देखें, उदित नारायण की चुनिंदा फोटोज...
सुपौल जिले के वाइसी गांव के करजाइन बाजार में एक गरीब किसान के घर उदित का जन्म हुआ था। सुपौल जिले के वाइसी गांव के करजाइन बाजार में एक गरीब किसान के घर उदित का जन्म हुआ था।
उदित ने बताया कि 10 साल की उम्र से ही उन्हें गाने का शौक लग गया। उदित ने बताया कि 10 साल की उम्र से ही उन्हें गाने का शौक लग गया।
उदित अपनी मां उमेश्वरी झा के साथ शादी और उत्सव में वे मैथिली गाने गाते थे। उदित अपनी मां उमेश्वरी झा के साथ शादी और उत्सव में वे मैथिली गाने गाते थे।
उदित बचपन से अपनी बहन के यहां रहने लगे और वहीं पढ़ाई-लिखाई करने लगे। उदित बचपन से अपनी बहन के यहां रहने लगे और वहीं पढ़ाई-लिखाई करने लगे।
वाइसी में दिवाली में मेला लगता था। जिसमें उदित को मेले के थियेटर में गाना गाने का मौका मिलता था। वाइसी में दिवाली में मेला लगता था। जिसमें उदित को मेले के थियेटर में गाना गाने का मौका मिलता था।
कुछ दिन थियेटरों में गाने के बाद फारबिसगंज में लगे मेले में भी गाने का मौका मिला। कुछ दिन थियेटरों में गाने के बाद फारबिसगंज में लगे मेले में भी गाने का मौका मिला।
उदित ने बताया कि उनके माता-पिता दुखी रहते थे कि वे अपना करियर बर्बाद कर रहे हैं। फिर उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। उदित ने बताया कि उनके माता-पिता दुखी रहते थे कि वे अपना करियर बर्बाद कर रहे हैं। फिर उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की।
पिता कहते थे कि काॅलेज जाकर पढ़ाई-लिखाई करो, लेकिन उनका मन पढ़ाई से ज्यादा संगीत में ही लगा रहा। पिता कहते थे कि काॅलेज जाकर पढ़ाई-लिखाई करो, लेकिन उनका मन पढ़ाई से ज्यादा संगीत में ही लगा रहा।
उदित ने इंटरव्यू में बताया कि नेपाल में एक प्रोग्राम में मैथिली में गाना गया। वहां कुछ लोगों ने रेडियो पर गाने की सलाह दी। उदित ने इंटरव्यू में बताया कि नेपाल में एक प्रोग्राम में मैथिली में गाना गया। वहां कुछ लोगों ने रेडियो पर गाने की सलाह दी।
1971 में पहली बार काठमांडू रेडियो पर गाने का मौका मिला, जो उदित के लिए यादगार था। 1971 में पहली बार काठमांडू रेडियो पर गाने का मौका मिला, जो उदित के लिए यादगार था।
'सुन-सुन-सुन पनभरनी गे तनी घुरीयो के ताक' गीत मैंने गाया, जो श्रोताओं को काफी पसंद आया और धीरे-धीरे नेपाल के संगीत के क्षेत्र में कदम बढ़ता चला गया। 'सुन-सुन-सुन पनभरनी गे तनी घुरीयो के ताक' गीत मैंने गाया, जो श्रोताओं को काफी पसंद आया और धीरे-धीरे नेपाल के संगीत के क्षेत्र में कदम बढ़ता चला गया।
कभी 100 रुपए महीने में गुजारा करते थे ये सिंगर, एक गाने ने बना दिया था स्टार
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बिहार के एक जिले में जन्मे उदित का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था।बिहार के एक जिले में जन्मे उदित का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था।
बचपन में वे अपनी मां के साथ मैथिली भाषा में गाते थे फिर थियेटर्स में और फिर फाइव स्टार होटल्स तक में गाने गाए।बचपन में वे अपनी मां के साथ मैथिली भाषा में गाते थे फिर थियेटर्स में और फिर फाइव स्टार होटल्स तक में गाने गाए।
लंबे स्ट्रगल के बाद उन्हें फिल्म उन्नीस-बीस में गाए गाने से पहचान मिली और वे स्टार बन गए।लंबे स्ट्रगल के बाद उन्हें फिल्म उन्नीस-बीस में गाए गाने से पहचान मिली और वे स्टार बन गए।
सुपौल जिले के वाइसी गांव के करजाइन बाजार में एक गरीब किसान के घर उदित का जन्म हुआ था।सुपौल जिले के वाइसी गांव के करजाइन बाजार में एक गरीब किसान के घर उदित का जन्म हुआ था।
उदित ने बताया कि 10 साल की उम्र से ही उन्हें गाने का शौक लग गया।उदित ने बताया कि 10 साल की उम्र से ही उन्हें गाने का शौक लग गया।
उदित अपनी मां उमेश्वरी झा के साथ शादी और उत्सव में वे मैथिली गाने गाते थे।उदित अपनी मां उमेश्वरी झा के साथ शादी और उत्सव में वे मैथिली गाने गाते थे।
उदित बचपन से अपनी बहन के यहां रहने लगे और वहीं पढ़ाई-लिखाई करने लगे।उदित बचपन से अपनी बहन के यहां रहने लगे और वहीं पढ़ाई-लिखाई करने लगे।
वाइसी में दिवाली में मेला लगता था। जिसमें उदित को मेले के थियेटर में गाना गाने का मौका मिलता था।वाइसी में दिवाली में मेला लगता था। जिसमें उदित को मेले के थियेटर में गाना गाने का मौका मिलता था।
कुछ दिन थियेटरों में गाने के बाद फारबिसगंज में लगे मेले में भी गाने का मौका मिला।कुछ दिन थियेटरों में गाने के बाद फारबिसगंज में लगे मेले में भी गाने का मौका मिला।
उदित ने बताया कि उनके माता-पिता दुखी रहते थे कि वे अपना करियर बर्बाद कर रहे हैं। फिर उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की।उदित ने बताया कि उनके माता-पिता दुखी रहते थे कि वे अपना करियर बर्बाद कर रहे हैं। फिर उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की।
पिता कहते थे कि काॅलेज जाकर पढ़ाई-लिखाई करो, लेकिन उनका मन पढ़ाई से ज्यादा संगीत में ही लगा रहा।पिता कहते थे कि काॅलेज जाकर पढ़ाई-लिखाई करो, लेकिन उनका मन पढ़ाई से ज्यादा संगीत में ही लगा रहा।
उदित ने इंटरव्यू में बताया कि नेपाल में एक प्रोग्राम में मैथिली में गाना गया। वहां कुछ लोगों ने रेडियो पर गाने की सलाह दी।उदित ने इंटरव्यू में बताया कि नेपाल में एक प्रोग्राम में मैथिली में गाना गया। वहां कुछ लोगों ने रेडियो पर गाने की सलाह दी।
1971 में पहली बार काठमांडू रेडियो पर गाने का मौका मिला, जो उदित के लिए यादगार था।1971 में पहली बार काठमांडू रेडियो पर गाने का मौका मिला, जो उदित के लिए यादगार था।
'सुन-सुन-सुन पनभरनी गे तनी घुरीयो के ताक' गीत मैंने गाया, जो श्रोताओं को काफी पसंद आया और धीरे-धीरे नेपाल के संगीत के क्षेत्र में कदम बढ़ता चला गया।'सुन-सुन-सुन पनभरनी गे तनी घुरीयो के ताक' गीत मैंने गाया, जो श्रोताओं को काफी पसंद आया और धीरे-धीरे नेपाल के संगीत के क्षेत्र में कदम बढ़ता चला गया।
कभी 100 रुपए महीने में गुजारा करते थे ये सिंगर, एक गाने ने बना दिया था स्टार
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