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18 बीडीओ-सीओ सहित 125 अफसरों और 100 पुलिसकर्मियों का बंद है वेतन

मुजफ्फरपुर के डीएम धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि डॉक्टर को वेतन नहीं देना गंभीर मामला है। चिकित्सक ने शिकायत की है।

Dainik Bhaskar

Nov 25, 2017, 07:32 AM IST
सरैया के एपीएचसी गंगोलिया  में हैं पदस्थापित डॉ. पीयूष। सरैया के एपीएचसी गंगोलिया में हैं पदस्थापित डॉ. पीयूष।

मुजफ्फरपुर. जन सरोकार के मामलों को नहीं निपटाने, समय से सौंपे गए कार्यों को पूरा नहीं करने व बैठकों से अनुपस्थित रहना मुजफ्फरपुर जिले के अफसरों के गले का फांस बन गया है। विभाग ने काम में लेटलतीफी के कारण 18 बीडीओ-सीओ सहित 125 अफसरों व 100 पुलिसकर्मियों का वेतन बंद कर दिया है। इनमें कई तो ऐसे हैं जिनका दो से तीन अफसरों ने वेतन बंद करने का आदेश दे रखा है। इस वजह से इनके अब परिवार के भरण-पोषण करने में परेशानी हो रही है।

बीडीओ व सीओ जैसे अफसर अपने मातहत से कर्ज लेने को विवश हैं। जनसुनवाई में देरी के कारण 16 प्रखंडों में 11 सीओ व 7 बीडीओ का वेतन बंद है। मामलों की जांच को समय से पूरा नहीं करने के कारण 100 से अधिक पुलिसकर्मी बिना वेतन के काम कर रहे हैं।

डॉक्टर पीयूष कुमार ने सीएम को पत्र लिख कर कहा-

सरैया के एपीएचसी गंगोलिया में पदस्थापित चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पीयूष कुमार 19 माह से वेतन नहीं मिलने पर बेहद तनाव में हैं। थक-हारकर अब उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न के कारण उनकी मन:स्थिति बक्सर के डीएम के ओएसडी जैसी हो गई है। बक्सर के ओएसडी ने कुछ दिन पहले आत्महत्या कर ली थी। इस पत्र से प्रशासनिक से लेकर स्वास्थ्य महकमे में सनसनी फैल गई है। दरअसल, डॉ. पीयूष की गत वर्ष मई में एपीएचसी गंगोलिया में नियुक्ति हुई थी। वह तब से बिना सैलरी काम कर रहे हैं। अब उनके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। पिछले माह से घर का किराया बकाया है। किराना दुकानदार ने भी उधार देने से मना कर दिया है।

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री
बिहार, पटना।

विषय : पिछले उन्नीस माह से बकाए वेतन भत्ता से उत्पन्न गंभीर मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न के संबंध में।
महाशय,
मैं डॉ. पीयूष कुमार, पिता - स्व. अनिल कुमार चौधरी, एपीएचसी, गंगोलिया, सरैया में स्वास्थ्य विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 2/नि.-05/16-535 (2) दिनांक 13/05/16 के आधार पर पदस्थापित एवं कार्यरत हूं।
मेरे योगदान की तिथि 14/05/2016 है। मेरा प्रान संख्या 110037904575 तथा वेतन पुर्जा संख्या 25011725023605 है।
- वेतन एवं अन्य प्रकार का भत्ता नहीं मिलने की वजह से मैं अपने सगे-संबंधियों से कर्ज लेकर जीवन-यापन करने के लिए बाध्य हूं एवं इस वजह से मैं एवं मेरा परिवार मानसिक एवं आर्थिक तौर पर पीड़ित है। इस की सूचना मौखिक एवं पत्र से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरैया तथा सिविल सर्जन, मुजफ्फरपुर को देता रहा हूं।
- दिनांक 11.11.2017 को लगभग दोपहर के 3 बजे मुझे दूरभाष संख्या 7301250097 से रमेश चंद्रा द्वारा जो कि सरैया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रधान लिपिक हैं सूचित किया गया कि मैं ट्रेजरी में आकर कुछ रुपये देकर अपना प्रान संख्या कार्यरत करवा लूं तो मुझे वेतन भुगतान कर दिया जाएगा। यह रुपया उन्होंने घूस के तौर पर मुझे देने को कहा। प्रधान लिपिक से बातचीत की रिकॉर्डिंग मेरे पास मौजूद है, जिसे मांगे जाने पर मैं प्रस्तुत करूंगा।
- प्राय: यह सुनने में आया है कि वेतन के अभाव में पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों में आत्महत्या कर लिया है। यह काफी तर्कसंगत लगता है। क्योंकि मैं भी काफी तनावग्रस्त होकर इस तरह की सोच उत्पन्न होने से अपने मस्तिष्क को रोकने में सक्षम नहीं हो पा रहा हूं। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सरैया द्वारा मुझे आर्थिक एवं मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है, ताकि मैं ऊबकर कोई गलत कदम उठा लूं एवं मेरा परिवार मेरे बाद संकटग्रस्त हो जाए।
- अत: आपसे निवेदन है कि वेतन भत्ता आदि का भुगतान करवाने की कृपा करें तथा सक्षम पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का कष्ट करें। ताकि मेरे भुगतान का मार्ग प्रशस्त हो सके। इसके लिए मैं आजीवन आपका आभारी रहूंगा।
विश्वासभाजन
डॉ. पीयूष कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी
अति.प्रा. स्वा. केंद्र, गंगोलिया, सरैया

सबसे अहम सवाल

- प्रान नंबर 19 माह में एक्टिवेट क्यों नहीं हुआ?
- क्या प्रान नंबर मिलने पर ही वेतन मिलेगा। यदि मिलता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है?
- प्रान नंबर 8 माह बाद क्यों आया?
- प्रान नंबर आ जाने के बाद भी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कोषागार को एक्टिवेट करने के लिए पत्र क्यों नहीं लिखा?
- हर माह आवेदन के बाद भी सिविल सर्जन ने संज्ञान क्यों नहीं लिया?

इनका है कहना

- मुजफ्फरपुर के डीएम धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि डॉक्टर को वेतन नहीं देना गंभीर मामला है। चिकित्सक ने शिकायत की है। इस मामले में दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।
- मुजफ्फरपुर की सिविल सर्जन डॉक्टर ललिता सिंह ने कहा कि जानकारी मिली है। आवश्यक कार्रवाई की गई है। प्रान नंबर नहीं मिलने के कारण इनका वेतन रुका था। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पत्र भेज इस संबंध में पूछा गया है।

मुख्यमंत्री के नाम डॉ.  पीयूष कुमार का पत्र। मुख्यमंत्री के नाम डॉ. पीयूष कुमार का पत्र।
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सरैया के एपीएचसी गंगोलिया  में हैं पदस्थापित डॉ. पीयूष।सरैया के एपीएचसी गंगोलिया में हैं पदस्थापित डॉ. पीयूष।
मुख्यमंत्री के नाम डॉ.  पीयूष कुमार का पत्र।मुख्यमंत्री के नाम डॉ. पीयूष कुमार का पत्र।
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