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लालू की सुरक्षा में 84, मांझी के लिए 59 जवान तैनात, जेड प्लस दर्जा बरकरार

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के घर से सीआरपीएफ का दस्ता लौट गया।

Dainik Bhaskar

Nov 29, 2017, 07:29 AM IST
Z Plus status retained of Lalu and Jeetan Ram Manjhi

पटना. बिहार सरकार ने साफ कर दिया है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की सुरक्षा में कोई कटौती नहीं की गई है। मंगलवार को विधानसभा में बिहार विशेष सुरक्षा दल (संशोधन) विधेयक 2017 पर चर्चा के दौरान ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने लालू की सुरक्षा में तैनात एनएसजी और मांझी की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के जवानों को हटाया है। इसके बाद भी लालू-राबड़ी देवी के घर पर बिहार के 84 और मांझी के घर पर 59 जवान तैनात हैं। सदन ने कांग्रेस के रामदेव राय के संशोधनों को खारिज करते हुए इस प्रस्ताव को ध्वनि मत से पास कर दिया।


ऊर्जा मंत्री ने कहा कि एसएसजी द्वारा मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और उनके अविवाहित बच्चों को सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। इसके लिए विशेष सुरक्षा बल में 531 जवानों का पद सृजित है। लालू व राबड़ी को सरकार ने कार, एस्कॉर्ट समेत पूरा कारकेड दिया है। इन दोनों की तरह मांझी को भी जेड प्लस की सुरक्षा उपलब्ध है।


मांझी के घर से लौटा सीआरपीएफ का दस्ता : पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के घर से सीआरपीएफ का दस्ता लौट गया। बीएमपी की टुकड़ी को चार्ज सौंपने के बाद सोमवार को सीआरपीएफ टीम बंगले से निकल गई। इसके साथ केंद्र से मांझी को मिली जेड प्लस सिक्यूरिटी समाप्त हो गई।

राज्य में अभी 839 लोगों पर पुलिस का एक जवान


इससे पहले विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस के रामदेव राय ने कहा कि बिहार में आम लोगों की सुरक्षा के लिए 39 हजार जवानों की जरूरत है, लेकिन सरकार का उस पर ध्यान नहीं है। राज्य में 839 लोगों पर पुलिस का एक जवान उपलब्ध है। इन जवानों को 16-16 घंटे काम करना पड़ता है। सरकार को इसकी भी चिंता नहीं है। वीवीआईपी की सुरक्षा पर 140 करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं। इसमें और 32 करोड़ रुपए का इजाफा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद से डर गए हैं।

मुझे अपनी सुरक्षा की चिंता नहीं : सीएम

पटना|मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम 12 साल से मुख्यमंत्री हैं, लेकिन केंद्र सरकार से आज तक सुरक्षा नहीं मिली है। मैंने न तो कभी अपनी सुरक्षा की चिंता की है और न ही इसे लेकर हाय-तौबा मचाया है। हमारे राज्य में कुछ ऐसे बहादुर भी हैं, जो सुरक्षाकर्मियों के चार-चार या पांच-पांच घेरे में रहना ही अपनी शान समझते हैं। मुख्यमंत्री मंगलवार को भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी के घर पर आयोजित जदयू विधानमंडल दल की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मैंने आज भी सुरक्षा के मुद्दे पर ट्वीट किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जदयू के एमएलसी और एमएलए सरकार के कामकाज और सामाजिक कुरीतियों के खात्मे के लिए चलाए जा रहे जन-जागरुकता अभियान का प्रचार करें। जदयू के सदस्य विधान परिषद और विधानसभा में मौजूद रहकर विपक्ष के आरोपों का तर्कों के साथ जवाब दें। मैं 7 दिसंबर से विकास योजनाओं की समीक्षा यात्रा पर रवाना हो रहा हूं। अपनी यात्रा के क्रम में मैं उन गावों में जाऊंगा, जहां पर मैं वर्ष 2009 में गया था।

नीतीश कुमार ने ट्वीट कर कहा कि राज्य सरकार की ओर से जेड प्लस श्रेणी व एसएसजी की मिली हुई सुरक्षा के बावजूद केंद्र सरकार से एनएसजी और सीआरपीएफ के सुरक्षाकर्मियों की उपलब्धता के जरिए लोगों पर रौब झाड़ने की मानसिकता क्या साहसी व्यक्तित्व का परिचायक है।

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