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फिर शुरू हुआ केसरिया बौद्ध स्तूप का उत्खनन, 30 एकड़ में है स्तूप

6 वर्ष पहले
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मोतिहारी। विश्व प्रसिद्ध केसरिया बौद्ध स्तूप का उत्खनन दोबारा शुरू किया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की देख-रेख में उत्खनन का काम चल रहा है। स्तूप की पश्चिम दिशा में उत्खनन हो रहा है। इसमें सीढ़ीनुमा कई सतह की दीवारें मिली हैं। इन दीवारों में सेल भी मिले हैं, जिनमें भगवान बुद्ध की क्षतिग्रस्त प्रतिमाएं हैं। स्तूप के निचले हिस्से में काले पत्थर से निर्मित स्तंभ भी मिले हैं। इन पर आकर्षक कलाकृतियां बनी हैं। माना जा रहा है कि कलाकृतियां 2000-5000 ई. पूर्व की हैं।

खुदाई की देख-रेख कर रहे केयरटेकर ने बताया कि नवंबर 2014 से दोबारा काम शुरू किया गया है। इसमें दुर्लभ अवशेष मिलने की संभावना है। भगवान बुद्ध सेवा संस्थान के सचिव सीताराम यादव ने बताया कि पूरी खुदाई होने से महत्वपूर्ण अवशेष मिल सकते हैं। उन्होंने पूरे स्तूप परिसर व रानीवास की खुदाई कराने की मांग की।
30 एकड़ में है स्तूप
केसरिया का बौद्ध स्तूप 30 एकड़ में फैला है। 104 फीट ऊंचे स्तूप के समीप रानीवास, केसर बाबा का मंदिर आदि प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। खुदाई के कारण स्तूप पर चढ़ने पर रोक लगा दी गई है। इसे स्थानीय लोग देउड़ा व राजा बेन का गढ़ मानते हैं। वर्ष 2001 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, पटना अंचल के पुरातत्ववेत्ता मो के के साहब ने देउड़ा को विश्व का सबसे ऊंचा स्तूप घोषित किया था।
2004 से बंद था उत्खनन
केसरिया स्तूप का उत्खनन पहली बार 1998 में शुरू हुआ था। करीब छह वर्षों बाद 2004 में उत्खनन का काम बंद कर दिया गया। तब से लोग दोबारा उत्खनन शुरू कराने की मांग कर रहे थे। पहली बार उत्खनन के दौरान भागवान बुद्ध की कई दुर्लभ प्रतिमाएं मिली थीं।
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