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भीखमदास ठाकुरबाड़ी में बनेगा शंखों का म्यूजियम

एक वर्ष पहले
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आमतौर पर पूजा पाठ की विधि विधान को शुरु करने और आसपास के वातावरण को शुद्ध करने के लिए शंख बजाया जाता है। हिन्दू धर्म में पूजा स्थल पर शंख रखने की भी परंपरा है क्योंकि शंख को सनातन धर्म का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म के हर शुभ कार्य के लिए शंख का प्रयोग होता है। शंख को लोग उसकी खूबसूरती और पवित्रता को ध्यान में रखकर भी घरों में रखते हैं। हिन्दू मान्यता के अनुसार कोई भी पूजा, हवन, यज्ञ आदि शंख के उपयोग के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है । इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए शहर के बाकरगंज स्थित बाबा भीखमदास ठाकुरबाड़ी लोगों को शंख की दुनिया से परिचित कराने जा रहा है। इस ठाकुरबाड़ी में शंखों के लिए म्यूजियम बनाने की तैयारी चल रही है। बाबा भीखमदास ठाकुरबाड़ी में शंखों का अनूठा संग्रह है। ठाकुरबाड़ी के ऊपरी तल्ले पर शंखों के लिए म्यूजियम बनाने की प्रकिया शुरु हो गयी है। संभवत: छह माह के अंदर ही श्रद्धालु शंख का म्यूजियम देख सकेंगे।

ढाई किलो के शंख रखे जाएंगे म्यूजियम में

भीखमदास ठाकुरबाड़ी के म्यूजियम में 100 ग्राम से लेकर ढाई किलो के शंख देखे जा सकेंगे। मंदिर प्रबंधन की मानें तो कम से कम 800 साल पुराने शंखों को प्रदर्शित किया जाएगा। शंखों के संग्रह में उन शंखों को प्रमुखता दी गयी है, जिन्हें साधु-संत अपने तीर्थ के क्रम में विभिन्न जगहों से लाकर ठाकुरबाड़ी में रखते थे। म्यूजियम में लगभग 35 से अधिक शंखों को प्रदर्शित किया जाएगा। हर शंख प्राचीन काल से ही ठाकुरबाड़ी में है।

भीखमदास ठाकुरबाड़ी में शंखों का म्यूजियम बनाया जाएगा।

सबसे बड़ा दधमऊ शंख आर्कषक का केंद्र

ठाकुरबाड़ी में जो म्यूजियम बनने वाली है उसका मुख्य आकर्षण दधमऊ शंख होगा। यह शंख ढाई किलो का है। इसके अलावे ढपोल,पांचजन्य, ऋषिकेश और देवदत्त जैसे शंख भी म्यूजियम में रखे जाएंगे। मंदिर प्रबंधन की मानें तो भारत की संस्कृति,शंखों का महत्व अादि के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी। जैसे घर में पूजा करने वाले शंख का क्या महत्व है। वहीं महाभारत के युद्ध में जब शंख बजाया जाता था तो उसका क्या अर्थ होता था। इन सब बातों का जिक्र भी विस्तार से प्रदर्शित किया जाएगा। पंडित विप्लव कौशिक ने कहा कि भीखमदास ठाकुरबाड़ी में रखे सभी शंख प्राचीन हैं। श्रद्धालुओं को शंख की जानकारी और अपनी महान विरासत के बारे में जानकारी देने के लिए शंखों का म्यूजियम बनाया जा रहा है। जल्द ही यह म्यूजियम बनकर तैयार हो जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए म्यूजियम में शंख देखने के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। ठाकुरबाड़ी में दुर्लभ शंखों का संग्रह है। इनके इतिहास से लोग रू-ब-रू होंगे। दधमऊ शंख की मान्यता है कि भगवान नारायण इसी शंख को धारण करते हैं। यह शंख उनके हाथों में रहता है। इसी तरह हर शंख के बारे में बताया जाएगा। आठ प्रकार के शंखों का इतिहास बताया जाएगा।
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