एईएस का कहर / मंगल पांडेय ने लिया एसकेएमसीएच का जायजा, कहा- जल्द शुरू होगा 100 बेड का नया वार्ड

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 12:12 PM IST



एसकेएमसीएच में डॉक्टरों के साथ बैठक करते मंगल पांडेय। एसकेएमसीएच में डॉक्टरों के साथ बैठक करते मंगल पांडेय।
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एसकेएमसीएच में डॉक्टरों के साथ बैठक करते मंगल पांडेय।एसकेएमसीएच में डॉक्टरों के साथ बैठक करते मंगल पांडेय।

  • अस्पताल में आज से 6 अतिरिक्त एम्बुलेंस लगाए जा रहे हैं
  • जल्द ही 100 बेड के नए वार्ड की शुरुआत होगी

मुजफ्फरपुर. मस्तिष्क ज्वर (एईएस) के चलते 12 दिनों में 71 बच्चों की मौत हो चुकी है। मुजफ्फरपुर, वैशाली, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण समेत 12 जिलों में बच्चों के इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना है। एईएस पीड़ित बच्चों को समुचित इलाज मिले इसके के लिए बिहार सरकार और केंद्र सरकार मिलकर काम कर रही है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच पहुंचे और एईएस के शिकार बच्चों का हाल जाना। 

 

मंगल पांडेय ने बीमार बच्चों के माता-पिता से बात की। इसके साथ ही डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन के साथ बैठक की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंगल पांडेय ने बताया कि अस्पताल में आज से 6 अतिरिक्त एम्बुलेंस लगाए जा रहे हैं। जल्द ही 100 बेड के नए वार्ड की शुरुआत होगी। 

 

थम नहीं रहा एईएस का कहर
एईएस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित 9 और बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एसकेएमसीएच में 22 बच्चे भर्ती हुए। वहां 8 की मौत हो गई। वहीं, केजरीवाल अस्पताल में पांच बच्चों को भर्ती किया गया, जिसमें एक बच्चे ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही पिछले 12 दिनों में मरने वाले बच्चों की संख्या 71 हो गई है। 

 

स्वास्थ्य विभाग की केंद्रीय टीम के सदस्य डॉ.अरुण कुमार सिन्हा ने पीड़ित बच्चों की बीमारी के बारे में एसकेएमसीएच के पैथोलॉजी व शिशु विभाग के एचओडी के साथ तीन घंटे तक चर्चा की। इसमें सभी बच्चों में एक ही तरह की केस हिस्ट्री सामने आ रही है। सभी बच्चों के पैथोलॉजिकल जांच में लीवर, किडनी और फेफड़ों में खराबी आने की बातें सामने आईं। साथ ही बच्चों में ग्लूकोज लेवल का सबसे न्यूनतम स्तर 20-35 रहना बताया गया।

 

डॉ. सिन्हा ने कहा कि एसकेएमसीएच में बीमारी से निपटने के लिए ट्रामा सेंटर, ट्रेंड स्टाफ, बेहतरीन वार्ड, उपकरण व बीमार बच्चों की सही देखभाल की जरूरत है। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम (एसओपी) के तहत बच्चों की जांच व इलाज किया गया है। उसे और बेहतर बनाया जाएगा।

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