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देशी गायों के नस्ल सुधार कार्यक्रम को लागू करे बिहार पशु विज्ञान विवि

देशी गायों के नस्ल सुधार कार्यक्रम को बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय तत्परतापूर्वक अमल करे

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 07:26 PM IST

पटना. राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि देशी गायों के नस्ल सुधार कार्यक्रम को बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय तत्परतापूर्वक अमल करे। विवि को देशी नस्ल की गायों के नस्ल सुधार की दिशा में तेजी से काम करने की जरूरत है। इसके लिए आवश्यक शोध कार्यक्रम बनाएं।

बुधवार को राजभवन में बिहार पशु विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह ने राज्यपाल से मुलाकात कर कई जानकारी दी। राज्यपाल ने कुलपति को बिहार में गिर, साहिवाल और थारपारकर नस्ल की गाय की नस्ल विकास का सुझाव दिया।

राज्यपाल ने कहा कि देशी नस्ल की गायों में रोग प्रतिरोधक क्षमता तुलनात्मक रूप से काफी अधिक होती है। ये गायें बिहार और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों के ज्यादा तापमान वाले इलाकों के भी अनुकूल होती हैं। ये गायें बिहार और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों के ज्यादा तापमान वाले इकालों के भी अनुकूल हैं। इनके रख रखाव और चिकित्सा पर भी काफी कम खर्च होता है।

राज्यपाल ने कहा कि देशी नस्ल की गायों से कम लागत पर ही ज्यादा दुग्ध-उत्पादन लिया जा सकता है। प्रति लीटर दुग्ध-उत्पादन पर कम लागत के कारण यह अल्प आय वाले पशु-पालकों के लिए भी उपयोगी हैं। राज्यपाल ने कुलपति को देशी नस्ल की गायों में भु्रण-धारण के क्रम में लिंग-निर्धारण की पद्धति विकसित करने के लिए आवश्यक शोध-कार्य को गंभीरतापूर्वक संचालित करने को कहा।

राज्यपाल ने कहा कि दुग्ध-संग्रहण के कार्य में लगी सहकारी संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए भी विश्वविद्यालय को आवश्यक परियोजनाएं संचालित करनी चाहिए। इनसे सम्बद्ध और अन्य वैसे सभी पशुपालकों को प्रत्येक वर्ष पुरस्कृत और सम्मानित करने का कार्यक्रम बनाना चाहिए, जो देशी नस्ल की गायों या अन्य पशुओं के जरिये अधिक दुग्ध-उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कुलपति ने राज्यपाल को आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय उनके मार्ग-निर्देशों और सुझावों पर तत्परतापूर्वक अमल करेगा।