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आत्महत्या की प्रवृत्ति रोकने के लिए लाएं जागरुकता

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बिहार और इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी बिहार के...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 04:30 AM IST
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बिहार और इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी बिहार के तत्वावधान में जीवन के पक्ष में : आपके साथ हम जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन आईएमए हॉल में किया गया। इस दौरान युवाओं को आत्महत्या से रोकने के लिए जागरूक करने का संकल्प लिया गया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार, राज्य सचिव ब्रजनंदन कुमार, डॉ. केपी सिंह, पीएमसीएच में साइकेट्रिक विभागाध्यक्ष डॉ. पीके सिंह, इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी के महासचिव डॉ. विनय कुमार और इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी की सचिव डॉ. नुपूर निहारिका ने आत्महत्या रोकथाम विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। डॉ. अजय कुमार ने कहा कि सुसाइड आज सिर्फ शहरों की समस्या नहीं है। इसका असर गांवों में भी देखने को मिलता है। इस कार्यक्रम को बिहार भर में चारों ओर ले जाने की जिम्मेवारी इन दोनों संस्थानों ने ली है, जो सराहनीय है। आत्महत्या के 80 फीसदी मामले डिप्रेशन की वजह से सामने आते हैं, जिसका उपचार किया जा सकता है। इसे संभालने के लिए कुशलता की जरूरत है। इस मानसिक बीमारी के हिंट्स को पकड़ना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

15 से 29 साल के बीच मरने

वालों में आत्महत्या दूसरी वजह

डॉ. नुपूर निहारिका ने कहा कि सुसाइड अननेचुरल डेथ है, जो अपनी हत्या के लिए खुद जिम्मेदार होता है। वक्ताओं ने कहा कि दुनियाभर में आत्महत्या से होने वाले 8,00,000 मामलों में 17 फीसदी भारतीय की होती है। इस कारण से 15 से लेकर 29 वर्ष के बीच के मरने वालों में आत्महत्या दूसरी प्रमुख वजह है। दुनियाभर में हर एक लाख में सुसाइड से मरने वालों की संख्या औसतन 12 है। कार्यक्रम का संचालन इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी बिहार के अध्यक्ष यूके सिन्हा ने किया।