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गांधी युग के हिंदी सेवी देशभक्तों में बदरीनाथ का स्थान सबसे ऊंचा

Patna News - आचार्य बदरीनाथ ने अपनी आखिरी सांस तक राष्ट्र और राष्ट्रभाषा को संवारने में लगाया। उनका व्यक्तित्व निरहंकार है और...

Nov 11, 2019, 09:30 AM IST
आचार्य बदरीनाथ ने अपनी आखिरी सांस तक राष्ट्र और राष्ट्रभाषा को संवारने में लगाया। उनका व्यक्तित्व निरहंकार है और उनकी सादगी मनुष्य जाती के लिए गौरव की बात है। गांधी युग के हिंदी सेवी देशभक्तों में उनका स्थान ऊंचा है। ये बातें आचार्य बदरीनाथ वर्मा के जीवनी लेखक डॉ. कुणाल कुमार ने रविवार को कही। मौका था बिहार राज्य अभिलेख भावन में मैथिल कवि विद्यापति और आचार्य बदरीनाथ वर्मा के जयंती समारोह का। कार्यक्रम की शुरुआत सचिव सह निदेशक इम्तियाज अहमद करीमी ने साहित्यकारों के जीवन पर प्रकाश डालते हुए की। पीयू के मैथिली के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र झा ने कहा कि विद्यापति भारतीय साहित्य की भक्ति परंपरा के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। डॉ. बासुकीनाथ झा ने कहा कि विद्यापति शृंगार के कवि हैं फिर भी भक्ति के दर्शन उनके पदों में होते हैं। मौके पर वरिष्ठ कवि डॉ. संजय पंकज ने कहा कि आचार्य वर्मा गहन सात्विकता के साधु पुरुष थे। संस्कृत, हिंदी, बांग्ला के गंभीर ज्ञाता बदरी बाबू को संपूर्ण गीता कंठस्थ थी। दोनों साहित्यकारों के बारे में चर्चा हुई और इसके बाद एक कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया।

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